कहने भर को पार्क, हरियाली न सुकून

Lakhimpur Updated Tue, 22 May 2012 12:00 PM IST
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जुआरियों और नशेड़ियों का अड्डा बन चुके है यह
हरियाली की जगह धूल से रूबरू होते हैं लोग
अशोक निगम
लखीमपुर खीरी। खुली हवा और प्राकृतिक परिवेश में सुकून के कुछ पल बिताने के लिए शहर में महज चार पार्क हैं। वह भी देखरेख और रखरखाव के अभाव में अपना वजूद खोते जा रहे हैं। आज हालात यह हैं कि इन पार्कों की घास और पेड़-पौधे सूख चुके हैं। जहां हरियाली होना चाहिए वहां धूल उड़ती नजर आती है। जो सीटें बैठने के लिए बनाई गईं थी वे भी बेहद जर्जर हो चुकी हैं। अब यह पार्क सैर के लायक नहीं बचे हैं। चारों पार्क पूरी तरह नशेड़ियों का अड्डा बन चुके हैं।
शहर के चारों पार्कों की हालत खराब है। पार्कों के रखरखाव की जिम्मेदारी नगर पालिका की है लेकिन पालिका पार्कों को लेकर उदासीन है। किसी पार्क में ट्यूबवेल लगा दिया गया तो किसी में ट्रांसफार्मर रख दिया गया है। कोई पार्क ऐसा नहीं जो सैर करने लायक हो। न कहीं झूले बचे हैं और न ही न ही बच्चों के खेलने का कोई साधन।

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कंपनी गार्डेन
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शहर की शान को बट्टा
कचहरी रोड पर कंपनी गार्डेन अब बदसूरत हो चुका है। पार्क छोटा है लेकिन किसी जमाने में यह शहर की शान हुआ करता था। हरी-भरी घास और खूबसूरत पेड़-पौधे और रंग-बिरंगे फूल लोगों को अपनी ओर आकर्षित करते थे। पार्क के बीचोबीच एक खूबसूरत फव्वारा इस पार्क को चार चांद लगाता था। इस फव्वारे का उद्घाटन 11 मई 1961 में तत्कालीन मुख्यमंत्री ने किया था। अब यह फव्वारा भी टूट चुका है।
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संकटा प्रसाद वाजपेयी पार्क
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बाउंड्रीवाल की ईंटें तक गायब
ईदगाह मोहल्ले में संकटा प्रसाद वाजपेयी पार्क क्षेत्रफल के लिहाज से सबसे बड़ा पार्क है लेकिन सबसे ज्यादा दुर्दशा भी इसी पार्क की है। यहां बच्चों के खेलने के लिए लगाए गए झूले और रपटा वर्षों पहले टूट चुके हैं उनका लोहा भी चोरी हो चुका है। पार्क में पेड़ और फूलों के पौधों की बात तो जाने दीजिए, छायादार पेड़ भी नहीं हैं। बाउंड्रीवाल टूट चुकी है, उसकी ईंटें तक गायब हो चुकी हैं।

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सुभाष पार्क
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पार्क कम, सभास्थल ज्यादा
शहर के बीचोबीच पुरानी गल्ला मंडी में कुछ ही साल पहले सुभाष पार्क बनाया गया। पार्क में नेता जी सुभाष चंद्र बोस की मूर्ति स्थापित की गई। इस पार्क में बैठने के लिए घास के सिवा कोई इंतजाम नहीं है। न ही बच्चोें के खेलकूद का कोई साधन है। यह पार्क कम सभास्थल ज्यादा है। ऐसी दशा में यह पार्क उद्देश्यहीन होकर रह गया है।

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लाल बहाुदर शास्त्री पार्क
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यहां ट्रांसफार्मर और ट्यूबवेल भी
गोला रोड रेलवे क्रासिंग के पास बना लाल बहादुर शास्त्री पार्क आकार में सबसे छोटा है। उसमें भी बिजली विभाग ने ट्रांसफार्मर लगा दिया है। इसी में एक ट्यूबवेल लगा है। यह केवल नाम का पार्क है। पार्क जैसी कोई चीज यहां नहीं है। यहां तक कि छाया का इंतजाम तक नहीं।

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अतिक्रमण ने भी पांव पसारे
खाली जमीनों के बाद अब अतिक्रमणकारियों की नजर पार्कों पर है। कंपनी गार्डेन में गेट के पास एक कमरा बनाकर किराए पर उठा दिया गया है।

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सुकून गायब, नशेड़ियों का जमावड़ा
रखरखाव के अभाव में पार्क अपना स्वरूप खो चुके हैं। अब यह केवल नाम के पार्क रह गए है। यहां कोई सैर करने तो जाता नहीं, दिन भर नशेड़ियों का जमावड़ा रहता है। मादक पदार्थ बेचने वाले भी यहां जमा रहते है। कंपनी गार्डेन और संकटा प्रसाद वाजपेयी पार्क तो पूरी तरह नशेड़ियों और जुआरियों का अड्डा बन गया है।

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‘बजट आए तो कराए जीर्णोद्धार’
शहर में पार्कों की दशा ठीक नहीं। हालांकि कंपनी गार्डेन में पिछले दिनों कुछ काम हुआ है। टूटी बाउंड्रीवाल की मरम्मत कराई गई और सड़कें बनाई गईं, अभी बहुत काम बाकी है। जल्द बजट की व्यवस्था कर इनका जीर्णोद्धार कराया जाएगा।
-वीके झा, अधिशाषी अधिकारी नगर पालिका
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