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नौ साल से ‘संघर्ष’ को जीवन साथी बनाए हुए हैं निधि

Lakhimpur Updated Wed, 09 May 2012 12:00 PM IST
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लखीमपुर खीरी। कवयित्री मधुमिता शुक्ला के हत्यारों को सजा दिलाने के लिए उनकी बड़ी बहन निधि के संघर्ष को बुधवार को पूरे नौ साल बीत जाएंगे। इन नौ साल में यूं तो मधुमिता के परिवार ने कई उतार-चढ़ाव देखे लेकिन उनकी ‘निधि’ ने अपने हौसले और त्याग की जो मिसाल पेश की उसे भुला पाना मुश्किल होगा।
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शहर के मुहल्ला मिश्राना निवासी कवयित्रीमधुमिता शुक्ला की लखनऊ के निशातगंज में नौ मई 2003 को गोली मारकर हत्या कर दी गई थी। आरोप है कि इस मामले में बसपा सरकार के तत्कालीन मंत्री अमरमणि त्रिपाठी का हाथ था, इसलिए पहले पुलिस ने इस मामले को पूरी तरह दबाने का प्रयास किया। इसके लिए पुलिस ने सत्य प्रकाश नाम के एक व्यक्ति के खिलाफ ही नामजद रिपोर्ट दर्ज की।
सूत्रों की मानें तो मधुमिता के परिवार वालों पर मुंह न खोलने के लिए तरह-तरह के दबाव भी पड़े, लेकिन उनकी बड़ी बहन निधि ने साहस का परिचय देते हुए मीडिया के सामने मुंह खोला। निधि की पैरवी के बाद इस मामले में नया मोड़ आया। मामले की जांच लोकल पुलिस से हटा कर सीबीसीआईडी को सौंपी गई। सीबीसीआईडी को भी निधि ने इस हत्याकांड में अमरमणि त्रिपाठी व उसके परिवार के लोगों का हाथ होने की बात कही, लेकिन अमरमणि की ‘पहुंच’ के आगे सीबीसीआईडी भी कार्रवाई करने का साहस नहीं जुटा सकी। निधि की पैरवी के कारण ही मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई। निधि व उनके परिवार को धमकियां भी मिलीं और लालच भी दिया गया, लेकिन अपने बुलंद हौसले व बहन के कातिलों को जेल के सीखचों के भीतर देखने को आतुर निधि निर्भीक हो पैरवी में जुटी रहीं। उनकी मेहनत रंग लाई और आज प्रदेश के कभी कद्दावर राजनेताओं व बाहुबलियों में शुमार अमरमणि त्रिपाठी, उनकी पत्नी मधुमणि त्रिपाठी गोरखपुर जेल में तथा उनके भांजे रोहित चतुर्वेदी व आरोपी शूटर संतोष राय उत्तरांचल की देहरादून जेल में हैं।
...इसलिए नहीं की निधि ने शादी
निधि शुक्ला उम्र के तीस पड़ाव पार कर चुकी हैं, फिर भी उसके दिल में शादी का कोई ख्याल नहीं आता। बोलीं- मधुमिता की मौत के बाद जीवन का सिर्फ एक ही मकसद रह गया है और वह है ‘मधु’ के हत्यारों को फांसी की सजा। ब्याह हो जाने पर स्वतंत्र रहकर पैरवी करना मुश्किल होगा। इस लिए उसने शादी के ख्याल को एक तरह से मन से निकाल ही दिया है। वह भी इसलिए क्योंकि देश की और किसी लड़की का हाल मधु जैसा न हो सके।

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09 को हत्या और फैसला भी नौ साल बाद
कवियित्री मधुमिता शुक्ला की हत्या लखनऊ में नौ मई 2003 को हुई थी। बुधवार को इस हत्या को पूरे नौ साल हो जाएंगे। हाल ही में 11 अप्रैल 2012 को नैनीताल हाईकोर्ट के चीफ जस्टिस वारेन घोष तथा जस्टिस यूसी ध्यानी ने फाइनल सुनवाई के बाद फैसला सुरक्षित रख लिया है। आम तौर पर एक माह तक सुरक्षित फैसले पर आर्डर सुना दिया जाता है। इसलिए उम्मीद जताई जा रही है कि चंद दिनों में इस पर फैसला सुनाया जा सकता है।
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