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अब अफसरों की बारी, स्टे ने तीन को गिरफ्तारी से बचाया

Lakhimpur Updated Thu, 03 May 2012 12:00 PM IST
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ट्रांसपोर्टर, गोदाम प्रभारी, कोटेदार के बयान बनेंगे आधार
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समीउद्दीन ‘नीलू’
लखीमपुर खीरी। बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाले में अब तक 18 लोगों को गिरफ्तार कर जेल भेज चुकी सीबीआई अब इस मामले में फंसे अफसरों की गर्दन तक हाथ ले जाने की फिराक में जुट गई है। सूत्रों की माने तो सीबीआई के अधिकारी पहले ही कोटेदारों, गोदाम प्रभारियों आदि के बयान ले आरोपी अधिकारियों की कमजोर नस तक पहुंच चुके हैं। अब इसी आधार पर वह आरोपी अधिकारियों के करीब पहुंचने की जुगत में है। आज तीन पीसीएस अफसरों को भी गिरफ्तारी के लिए ही सीबीआई ने लखनऊ में बुलाया था, लेकिन तीनों के पास अरेस्ट स्टे होने के कारण उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका।
वर्ष 2004 में जिले का यह बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाला उजागर हुआ था। उस समय तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने तत्कालीन जिलाधिकारी एसपीएस सोलंकी, एसडीएम सदर इंद्रासन यादव, एसडीएम निघासन जेपी सिंह, एसडीएम धौरहरा एसपी सिंह, एसडीएम पलिया ओपी वर्मा, एसडीएम मोहम्मदी हेमंत पांडेय तथा गोला एसडीएम पीके शुक्ला को तत्काल प्रभार से निलंबित कर दिया था। इन लोगों के विरुद्ध विभागीय जांच भी हुई थी। जिसमे एसडीएम ओपी वर्मा को छोड़ शेष सभी आरोपी पीसीएस अफसरों को विभागीय जांच में वर्ष 2009 में प्रतिकूल प्रविष्टि मिल चुकी है। इसमें सबसे पहले एक साथ जिन तीन पीसीएस अफसरों को प्रतिकूल प्रविष्टि दी गई उसमे एसडीएम सदर इंद्रासन यादव, धौरहरा एसडीएम एसपी सिंह तथा निघासन एसडीएम जेके सिंह का नाम शामिल है।
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स्टे ने गिरफ्तारी से बचाया
सीबीआई के एक अधिकारी के मुताबिक तत्कालीन एसडीएम सदर इंद्रासन सिंह यादव, निघासन एसडीएम जयकरन सिंह तथा धौरहरा एसडीएम एसपी सिंह के खिलाफ घोटाले में लिप्त होने के पुख्ता सबूत मिल जाने के कारण आज तीनों पीसीएस अधिकारियों को गिरफ्तारी के लिए लखनऊ मुख्यालय बुलाया गया था, लेकिन उनके पास वर्ष 2005 का अरेस्ट स्टे होने के कारण उन्हें गिरफ्तार नहीं किया जा सका। इस मामले में निलंबित तत्कालीन डीएम एसपीएस सोलंकी सेवानिवृत्त हो चुके हैं, जबकि शेष आरोपी पीसीएस अधिकारी तथा दोनों जिलापूर्ति अधिकारी अभी सेवा में हैं। सूत्र बताते हैं कि जांच के घेरे में आए अधिकांश एसडीएम व दोनों जिला पूर्ति अधिकारियों को भी सीबीआई शीघ्र गिरफ्तार कर सकती है। सूत्रों के मुताबिक सीबीआई अधिकारियों ने इसकी सभी तैयारी लगभग पूरी कर ली है।
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क्या थी एसडीएम की जिम्मेदारी
लाभार्थियों में खाद्यान्न शत प्रतिशत वितरित हो इसकी जिम्मेदारी ग्रामीण क्षेत्र में एसडीएम तथा नगरीय क्षेत्र में डीएसओ की होती है। गोदाम तक खाद्यान्न आने पर उसका सत्यापन भी एसडीएम करते हैं। पर उस दौरान जिले में ऐसा बहुत कम हो रहा था। बताया जाता है कि खाद्यान्न माफियाओं की मिली भगत के कारण खाद्यान्न उपभोक्ताओं तक पहुंचता ही नहीं था, गोदाम आदि से ही खुले बाजार में बेच दिया जाता था।
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ओपी वर्मा ने लिया था खाद्यान्न माफियाओं से मुचैटा
लखीमपुर। आरोपी अफसरों में तत्कालीन एसडीएम पलिया ओपी वर्मा ही अब तक एक मात्र ऐसे पीसीएस अधिकारी हैं जिन्हें विभागीय जांच में क्लीनचिट मिली थी। बताया जाता है कि श्री वर्मा ने खाद्यान्न वितरण में रुचि न लेने वाले पूर्ति निरीक्षक का स्थानांतरण करने, एफआईआर की संस्तुति करने के साथ कई कोटेदारों पर कार्रवाई करने का साहस जुटाया था। हालांकि उस समय कोटेदारों व खाद्यान्न माफियाओं के इशारों पर उनका ट्रांसफर भी किया गया, लेकिन उनके द्वारा की गई कार्रवाई ही विभागीय जांच में उन्हें क्लीन चिट दिलाने में सहायक सिद्ध हुई।

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