रोगियों की भरमार, डाक्टरों की दरकार

Lakhimpur Updated Wed, 30 May 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। जनता को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं देने का सरकार का वादा भी हवाई साबित हो रहा है। मरीजों को बेहतर तो क्या काम चलाऊ स्वास्थ्य सेवाएं भी नहीं मिल पा रही हैं। गर्मी के मौसम में रोगी तो बढ़ रहे हैं लेकिन डाक्टर कम होते जा रहे हैं। कुछ डाक्टर स्थानांतरित हो गए तो कुछ ने अवकाश ले लिया। अब जिला अस्पताल की ओपीडी में मरीजों की भीड़ तो दिखती है लेकिन कक्ष में डाक्टर नहीं। घंटों डाक्टर की प्रतीक्षा करने के बाद मरीज वापस चले जाते हैं। प्राइवेट डाक्टरों की सेवाएं इतनी महंगी हैं कि आम आदमी उनसे इलाज नहीं करा सकता। आखिर आम जनता जाए तो कहां जाए?
जिला अस्पताल की ओपीडी में प्रतिदिन लगभग 800 मरीज आते हैं इसमें से लगभग 50 मरीज भर्ती के योग्य होते हैं। इसमें 40 से 45 मरीज अति गंभीर होते हैं। गर्मी का मौसम होने के चलते इस समय मरीजों की संख्या कुछ ज्यादा ही बढ़ गई है। मंगलवार को लगभग 11.30 बजे ओपीडी में मरीजों की भीड़ थी, लेकिन डाक्टरों का कहीं पता नहीं था। एक डाक्टर ड्यूटी पर तो थे लेकिन उनकी कुर्सी खाली पड़ी थी। वहां कोई पर्ची जमा करने वाला भी नहीं था। एक फिजीशियन तीन महीने के मेडिकल अवकाश पर बताए जा रहे हैं। उनके कमरे के बाहर मरीजों की अच्छी-खासी संख्या थी। सर्जन कक्ष भी खाली था और लोग इंतजार में खड़े थे। अस्प्ताल के एक मात्र सर्जन डा. एसके पांडे एक सप्ताह की छुट्टी पर हैं। इसके आगे बढ़े तो डाक्टर एचजी सिंह का कक्ष भी खाली पड़ा था। मालूम हुआ डाक्टर साहब का स्थानांतरण हो गया है। हड्डी रोग वाले कक्ष के बाहर भी मरीजों की भीड़ लगी थी। डाक्टर साहब किसी मरीज को देखने गए थे। अस्पताल में बाल रोग विशेषज्ञ तथा नेत्र सर्जन मरीजों को देख रहे थे।
बाक्स
नहीं मिलते डाक्टर
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मोहल्ला शांतीनगर निवासी रुखसाना बताती हैं उन्हें कई दिन से बुखार है फिजीशियन को दिखाने कल भी आई थीं। आज फिर सुबह से बैठी हैं लेकिन डाक्टर साहब मिलते ही नहीं।
बर्बाद हो जाता है पूरा दिन
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शहर से लगभग 40 किलोमीटर दूर कस्बा निघासन से यहां इलाज कराने के लिए आई कश्मीर कौर बताती हैं,कि पेट में सूजन है। फिजीशियन को दिखाने आई थीं सुबह नौ बजे से बठी हैं। पूरा दिन बरबाद हो जाता है लेकिन डाक्टर नहीं मिलते।
बिना देखे ही चले गए डाक्टर
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शहर से लगभग 25 किलोमीटर दूर गांव भदफर से आने वाली मोहिनी बताती हैं, कि गरदन टूटती है, सिरदर्द और बुखार रहता है। कल आई थीं तब डाक्टर साहब थे लेकिन उठकर चले गए देखा नहीं। आज फिर सुबह नौ बजे से बैठी हैं।
बिना दिखाए ही वापस लौटना पड़ता है
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शहर के पास गांव महेवागंज निवासी हकीमुन निशा ने बताया वे खांसी, जुकाम व बुखार से पीड़त हैं। कल भी आई थीं। भीड़ में दिखा नहीं पाई वापस चलीं गईं। आज फिर सुबह दस बजे से बैठी हैं।
वर्र्जन---
जिला अस्पताल के सर्जन डा. एके अग्रवाल और हड्डी रोग विशेषज्ञ डा. एसपी सिंह सस्पेंड हो गए। डा. शुभ्रांशु शुक्ला, डा. एचजी सिंह तथा डा. आरसी गुप्ता स्थानांतरित हो चुके हैं। डा. एसपी वर्मा मेडिकल अवकाश हैं तथा सर्जन डा. एसके पांडे भी एक सप्ताह की छुट्टी पर हैं। इससे अचानक डाक्टरों की कमी हो गई है। उन्होंने व्यवस्था सुधारने के लिए सीएमओ से कहा है कि ग्रामीण क्षेत्रों के डाक्टर तैनात कर दें, ताकि व्यवस्था संचालित करने में दिक्कत न हो। इमरजेंसी में हर समय मरीज देखे जाते हैं।
डा. एन के शर्मा, मुख्य चिकित्सा अधीक्षक

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