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अब भुगतान को भटक रहे किसान

Lakhimpur Updated Tue, 15 May 2012 12:00 PM IST
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बंाकेगंज। सरकारी खरीद केंद्रों पर गेहूं की बिक्री कर चुके किसानों का हाल-बेहाल है। क्षेत्र के किसान बकाया भुगतान को लेकर परेशान हैं। बिक्री किए हुए गेहूं के बदले मिले एकाउन्ट पेई चेकों को लेकर वह अपना काम-धंधा छोड़ कर भुगतान पाने के लिए बैंकों के चक्कर काट रहे हैं। जहां संबधित खाते में पैसा न होने के कारण निराशा हाथ लग रही है।
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किसानों की समस्याएं कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। भुगतान की समस्या से जूझते किसानों की खेती-बाड़ी चौपट हो रही है। उन्हें आर्थिक जरूरतें पूरा करने के लिए महाजनों और साहूकारों के सामने हाथ फैलाना पड़ रहा है।
मई का आधा पखवाड़ा बीतने को है, पर किसानों की झोली खाली है। इस क्षेत्र के 95 प्रतिशत लोगों की आय का जरिया खेती है। गेहूं और गन्ने का भुगतान न होना किसानों के लिए परेशानी का सबब बन गया है। धान की पौध के साथ ही कुछ दिनों बाद उसकी रोपाई के खर्च का इंतजाम सोचकर इनके होश उड़ रहे हैं।
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क्या कहते हैं किसान
किसान सीताराम का कहना है, कि यहां के किसानों के लिए धान, गन्ना, गेहूं का उत्पादन समृद्धि का साधन है। विलंब से भुगतान के कारण परेशानी हो रही है।
किसान आनंद सिंह और प्रेमचंद्र का कहना है, कि खेती किसानों की रीढ़ है। पूरे वर्ष का खर्च चलाने के लिए वे अपने खेतों में हाड़-तोड़ मेहनत करते हैं। बावजूद इसके खून-पसीने की कमाई को पाने के लिए लोगों के सामने हाथ फैलाकर गिड़गिड़ाना पड़ता हैं। फसल का भुगतान समय पर न मिलने से उनकी आर्थिक स्थिति डांवाडोल है। खर्च चलाने के लिए वह कर्ज के बोझ से उबर नहीं पा रहे हैं।
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