शूटिंग रेंज पर चार पीढ़ियों ने की निशानेबाजी

Lakhimpur Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
छह बार राजा जियाउल्ला दो बार बेटों के कब्जे में रही चैंपियनशिप
विदेशों तक में शेर मारने के लिए भेजे जाते थे राजा जियाउल्ला
जिले की शूटिंग में सर्वाधिक दबदबा वाला रह चुका परिवार
लखीमपुर खीरी। जिले में शूटिंग प्रतियोगिता हो और राजा जियाउल्ला खां का नाम न आए ऐसा हो ही नहीं सकता। वजह भी खास है। वर्ष 1965 से लेकर अब तक हुई जिला स्तरीय शूटिंग प्रतियोगिता की अधिकतर चैंपियनशिप श्री खां और उनके परिवार के ही कब्जे में रही है। शारीरिक रूप से काफी कमजोर हो चुके राजा जियाउल्ला भले ही आज यहां शूटिंग रेंज पर अपनी प्रतिभा का प्रदर्शन करने के बजाय सिर्फ दर्शक की भूमिका में थे, लेकिन उनके परपोते और बहू तक शूटिंग रेंज में अपनी ‘निशानेबाजी’ का प्रदर्शन करे रहे थे।
जिला रायफल क्लब के तत्वावधान में जिले में रायफल शूटिंग प्रतियोगिता की शुरुआत वर्ष 1965 में की गई। तब राजा जियाउल्ला खां जिला चैंपियन बने थे। इसके बाद वर्ष 1967, 1972, 1975, 1980 तथा 1983 में हुई शूटिंग प्रतियोगिता में भी राजा जियाउल्ला खां चैंपियन रहे। लगातार छह बार व्यक्तिगत चैंपियन बनने का खिताब अगर किसी के पास है तो वह इकलौता नाम राजा जियाउल्ला खां का ही है। खास बात यह है कि राजा जियाउल्ला खां के दोनों बेटे तारिक जिया खां और आरिफ जिया भी गजब के निशानेबाज हैं। नेशनल शूटर का खिताब हासिल कर चुके तारिक जिया खां जहां वर्ष 1975 में जिला चैंपियन रह चुके हैं वहीं राज्य स्तरीय शूटरों में शुमार आरिफ जिया खां 1982 में जिला चैंपियन रह चुके हैं। इस प्रकार जिले के इतिहास में अब तक हुई कुल 21 जिला स्तरीय प्रतियोगिताओं में से सर्वाधिक आठ बार जिला चैंपियनशिप सिर्फ राजा जियाउल्ला खां के परिवार के पास ही गई है।
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शेरनी से लड़ चुके हैं राजा जियाउल्ला
शिकारी से नेशनल शूटर तक का सफर तय कर चुके श्री खां ने अपने जीवन के 98 बसंत में करीब 50 से अधिक बाघों का शिकार तो किया ही साथ ही अपने साथी को बचाने के लिए एक बार शेरनी से उनका मुचैटा भी हुआ, लेकिन जीत इसमे जियाउल्ला खां की ही हुई। अपनी निशानेबाजी के लिए श्री खां सिर्फ अपने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों तक में जाने जाते थे। वर्ष 1964 में भारत सरकार ने नरभक्षी बाघ मारने के लिए साउथ अफ्रीका भेजा था। वहां उन्होंने उस नरभक्षी बाघ को ढेर किया था।
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चौथी पीढ़ी भी कम निशानेबाज नहीं
जिले के इतिहास में शूटिंग रेंज पर राजा जियाउल्ला का ही परिवार एक मात्र ऐसा परिवार है जिनकी चार पीढ़ियों के लोग यहां शूटिंग रेंज पर मौजूद थे। शारीरिक दुर्बलता के कारण राजा जियाउल्ला खां तो सिर्फ उद्घाटन में ही पिछले चार-पांच सालों से फायर कर हवा में उड़े गुब्बारे फोड़ने की रस्म अदा करते हैं, लेकिन हर जिला स्तरीय प्रतियोगिता में उनके पुत्र, पुत्री और बहू अपनी निशानेबाजी के बल पर उनके नाम का झंडा बुलंद करते हैं। इस बार भी बेटे, बहू, लड़की, नाती-पोते तथा परनाती ने यहां हुई विभिन्न प्रतियोगिताओं में अपनी निशानेबाजी का प्रदर्शन किया।
परनाती मिर्जा शहजर जावेद ने 18 वर्ष तक के बच्चों की 22 बोर रायफल शूटिंग प्रतियोगिता में द्वितीय तथा दूसरे परनाती हसन जावेद ने इसी वर्ग की 12 बोर बैलून शूटिंग प्रतियोगिता में तृतीय स्थान प्राप्त किया। महिलाओं की ट्रॉली बैलून शूटिंग प्रतियोगिता में नातिन बहू शहाना जावेद जहां अव्वल रहीं वहीं बहू शकीला आरिफ द्वितीय स्थान पर रहीं। बच्चों की एयरगन प्रतियोगिता में भी परनाती मिर्जा ताबिश अव्वल रहे। बेटी गजाला परवीन ने भी अपनी निशानेबाजी का यहां प्रदर्शन किया।

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