इस मासूम के सवालों का बोलो है कोई जवाब?

Lakhimpur Updated Tue, 15 May 2012 12:00 PM IST
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बिजुआ। अब चार बरस की हो गई बिट्टू, अपनी मम्मी से तोतली जु़बान में पूछती है, कि मम्मी हमें दन्ने ते थेतों में से क्यों उथा लाईं थी, कोन फेंत गया था, (मम्मी हमें गन्ने के खेतों से उठाकर आप लाईं थी, हमें कौन फेंक गया था)। इस मासूम के दर्द भरे सवाल पर हर किसी को कैसे न आंसू आ जाएं। दरअसल चार साल पहले गन्ने के खेतों में मिली एक नन्ही सी जान को सेनपुर गांव की बिन औलाद दो सगी बहनों ने अपने ममता की छांव दी, वह बच्ची अब बोलना सीख गई है, और उसके कुछ ऐसे ही सवाल होते हैं।
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लगभग चार साल पहले रूद्रपुर एवं जंगलीनाथ गांव के बीच गन्ने के खेतों में एक नवजात शिशु के रोने की आवाजें सुनकर मजमा इकट्ठा हो गया था, लोगों ने देखा कि एक छोटी सी नन्हीं बच्ची के शरीर पर चीटियां चिपकी हुई हैं, जिनकी वजह से वह तड़प रही है। लोग खड़े होकर उस मां को कोस रहे थे, लेकिन किसी ने बच्ची को उठाने की जहमत नहीं की। तभी पास के गांव का एक शख्स उस नन्हीं जान को अपने घर ले गया। एक दिन के लिए उस बच्ची को घर मिला गया। तभी यह खबर कई गांवों तक पहुंच गई। सेनपुर के रहने वाले कलेक्टर सिंह की पत्नी श्यामकली सिंह व प्रेमवती के कोई औलाद नहीं थी, बेऔलाद इस परिवार को जैसे ही इस बच्ची के बारे में पता चला, वह इसे अपने घर ले आए, पूरे शरीर पर चीटियों के खाए जाने के जख्म लिए इस नन्हीं जान को इलाज की जरूरत थी। इस परिवार ने अपनी बच्ची की तरह इसका इलाज कराया। और नाम दिया ‘उन्नति’, प्यार से इसे बिट्टू बुलाने लगे। तभी कुछ दिनों बाद कलेक्टर सिंह की मौत हो गई, अब इस बच्ची की पूरी जिम्मेदारी दोनो मांओ पर आ गई, घर के माली हालात ठीक न होने के कारण दूसरें के खेतों मे काम करके दोनों बहनों ने बिट्टू की परवरिश में कोई कमी नहीं आने दी। अब बड़ी मां स्कूल में रसोइया हो गई हैं, तो इस कुनबे को कुछ दिक्कतें दूर र्हुइं। अब बिट्टू की एक मां काम करती तो दूसरी मां बिट्टू की देखभाल।
इंसेट....
मासूम बिट्टू के सवालों पर हर दिल होता है गमज़दा
कहते हैं मां के आंचल से बड़ा कोई रहबर नहीं होता, लेकिन यहां एक मां अपनी कोख से जन्मी बच्ची को चार साल पहले मरने के लिए गन्ने के खेत में फेंक गई थी, कुदरत का इंसाफ देखिए उस बेटी को भगवान ने दो-दो मां दे दीं। उन्नति श्याम कली को मम्मी व प्रेमवती को अम्मा कहती है। अब इतने अरसे में वह बोलना भी सीख गई, गांव के स्कूल में आंगनबाड़ी केंद्र पर दूसरे बच्चों के साथ पढ़ने वाली इस बिट्टू के सवाल खूब होते हैं। बिट्टू अपनी जु़बान में पूछती है, कि मम्मी हमें गन्ने के खेतों से ही लाई थी, हमें वहां कौन डाल गया था, इस सवाल पर जैसे सारी कायनात खामोश हो जाती है, लेकिन उसकी यशोदा मां नहीं, श्यामकली बिट्टू को उसी के लहजे में जवाब देती है, कि बिटिया हमरे बच्चे बचते नहीं थे, अपनी छोटी बहन प्रेमवती की ओर इशारा करके श्यामवती कहती हैं, भगवान की मर्जी के चलते तुम्हारी अम्मा ने तुम्हें खेत केे किनारे लिटा दिया था, और हम उठा लाए थे, बिटिया, अब तुम हमारी ही औलाद हो।
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