मेरी मां ही मेरी भाग्य विधाता

Lakhimpur Updated Sun, 13 May 2012 12:00 PM IST
लाइफ ओके टीवी चैनल पर प्रसारित हो रहे सीरियल तुम देना साथ मेरा की, लीड कैरेक्टर अभिलाषा का रोल निभा रही सोनारिका सिंह भदौरिया अपनी मां पूनम भदौरिया और छोटे भाई हषवर्धन के साथ इन दिनों जिला लखीमपुर खीरी की पलिया तहसील के गांव त्रिकोलिया में अपनी ननिहाल नाना खड़क बहादुर शाह के घर आई हुईं हैं। महज एक ही सीरियल में काम करके ख्याति हासिल कर चुकी सोनारिका को कभी इस लाइफ से नफरत हुआ करती थी, लेकिन उनकी मां की चुटकियां यहीं हुआ करती थीं कि एक दिन वह एक बड़ी स्टार बनेगीं। आखिरकार मां की वो चुटकियां आज उनका कैरियर बन गईं और उन्होंने महज एक ही सीरियल में कामयाबी के झंडे गाड़ दिए। तीन दिसंबर, 1992 में जन्मी सोनारिका अभी मुंबई यूनीवर्सिटी से ग्रेजुएशन में पहले वर्ष की पढ़ाई कर रहीं हैं। तीन साल की उम्र में उन्होंने अपना प्ले ग्रुप पलिया के कैंब्रिज स्कूल से किया है। महबूब आलम ने उनसे बात की। पेश हैं बातचीत के खास अंश।
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क्या आपने कभी कोई ऐक्टिंग कोर्स किया था?
-नहीं मैने ऐक्टिंग का कभी भी कोई कोर्स नहीं किया है। मुझे इससे कभी चिढ़ भी हुआ करती थी, लेकिन मां हमेशा ही मुझसे चुटकियां लेकर मुझे कभी बड़े स्टार बनने की बात कहती थीं। वह मुझे घर और रिश्तेदारियों में होने वाली पार्टियाें व समारोहों में डांस के लिए भी प्रेरित करती थीं। क्या पता था कि मां वो चुटकियां आज मेरा कैरियर बन जाएगी।
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चिढ़ होने के बाद ये क्याें?
-एक दिन एक पार्टी में मेरे जानने वालों ने कहा कि तुम अभी तक थीं कहां, तुम्हें तो ऐक्टिंग में कैरियर बनाना चाहिए था। बस उस दिन मेरे भीतर परिवर्तन हुआ और मैं कई ऑडीशन में गई। कम उम्र इनमें बाधा बन गई। इसके बाद तुम देना साथ मेरा सीरियल में मेरा सेलेक्शन हुआ। सेलेक्शन हो जाने के बाद एक कंपनी में प्रोजेक्ट मैनेजर मेरे पापा राकेश सिंह भदौरिया ने मुझे काम करने से मना कर दिया। पापा की सिर चढ़ी बेटी थी, सो उन्होंने पढ़ाई न छोड़ने और अभिनय में मां को साथ रखने की शर्त पर मुझे इजाजत दे दी।
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आगे की प्लानिंग क्या है?
-अब मुझे छोटे पर्दे पर काम नहीं करना है। इसीलिए कई ऑफर के बाद भी मैने काम करने से इंकार कर दिया। सीरियल में काम करना मजदूरी जैसा ही है, साल में सिर्फ दो-तीन ही छुट्टियां मिलती हैं और एग्रीमेंट के बाद भी 15 से 16 घंटे काम लिया जाता है। अपनी निजी जिंदगी नहीं रह जाती है। तीन चार फिल्मों में ऑफर मिले हैं 15 मई को यहां से एक फिल्म के लिए जा रहीं हूं।
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किस तरह के किरदार को पसंद करती हैं?
-मैं सिर्फ कैटरीना कैफ बन कर नहीं रहना चाहती हूं कि पूरा कैरियर ठुमकों में ही बीत जाए। मैं चाहती हूं कि मैं हर तरह के रोल करूं और मुझे मेरी ऐक्टिंग से पहचान मिले और यह पहचान हमेशा कायम रहे।
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फिल्मों में बढ़ती
अश्लीलता पर क्या क्या राय है?
-कहा न कि मैं अपनी ऐक्टिंग के बलबूते अपना नाम कायम रखना चाहती हूं, सुंदरता और काया ज्यादा दिनों तक टिकी नहीं रहती। फिलहाल मेेरे पापा इसे पंसद भी नहीं करते। तुम देना साथ मेरा के एक एपीसोड में जब पर्दे के पीछे से मेरा हाथ किरदार मनन के हाथ से मिला था तो पापा सीरियल छोड़ कर चले गए थे। मैं पापा को हमेशा खुश देखना चाहती हूं।
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महानगर से गांव में ऊबन तो नहीं होती?
- मुझे गांव बहुत पसंद हैं खासकर नाना का घर त्रिकोलिया। यहां आकर हम बंबे यानी हैंडपंप पर ही नहाते हैं और अमिया के मजे लेने की बात ही कुछ और है। मैं तो मम्मी से यहीं सेटल होने के लिए भी कह चुकी हूं लेकिन शायद यह संभव नहीं।
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आपका पसंदीदा भोजन क्या है?
जंक फूड ज्यादा पसंद करती हूं जैसा कि लोग कहते हैं कि जंक फूड से शरीर मोटा होता है और बीमारियां भी आती हैं, लेकिन मेरे साथ ऐसा नहीं हैं। फिलहाल मां मेरी स्वास्थ्य का पूरा ख्याल रखती हैं।

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