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समर्पण का भाव है भक्ति: राजेश

Lakhimpur Updated Mon, 04 Jun 2012 12:00 PM IST
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लखीमपुर खीरी। भक्ति समर्पण का भाव है। सच्चा भक्त कभी छल कपट का व्यवहार नहीं क र सकता। प्रभु केवल प्रेम के भूखे हैं। जब तक हृदय में काम, क्रोध, लोभ, मोह अहंकार आदि का बसेरा है तब तक प्रभु मनमंदिर में नहीं आ सकते। यह बात अखिल विश्व गायत्री परिवार शांतिकुंज के परिव्राजक पंडित राजेश दीक्षित ने ग्राम रौली में वेद माता गायत्री प्रज्ञापीठ के प्रांगण में आयोजित गायत्री महायज्ञ में प्रज्ञापुराण की कथा सुनाते हुए कही।
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पंडित राजेश दीक्षित ने कहा मीरा ने सच्चा समर्पण किया था। उनका विष का प्याला भी अमृत हो गया। इनके अलावा हनुमान जी, सूरदास, कबीर और तुलसी ने भी सच्चा समर्पण किया। जब सच्चा समर्पण होता है तो भक्त भगवान एकाकार हो जाते हैं। कार्यक्रम का संचालन करते हुए पंडित कौशलेंद्र शर्मा ने यज्ञ के महत्व पर प्रकाश डाला। कार्यक्रम में व्यवस्थापक प्रधान शोभा शर्मा,राम गोपाल शर्मा, अवधेश वाजपेई, रामसनेही शुक्ल, बैजनाथ त्रिवेदी, आदि ने सहयोग किया। यहां साहित्य के स्टाल भी लगाए गए। पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ में क्षेत्र केहजारों लोगों ने आहुतियां दी।

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