संस्थागत प्रसव के मामले में शहरी महिलाओं को पछाड़ा

Lakhimpur Updated Tue, 29 May 2012 12:00 PM IST
लखीमपुर खीरी। शहरी क्षेत्रों की तुलना में गांवों की साक्षरता दर भले ही कम हो लेकिन इस सबके बावजूद संस्थागत प्रसव को लेकर ग्रामीण महिलाएं कहीं अधिक जागरूक है। स्वास्थ्य विभाग के आंकड़े तो यही बताते हैं।
मातृ एवं शिशु मृत्युदर में कमी लाने के उद्देश्य से शासन ने जननी सुरक्षा योजना शुरू की। इसके तहत अधिक से अधिक संस्थागत प्रसव कराने पर जोर दिया जाता है। इसके लिए विभिन्न प्रकार के जागरूकता कार्यक्रम चलाए जाते हैं। योजना को प्रोत्साहन देने को संस्थागत प्रसव कराने वाली महिला को ग्रामीण क्षेत्रों में 1400 तथा तथा शहरी क्षेत्रों में 1000 रुपये दिए जाते हैं। एएनएम और आशाएं गर्भवती महिला की देखभाल करती हैं, साथ ही उन्हें संस्थागत प्रसव को प्रेरित करती हैं। शहरी क्षेत्रों में यह जिम्मेदारी एएनएम निभाती हैं। स्वास्थ्य विभाग समय समय पर गोष्ठी आदि करके महिलाओं को संस्थागत प्रसव को प्रेरित करता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पिछले वित्तीय वर्ष 2010-11 में कुल 57,905 संस्थागत प्रसव हुए। इनमें शहरी क्षेत्रों के केवल 2031 प्रसव हैं, जबकि ग्रामीण क्षेत्रों के 55,874 प्रसव शामिल हैं। यह आंकड़े यह बताने को पर्याप्त हैं, कि ग्रामीण क्षेत्र की महिलाएं स्वास्थ्य और संस्थागत प्रसव को लेकर शहरी क्षेत्र की महिलाआें से कहीं अधिक जागरूक हैं।
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आशाओं की भूमिका है महत्वपूर्ण
संस्थागत प्रसव के मामले में ग्रामीण क्षेत्रों में कहीं न कहीं आशाओं की महत्वपूर्ण भूमिका है। आशाएं महिलाओं को संस्थागत प्रसव को प्रेरित करती हैं इसके लिए उन्हें प्रति केस 600 रुपये मिलते हैं। इसके अलावा देखभाल तथा यात्रा भत्ता जैसी सुविधाएं भी मिलती हैं।
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नर्सिंग वाले नहीं देते आंकड़े
ग्रामीण क्षेत्रों की महिलाएं संस्थागत प्रसव सरकारी अस्पतालों में करवाती हैं। उनके आंकड़े तो मिल जाते हैं जबकि शहरी क्षेत्र के अधिकतर लोग प्रसव तो संस्थागत ही करवाते हैं, लेकिन वे प्राइवेट नर्सिंग होम में ज्यादा जाते हैं। प्राइवेट नर्सिंगहोम के लोगों को इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को देनी चाहिए लेकिन वे लोग नहीं देते। लिहाजा, शहरी क्षेत्रों में प्रसव की सूचना उन्हें पूरी नहीं मिल पाती है। जागरूकता के कार्यक्रम शहरों और ग्रामीण क्षेत्रों में बराबर किए जाते हैं। यदि पूरे आंकड़े मिल जाएं तो इतना अंतर नहीं रहेगा। -एनएल यादव, सीएमओ खीरी

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