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घोसियाना, बंजरिया का शारदा के कहर से बच पाना मुश्किल!

Lakhimpur Updated Sat, 02 Jun 2012 12:00 PM IST
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विभागीय प्रक्रिया में अटकी 2.38 करोड़ रुपये की कार्ययोजना
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दोनों गांवों की आबादी तक पिछले साल पहुंच चुकी शारदा
सदर विधायक की पहल पर सिंचाई महकमे ने तैयार की योजना
लखीमपुर खीरी। नकहा विकास खंड क्षेत्र के ग्राम घोसियाना व बंजरिया की आबादी को इस बार शारदा के कहर से बचा पाना सिंचाई महकमे के लिए किसी टेढ़ी खीर से कम नहीं। वजह विभाग द्वारा तैयार 2.38 करोड़ रुपये की परियोजना को फिलहाल शासन से अभी हरी झंडी नहीं मिल सकी है। यह हाल तब है जब बरसात का सीजन शुरू होने में चंद दिन शेष रह गए हैं। कार्य शुरू न होने से दोनों गांवों के लोगों की नींद उड़ी हुई है तथा उन्हें बेघर होने की चिंता सताए जा रही है।
सदर विधान सभा क्षेत्र अंतर्गत आने वाले ग्राम घोसियाना तथा बजंरिया गांव की कहानी भी जिले के तमाम उन गांवों जैसी ही है जहां पिछले साल बाढ़-कटान का दंश लोगों ने झेला है। कभी इन दोनों गांवों से करीब दो किमी दूर बहने वाली शारदा ने पिछले साल ऐसा रुख अख्तियार किया कि गांव के निकट पहुंच गई। गांव निवासी कुछ ग्रामीणों की कृषि भूमि व आबादी को भी अपने आगोश में ले लिया। ग्रामीणों के आग्रह पर सदर विधायक उत्कर्ष वर्मा ने दो माह पूर्व इस गांव का दौरा कर स्थिति का जायजा लिया था। उन्होंने दोनों गांवों को बाढ़ से बचाने के लिए शासन से प्रयास करने की मांग की थी। शासन से हरी झंडी मिलने के बाद सिंचाई महकमे ने वहां बचाव कार्य की 2.38 करोड़ रुपये की कार्य योजना तैयार की। योजना के मुताबिक नदी को गांव की आबादी की ओर बढ़ने से रोकने के लिए इसीजी बैग, जीईओ बैग तथा परक्यूपाइन के माध्यम से बचाव कार्य कराया जाना है। सूत्र बताते हैं कि बरसात से पहले अगर यह कार्य पूर्ण हो जाता है तो निश्चित तौर पर दोनों गांवों को नदी में समाने से रोका जा सकता है, लेकिन कार्ययोजना को हरीझंडी मिलने की विभागीय प्रक्रिया इतनी लंबी है कि दोनों गांवों को बाढ़ से बचाना महकमे के लिए टेढ़ी खीर से कम नहीं होगा।
हालांकि अधिशाषी अभियंता द्वारा तैयार की गई इस कार्ययोजना को निरीक्षण के बाद अधीक्षण अभियंता तथा मुख्य अभियंता तक ने ‘ओके’ कर दिया है तथा पत्रावली प्रमुख अभियंता समिति की आठ जून को लखनऊ में होने वाली बैठक के लिए भेज दी गई है। अगर वहां भी यह कार्य योजना पास हो गई उसे तकनीकि समिति में भेजा जाएगा। उसके बाद यह कार्य योजना विभागीय मंत्री की अध्यक्षता में होने वाली स्क्रीनिंग कमेटी की बैठक में रखी जाएगी। वहां से यह तय होगा कि केंद्र सरकार इस कार्ययोजना के लिए कितना पैसा दे सकती है तथा प्रदेश सरकार को इसके लिए कितना धन देना होगा। इसके बाद वित्त विभाग को बजट एलाट करने के लिए भेज दी जाएगी। सूत्रों की मानें तो इन प्रक्रियाओं में अमूमन छ: माह या उससे अधिक का समय लगता है, जबकि मानसून सत्र शुरू होने में अब सिर्फ 14 दिन शेष रह गए हैं। ऐसे में इन दोनों गांवों को बाढ़-कटान से बचाने की सिंचाई महकमे की इस योजना पर कार्य शुरू हो पाना फिलहाल टेढ़ी खीर लग रहा है।

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दोनों गांवों को कटान से बचाने की कार्ययोजना प्रशासन के माध्यम से शासन को भेज दी है। विभागीय नियम व कायदे इस तरह जटिल हैं कि किसी भी योजना के पास होने में लंबा समय लग जाता है। शासन से जब तक प्रक्रिया पूरी हो बजट एलाट नहीं हो जाता वह किसी तरह का कोई कार्य नहीं करा सकते। यह सही है कि अगर जल्द वहां बचाव कार्य शुरू नहीं हुआ तो दोनों का गांवों को कटने से रोक पाना मुश्किल होगा।
मोहम्मद ओवैद सिद्दीकी, ईई बाढ़ खंड
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मैंने आज मुख्यमंत्री अखिलेश यादव से मुलाकात की है। उनसे कटान से दोनों गांवों को बचाने के लिए तैयार योजना पर शीघ्र कार्य शुरू कराने की भी मांग की है। सीएम ने आश्वासन दिया है कि बाढ़-कटान से बचाने के लिए वह शीघ्र कार्य शुरू करवाएंगे, पीड़ितों की समस्या का स्थाई समाधान करने का भी प्रयास करेंगे।
उत्कर्ष वर्मा उर्फ मधुर, सदर विधायक

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