पशुओं में दूध की मात्रा घटा रहा है थनैला रोग

Lakhimpur Updated Sun, 20 May 2012 12:00 PM IST
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सफाई में कमी मुख्य कारण, पशुओं के बांधने के स्थान पर न हो गंदगी
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बांकेगंज। दुधारू पशुओं में थनैला रोग तेजी से बढ़ रहा है। इस रोग से पीड़ित पशु दूध देना कम कर देता है। स्तनधारी पशुओं में यह रोग मुख्यत: साफ-सफाई में कमी की वजह से होता है। गंदगी के विषाणु दुधारू पशुओं में थनैला रोग पैदा करते हैं।
तराई क्षेत्र के पशुपालकों को इस ओर विशेष ध्यान दिए जाने की जरूरत है। उन्हें देखना होगा कि कहीं पशु दूध कम तो नहीं हो रहा है। जानकार लोगों की माने तो जिले में लगभग 15 प्रतिशत दुधारू पशु थनैला रोग के शिकार हैं। यह रोग दुधारू पशुओं में कई किस्म के विषाणुओं से होता है। सामान्यत: दूध देने वाले पशु के बांधने के स्थान पर गंदगी रहने से यह रोग होता है। गंदगी में बैठने के कारण थनों के माध्यम से विषाणु पशु के अंदर प्रवेश कर जाते हैं।
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साफ-सुधरा हो पशु बांधने का स्थान
दुधारू पशुओं में इस रोग का मुख्य कारण पशु बांधने के स्थान से है। इसलिए ऐसे स्थान साफ-सुथरे होने चाहिए। साथ ही दूध निकालने वाले के हाथ भी गंदे न हाें। संक्रमण गंदे हाथों से दुहान करने से भी होता है।
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थनैला रोग के लक्षण
इस रोग से प्रभावित दुधारू पशु के दूध में खून आने लगता है। इसमें लापरवाही बरतने पर पशु के थनों में सूजन आ जाती है। साथ ही उसके दूध उत्पादन में कमी हो जाती है। दूध पतला एवं फटा हुआ निकलने लगता है। थनों में गांठ पड़ जाती हैं। दूध निकलते समय पशु दर्द महसूस करता है। पीड़ित पशु को बुखार भी हो सकता है।
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ऐसे करें रोकथाम
पशुपालकों को दूध देने वाले पशुओं से संबंधित सावधानियां बरतना आवश्यक है। इस रोग की रोकथाम के लिए पशुओं के बांधने की जगह साफ-सुथरी रखना चाहिए। दूध निकालने से पहले हाथों को साबुन से धोना चाहिए। दूध निकालने के बाद पशु को आधे घंटे तक बैठने नहीं देना चाहिए। दुधारू पशुओं का स्वच्छ, मुलायम एवं सूखा बिछावन होना चाहिए।
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दुधारू पशु मनुष्य को स्वास्थ्यवर्धक पेय के रूप में दूध देता है। पशु पालक को परिवार के सदस्य की तरह उसकी देखभाल करनी चाहिए। उसके बैठने और घूमने का स्थान साफ सुथरा हो। इससे उन्हें रोगों से बचाया जा सकता है। थनेला रोग दुधारू पशुओं की बड़ी समस्या है। ऐसे लक्षण होने पर तुरंत चिकित्सकीय परामर्श लेना चाहिए।
-डॉ. रविकांत वर्मा, पशु चिकित्सा अधिकारी, बांकेगंज।
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