बोतल से निकला जीईओ बैग का जिन्न

Lakhimpur Updated Mon, 14 May 2012 12:00 PM IST
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पहले ठीक बता किया भुगतान, अब फंसे तो बता दिया घटिया
अमर उजाला ने जुलाई 2010 में किया था घोटाले का भंडाफोड़
तब जीईओ बैग को मानक के अनुरूप बताते नहीं थक रहे थे अधिकारी
लखीमपुर खीरी। जिले के बहुचर्चित बाढ़ घोटाले की जांच में लीपापोती शुरू कर दी गई है। घोेटाले की दलदल में फंसे अभियंताओं को बाहर निकालने के प्रयास हो रहे हैं। सूत्रों की मानें तो अफसरों को क्लीनचिट देने के लिए ठेकेदारों को बलि का बकरा बनाने की तैयारी महकमे ने पूरी कर ली है। इससे एक बार फिर बाढ़-कटान बचाव कार्य के लिए प्रयोग किए गए जीईओ बैग आपूर्ति घोटाले का वह मामला सुर्खियों में आ गया है जिसका खुलासा अमर उजाला ने अपने 14 जुलाई 2010 के अंक में किया था।
चार अप्रैल को मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को उनके दौरे के समय जिले में बाढ़-कटान से बचाव कार्य के नाम पर भारी घोटाले की शिकायत मिली थी। मुख्यमंत्री के साथ आए सिंचाई मंत्री शिवपाल यादव ने इस मामले में बाढ़ खंड के अधिशाषी अभियंता रामनयन सहित छ: अभियंताओं को निलंबित कर दिया था। इस मामले की विस्तृत जांच के आदेश मुख्य अभियंता को दिए थे। इस घोटाले में खास कर बिना टेंडर-निविदा आमंत्रित किए करोड़ों के कार्य कराने, परियोजना मद की करीब 40 लाख रुपये से अधिक की धनराशि का भुगतान चहेते ठेकेदारों द्वारा किए गए फ्लड फाइटिंग कार्य में कर देने, वर्ष 2010 में विभाग को मानक के अनुरूप जीईओ बैग आपूर्ति न कर लाखों रुपये का घोटाला करने आदि का जिक्र किया गया था।
विभागीय सूत्रों की मानें तो इस मामले में बाढ़ खंड के जेई से लेकर ऊपर तक के कई और अभियंता फंस रहे थे, इसलिए अब इस मामले में लीपापोती शुरू क र दी गई है। यही नहीं बुरी तरह फंसे अभियंताओं को क्लीनचिट देने के अंदर खाने तैयारी शुरू कर दी गई है। यही वजह है कि जांच की सुई वित्तीय अनियमितता सहित गलत ढंग से कराए गए कार्यों आदि पर टिकने के बजाय सिर्फ जीईओ बैग घोटाला मामले पर आकर टिक गई है। अब इस जांच में घोटाले का पूरा ठीकरा ठेकेदारों के सिर फोड़ते हुए उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की तैयारी शुरू कर दी गई है। मुख्य अभियंता (शारदा) स्वदेश प्रकाश जैन ने इस बावत अधीनस्थों को पत्र लिख आवश्यक दिशा निर्देश भी दिए हैं।
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अमर उजाला के खुलासे पर भी न चेते अफसर
अमर उजाला ने अपने 14 जुलाई 2010 के अंक में खुलासा किया था कि बाढ़-बचाव कार्य में जिस जीईओ बैग का उपयोग किया जा रहा है वह मानक के अनुरूप नहीं। इसके बाद ही तत्कालीन जिलाधिकारी समीर वर्मा ने अधिशाषी अभियंता को बैग की गुणवत्ता परखने के बाद ही उसकी आपूर्ति लेने के निर्देश दिए थे। बाद में केंद्र से आई टीम ने भी जीईओ बैग की गुणवत्ता परखने के बाद ही ठेकेदोरों का पूर्ण भुगतान के लिए कहा था। अमर उजाला के खुलासे के बाद भी अधिशाषी अभियंता से लेकर मुख्य अभियंता तक वर्ष 2010 में आपूर्ति किए गए जीईओ बैग को असली बताते रहे, इसी आधार पर ठेकेदारों को पूर्ण भुगतान भी कर दिया गया, लेकिन अब जब अभियंताओं की गर्दन फंसने लगी तो यही विभागीय अधिकारी जीईओ बैग के मानक के अनुरूप न होने की बात कह इसके लिए पूरी तरह ठेकेदारों को दोषी ठहराने लगे हैं।
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‘बैग गड़बड़ तो भुगतान कैसे’
कुछ स्थानों पर जीईओ बैग मानक के अनुरूप न होने की शिकायत मिली थी। ठेकेदारों के खिलाफ एफआईआर के लिए लिख दिया गया है। पता चला है कि बैग की जांच के बाद ही ठेकेदारों को भुगतान किया गया है। जब यह बैग मानक के अनुरूप थे ही नहीं, तो जेई, एई ने ठेकेदारों को पूर्ण भुगतान किस आधार पर कर दिया? इसका कारण पता लगाएंगे।
स्वदेश कुमार जैन, मुख्य अभियंता (शारदा)

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