स्कूल निर्माण के लिए मिली रकम में हेराफेरी

Lakhimpur Updated Sat, 05 May 2012 12:00 PM IST
अमित गुप्ता
लखीमपुर खीरी। दो शिक्षकों को मिले अतिरिक्त कक्षों के निर्माण में धांधली का मामला सामने आया है। निर्माण के लिए मिली धनराशि बैंकों से आहरित की जा चुकी है, लेकिन निर्माण कार्य अधूरे पड़े हैं। दोनों शिक्षकों की ड्यूटी के दौरान मौत हो चुकी है, जिसके बाद खंड शिक्षा अधिकारी ने अदेय प्रमाण पत्र जारी कर उसने बेटों को मृतक आश्रित कोटे के तहत नौकरी भी दिला दी गई। जबकि बकाया वसूली के लिए कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई गई। प्रकरण को संज्ञान में लेते हुए बीएसए देवकी सिंह ने तीन सदस्यीय कमेटी बनाकर जांच बैठाई है।
मामला पलिया ब्लाक क्षेत्र का है। पहले मामले में प्राथमिक विद्यालय सरियापारा के प्रधान अध्यापक रामजीवन को चार अतिरिक्त कक्षा कक्ष बनाने का जिम्मा मिला था। प्राथमिक विद्यालय बनिगवां में एक और मसानखंभ में तीन कक्षा कक्ष निर्माण कराने के लिए 1.40 लाख प्रति कक्षा कक्ष के हिसाब से धनराशि मिली थी। प्रधान अध्यापक रामजीवन ने बनिगवां से 1.40 लाख और मसानखंभ के दो कक्षों के मद में 2.80 लाख रुपये बैंक से आहरित कर लिए। आरोप है कि बनिगवां में मात्र 20 हजार रुपये खर्च कर नींव स्तर तक काम कराकर छोड़ दिया गया। वहीं मसानखंभ में दो कक्षों के निर्माण की औपचारिकता निभाते हुए करीब 35 हजार रुपये खर्च कर इतिश्री कर ली गई। बीते आठ अक्तूबर 2010 को प्रधान अध्यापक रामजीवन की मृत्यु हो गई, जिसके बाद तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ने बगैर वसूली किए अदेय प्रमाण पत्र जारी कर दिया। पश्चात मृतक आश्रित कोटे से बीते 29 अप्रैल 2010 को शिक्षक के पुत्र दिनेश कुमार को उच्च प्राथमिक विद्यालय मकनपुर में अनुचर के पद पर नौकरी भी मिल गई। जीपीएफ का भुगतान भी हो चुका है।
दूसरा मामला इसी ब्लाक के प्राथमिक विद्यालय चंदन चौकी के प्रधानध्यापक श्रीपाल का है, जिन्हे प्राथमिक विद्यालय सौनहा में कक्षा कक्ष निर्माण के लिए 1.91 लाख रुपये की धनराशि मिली थी। इससे जर्जर कक्ष का जीर्णोद्धार भी कराना था। धनराशि को शिक्षक द्वारा बैंक से आहरित कर लिया गया, लकिन निर्माण कार्य अभी तक पूर्ण नहीं हुए। सेवाकाल के दौरान बीते 28 अप्रैल 2007 को शिक्षक की अकस्मात मृत्यु हो गई। इसके बाद तत्कालीन खंड शिक्षा अधिकारी ने वसूली कार्रवाई किए बिना ही देयकों के भुगतान व मृतक आश्रित कोटे में नियुक्ति की संस्तुति कर दी, जिसके आधार पर मृतक शिक्षक के पुत्र मनोज वर्मा को नौकरी भी मिल गई।


प्रकरण गंभीर, कार्रवाई होगी: बीएसए
शिक्षकों से बकाया वसूली किए बिना ही अदेय प्रमाण पत्र देना भारी लापरवाही साबित करता है। पूरे मामले की जांच एसडीएम पलिया, डायट प्रवक्ता शैलेंद्र सिंह व जेई आरईएस को सौंपी गई है। जांच रिपोर्ट मिलने के अनुसार कार्रवाई की जाएगी।
देवकी सिंह, बीएसए

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