सूदखोरों के फेर में फंसा पीडीएस का अन्न

Lakhimpur Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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उठान में रकम लेकर कोटेदार खाद्यान्न से करते हैं चुकता
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वितरण में कटौती से गरीबों को भुगतना पड़ता है खामियाजा
महबूब आलम
पलियाकलां। खाद्यान्न घोटाले के लिए चर्चित रहे जिलाें में एक बार फिर व्यवस्था पर सवालिया निशान लग गए हैं। खाद्यान्न के कालाबाजारी अब सूदखोरों की शक्ल में अप्रत्यक्ष रुप से गरीबों का निवाला डकारने में जुटे हुए हैं और इनके रसूख माहवार के चलते प्रशासनिक अमला चुप्पी साधे बैठा हुआ हैं।
वैसे तो यह हालात पूरे जिले में हैं, लेकिन पलिया तहसील की बात कुछ अलग ही हैं। सूदखोरों की शक्ल लिए हुए इन खाद्यान्न माफियाओं ने बाकायदा मंडी परिसर पर कब्जा जमा लिया है और किसी न किसी धंधे की आड़ में वह काले कारनामे को अंजाम दे रहे हैं। इनका असली खेल मासिक उठान के समय शुरू होता है। कोटे का खाद्यान्न उठाने के दौरान यह सूदखोर आर्थिक रुप से कमजोर कोटेदारों को अपने जाल में फांसते हैं। जाल में फंसने के बाद वह कोटेदारों को कर्ज की रकम मुहैया कराते हैं, जिसे कोटेदार सरकारी खाते में जमा कर खाद्यान्न उठाते हैं। खाद्यान्न उठते ही सूदखोर खाद्यान्न माफियाओं की बंदिश कोटेदारों पर शुरू हो जाती है और वह पहले ही सूद समेत अपनी रकम लेने के लिए जुट जाते हैं। रकम में वह कोटेदारों से खाद्यान्न की मांग करते है। कभी कभी कोटेदार वितरण के बाद खाद्यान्न देने की बात कहता है तो सूदखोरों के कारिंदे कोटेदार के यहां बैठकर अपनी निगरानी में वितरण कराते हैं और फिर खाद्यान्न वहां से अपने कब्जे में लेकर निकल आते हैं। सूद खोरों की रकम अदा करने के लिए कोटेदार गरीबों के निवाले में भारी हेराफेरी करते हैं। क्षेत्र की गरीब जनता को हर महीने इससे दो चार होना पड़ता है और सब कुछ जानने के बाद भी प्रशासनिक अधिकारी चुप्पी साधे बैठे हैं। सूत्रों की माने तो विभागीय समेत प्रशासनिक अधिकारियों को सूदखोर माहवार देते हैं जिसके एवज में चुप्पी बरकरार रहती है।
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गोदाम के आसपास रहता है इन का डेरा
सूदखोर गोदाम के पास ही अपना डेरा जमाए रहते हैं। रसूख की बदौलत सूदखोर वहां अधिकारियों की तरह ही नजर आते हैं।
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शहर और सटे गांवों में हैं भंडार
सूद में वसूला गया खाद्यान्न शहर और सटे हुए गांवों में लिए गए गोदामों में लगाया जाता हैं। सभी जगह का खाद्यान्न एकत्र होने के बाद इसे बाजार में पहुंचा दिया जाता है।
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क्रय केंद्रों पर भी बेंचा जाता है सूदखोरी का गेहूं
सूदखोर कोटेदारों से वसूले गए गेहूं को क्रय केंद्रों पर भी बेंचते हैं। पीडीएस के गेहूं को फर्जी तौर से किसानों का बनाकर क्रय केंद्र पर बिक्री किया जाता है। इसमें उन्हें अच्छी कीमत मिलती है। कुछ सूदखोर संस्थाओं के गेहूं क्रय केंद्रों का संचालन भी कर रहे हैं।
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वर्जन
मामला संज्ञान में नहीं हैं। जांच की जाएगी। ऐसा पाया गया तो सख्त कार्रवाई होगी।
-मनोज कुमार पांडे, एसडीएम पलिया
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