प्रधान तो एक चुनते हैं, लेकिन विधायक दो

Lakhimpur Updated Sun, 06 May 2012 12:00 PM IST
ग्राम पंचायत कुंअरपुर कलां ः एक प्रधान, दो विधायक, तीन लेखपाल पर समस्याएं अपार
शारदा किनारे बसा गांव झेल रहा बाढ़ व कटान का कहर
बिजुआ। कुंअरपुर कलां, इस पंचायत की नुमाइंदगी करने को प्रधान एक चुना जाता है, लेकिन विधायक दो। तहसील भी दो हैं। साथ ही ग्राम सभा में तीन लेखपाल। इस ग्राम पंचायत में राजस्व ग्रामों की संख्या चार हैं। चार मजरों की इस पंचायत के महज एक मजरे में स्कूल हैं, लेकिन बिजली वहां नहीं है। शारदा नदी किनारे बसी इस पंचायत में दो मजरे तो नदी के बीचो-बीच में बसे हैं, बरसात के महीने में पूरी पंचायत बाढ़ के पानी में डूब जाती है। कटान से जो दुश्वारियां लोगों को झेलनी पड़ती हैं सो अलग।
बिजुआ ब्लाक की ग्रामसभा कुंअरपुर कलां में चार मजरे हैं, जिनमें बझेड़ा गोला तहसील में है। इस मजरे में लेखपाल जीवनलाल की तैनाती है। बाकी तीन मजरे गोनहा, खैरा व कुुंअरपुर कलां पलिया तहसील में आते हैं। यहां दो लेखपाल राकेश राठौर व रतिराम है। यहां के बाशिंदों को तहसील के काम के लिए गोला व पलिया की दौड़ लगानी पड़ती है। तहसीलों के बंटवारे का सबसे बड़ा असर विधायकी क्षेत्र पर पड़ा है। बझेड़ा गोला विधानसभा क्षेत्र में है, तो बाकी के तीन गांव से पलिया विधानसभा के लिए विधायक चुना जाता है। इससे पहले यह ग्रामसभा पैला विधानसभा मेें आती थी। बझेड़ा गांव में बिजली नहीं है। गांव के लोगों ने विधायक विनय तिवारी से दरयाफ्त की थी। विधायक ने वादा भी किया था, अब गांव वालों को उम्मीद है जल्द ही उनका गांव भी बिजली से रोशन हो जाएगा।
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1995 में दो पंचायतें एक होकर बनी थी कुंअरपुर कलां
पहले बझेड़ा व गोनहा नाम से दो अलग-अलग पंचायतें होती थीं। उस समय बझेड़ा के प्रधान अजीत सिंह व गोनहा के प्रधान दिलदार हुसैन थे। 1995 में दोनाें पंचायतों को एक कर कुंअरपुर कलां नाम से नई पंचायत बना दी गई। नाम बदलने के बाद भी इस गांव की तस्वीर नहीं बदली।
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हर साल बाढ़ व कटान ....गांव की बस यही है कहानी
शारदा किनारे बसे इस गांव में हर साल शारदा नदी के बाढ़ का पानी आ जाता है। गांव तक पहुंचने के लिए कई माह तक नाव का सहारा लेना पड़ता है, बीते दो सालों में शारदा यहां पर कटान करने लगी। पिछले साल कुंअरपुर कलां का पंचायत घर व 50 से ज्यादा घर शारदा में समा गए। जिनमें कई इंदिरा आवास भी कट गए थे। प्रशासन ने नदी में कटे छप्पर वाले घरों को दो हजार रुपये दिए थे, लेकिन जिनकी पक्की कालोनी कटी थीं, उन्हें प्रशासन की तरफ से धेला तक न दिया गया।
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पंचायत में सिर्फ बझेड़ा गांव में स्कूल
ग्रामसभा में 1200 से अधिक वोटर है। चार मजरों में सिर्फ बझेड़ा गांव में प्राथमिक व पूर्व माध्यमिक विद्यालय बना है। यहां के बाकी मजरों के बच्चे तो पढ़ाई करने के लिए बझेड़ा स्कूल तक आ जाते हैं, लेकिन नदी के बीच में बसा गांव गोनहा के लगभग 130 बच्चों को शिक्षा देने का कोई इंतजाम नहीं है। वर्ष 2000 में एक विद्या केंद्र खुला था, लेकिन बाद में शासन ने इन्हें बंद कर दिया। 1978 में बझेड़ा गांव में स्कूल पास हुआ था, एक झोपड़ी के नीचे चलने वाले स्कूल को इमारत मिल चुकी है। साल 1987 से अध्यापक शेषदत्त बाजपेई तैनात हैं।
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पलिया-गोला तक की दौड़
ग्राम प्रधान चरनजीत सिंह सोडी कहते हैं कि छोटे-छोटे मामलों को लेकर लोगों को पलिया व गोला तहसील की दौड़ लगानी होती है। उनका कहना है कि गांव के विकास के लिए पंचायत स्तर पर जो योजनाएं संभव हैं, उनको प्रस्तावित किया गया है। स्कूल, सड़क व बिजली के लिए इस गांव को जनप्रतिनिधियों से मदद की दरकार है।

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