दम तोड़ रही है जिला योजना

Lakhimpur Updated Fri, 11 May 2012 12:00 PM IST
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अपने जिले के लिए अपने लोग भी नहीं कर पा रहे हैं कुछ
गत वर्ष की जिला योजना के प्रस्ताव और अनुमोदन का नहीं रहा औचित्य
विनोद भारद्वाज
लखीमपुर खीरी। करीब तीन दशक पहले जिले में विकास की गंगा बहाने में भागीरथ का कमंडल मानी जाने वाली जिला योजना साल-दर-साल औपचारिकता की भेंट चढ़ती जा रही है। अपने जिले के लिए अपने ही लोग कुछ नहीं कर पा रहे हैं। इस योजना को पिछले वर्ष भी कोई खास महत्व नहीं दिया गया। यही वजह है कि इसके जरिए विकास के कार्यों को आधारीय संबल नहीं मिल सका। जिन्हें जो धनराशि मंजूर हुई, उससे घटा-बढ़ाकर राशि दी गई। करीब 22 विभागों को तो कुछ भी नहीं मिला। अब इस वर्ष के लिए फिर तैयारियां हो रही हैं लेकिन उत्साह नहीं है।
जिला योजना बोर्ड में जिले के जनप्रतिनिधि और चुनिंदा लोगों को शामिल किया जाता रहा है। बसपा ने इसके स्वरूप में कई परिवर्तन किए। इसकी वजह से जिला योजना की सदनीय व्यवस्था में विलंब भी हुआ। सपा शासन में भी इस योजना के लिए गठित समिति में परिवर्तन की संभावनाएं व्यक्त की जा रही हैं। जिले के 54 विभागों को गत वर्ष विभिन्न मदों में विकास कार्य कराने और योजनाओं के क्रियान्वयन को एक अरब, 82 करोड़ आठ लाख रुपये का अनुमोदित परिव्यय स्वीकृत किया गया था। लेकिन, पूरे वर्ष इंतजार के बाद जिले के 32 विभागों को ही धन मिला। इनमें से कई को स्वीकृत धन तक नहीं मिल सका। योजना के स्वीकृत बजट में एक अरब, 69 करोड़, 44 लाख, 87 हजार रुपये ही अवमुक्त हो सका। 54 में से 22 विभाग ऐसे हैं, जिन्हें कुछ भी नहीं मिला।
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कई विभागों को अनुमोदन से अधिक मिली राशि
सबसे अधिक 56 करोड़, 86 लाख, 29 हजार रुपये आवास के लिए अवमुक्त किए गए। खास बात यह है कि जिला योजना की बैठक में इसके लिए 45 करोड़, 80 लाख, 96 हजार रुपये ही अनुमोदित किए गए थे। शासन की कृपा बरसी तो अनुमोदन से अधिक राशि अवमुक्त कर दी गई। जबकि ग्राम्य विकास विभाग के लिए ग्रामीण पेयजल और स्वच्छता को अनुमोदित राशि 1888.38 लाख रुपये में 510.82 लाख रुपये दी गई। जो अनुमोदन से काफी कम है। अधिकतर विभागों को अनुमोदन से कम धनराशि मिली थी लेकिन कुछ कृपा पात्र विभागों को अनुमोदन से भी अधिक राशि दे दी गई।
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राशि तो अनुमोदित लेकिन अवमुक्त नहीं
बंजर भूमि विकास कार्यक्रम के लिए एक करोड़ का अनुमोदन हुआ था लेकिन राशि अवमुक्त नहीं हुई। अतिरिक्त ऊर्जा स्रोत को 14 लाख 20 हजार रुपये अनुमोदित किए गए। पर्यावरण को 10 लाख, पर्यटन को 30 लाख, बेसिक शिक्षा को ढाई करोड़, प्राविधिक कला को 10 लाख, खेलकूद को 1.27 लाख, चिकित्सा एवं जन स्वास्थ्य को तीन करोड़, चार लाख रुपये, अनुसूचित जाति कल्याण के लिए 29 लाख 73 हजार रुपये, पिछड़ी जाति कल्याण के लिए 90 लाख रुपये, अन्य सामान्य वर्ग के लिए 44 लाख और शिल्पकार प्रशिक्षण को 24 लाख, 20 हजार रुपये अनुमोदित हुए लेकिन विभागों को जिला योजना से कुछ भी नहीं मिला।
जिला योजना में गत वर्ष की खराब स्थिति को देखते हुए इस योजना को मजबूती दिए जाने का समय है। निकट भविष्य में जिला योजना सदन में फिर प्रस्ताव और अनुमोदन की प्रक्रि या शुरू की जा रही है, लेकिन सत्ता की अपरोक्ष दखलंदाजी से शासन ने इस योजना को अपने चंगुल में ऐसा फंसाया है कि इसके अस्तित्व पर संकट के बादल मंडराते नजर आ रहे हैं।
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पिछली जिला योजना पर एक नजर
अनुमोदित परिव्यय 18208.00 लाख रुपये
अवमुक्त हुई धनराशि 16944.87 लाख रुपये
नहीं मिल सकी राशि 1363.13 लाख रुपये
खर्च की गई धनराशि 14751.64 लाख रुपये
खर्च नहीं हु़ई राशि
2193.23 लाख रुपये
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वर्जन---
सेंट्रल और प्रांतीय योजनाओं में धन के लिए सामंजस्य नहीं हो पाने से योजना में प्रस्तावित विकास कार्यों को धन मिलने में कठिनाइयां सामने आ जाती हैं। तीन दशक पहले इस योजना में सदनीय विकास व्यवस्था अपने आप में बड़ा महत्व रखती थी। उस समय जनप्रतिनिधियों की निधियां नहीं होती थीं।
-संजीव कुमार बघेल, जिला संख्या अधिकारी, पटल प्रभारी जिला योजना

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