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यू टर्न ले रहा किशनपुर में बाघ शव बरामदगी का मामला

Lakhimpur Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
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पलियाकलां। दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर क्षेत्र में पाए गए बाघ के शव का मामला अब यू टर्न पर है। बरामदगी के दिन तक शिकार लग रहा यह मामला अब टेरीटेरी की आपसी जंग में मौत होने की ओर मुड़ता नजर आ रहा है। बताया जा रहा कि पीएम से पहले की गई पड़ताल में बाघ की पुट्ठे की हड्डियां टूटी और पंजों के निशान पाए गए हैं। अब पीएम रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है।
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गौरतलब है कि दुधवा टाइगर रिजर्व के किशनपुर परिक्षेत्र में 23 नंबर रोड के पास एक बाघ का शव पड़ पाया गया था। शव के पुट्ठे पर पूंछ के पास रगड़न के निशान और पंजों के पास गहरा घाव बताया जा रहा था , घाव का यह निशान करंट जैसा बताया जा रहा था। शव को पोस्टमार्टम के लिए आईवीआरआई बरेली भेजा गया है। इससे पहले की गई चिकित्सकीय पड़ताल में वहां बाघ की मूंछों और नाखून को सलामत बताया गया है और पुट्ठे पर कई हडडियों के टूटने के साथ पंजों के निशान भी बताए जा रहे हैं। अधिकारी इससे इसे बाघों के वर्चस्व की जंग मानने लगे हैं और इसी में इस बाघ की मौत होने की संभवानाएं जताई जाने लगी हैं। अब आईवीआरआई से पीएम रिपोर्ट का इंतजार हो रहा है। रिपोर्ट आने के बाद ही अधिकारी कुछ कहेंगे। डिप्टी डायरेक्टर दुधवा गणेश भट्ट ने भी रिपोर्ट आने से पहले कुछ कहने से इंकार किया है। फिलहाल इस यू टर्न ने लोगों के जेहन को हिला दिया है और वन्य जीव जगत में हलचल होने लगी है।
बाक्स
....लेकिन वन्यजीव विशेषज्ञों ने इसे नकारा
बाघ की मौत को पहली नजर की पड़ताल में आपसी संघर्ष माना जा रहा हो, लेकिन वन्य जीव विशेषज्ञ इससे कतई सहमत नहीं हैं। वन्यजीव विशेषज्ञों ने आपसी संघर्ष की बात को सिरे से ही खारिज कर दिया है। उनकी मानें तो पार्क में न के बराबर बाघ बचे हैं। संघर्ष तब होता है जब इनकी संख्या अधिक हो और जगह की कमी पड़ रही हो, वह पीएम रिपोर्ट के इंतजार में हैं। यह रणनीति भी हो सकती है।
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डाग स्क्वायड की भी ली गई मदद
मौके पर एसएसबी के डाग स्क्वायड की भी मदद ली गई है। डिप्टी डायरेक्टर दुधवा नेशनल पार्क गणेश भट्ट ने बताया कि इसमें कोई खास मदद नहीं मिल पाई है, लेकिन एक्सपर्टों के मुताबिक वह जगह आसपास ही है। जहां संभावित आपसी संघर्ष हुआ था।
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आपसी संघर्ष की बात पूरी तरह से बेबुनियाद लगती है। मैने बाघ के शव को नहीं देखा, लेकिन बताई गई परिस्थितियों से बाघ के शिकार की ही संभावनाएं प्रबल हैं। आपसी संघर्ष कैसे होगा? बाघ बचे ही कितने हैं? बाघों का संघर्ष तब होता है जब उनकी संख्या काफी होती है और जगह कम पड़ती हो। जंगल में कोई गिरोह सक्रिय हो गया है।
डा. वीपी सिंह
सदस्य राज्य वन्य जीव सलाहकार परिषद
महबूब आलम-अशोक निगम

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