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जिले के नामचीनों में गिने जाते सीबीआई शिकंजे में फंसे लोग

Lakhimpur Updated Wed, 02 May 2012 12:00 PM IST
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समीउद्दीन ‘नीलू’
लखीमपुर खीरी। मंगलवार को भी सीबीआई ने अपने चिर परिचित अंदाज में जिन नौ लोगों को लखनऊ में गिरफ्तार किया उनमे दो गोदाम प्रभारी के साथ एक सेवा निवृत गोदाम प्रभारी भी शामिल है। इसके अलावा अधिकांश या तो जिले के नामी ट्रांसपोर्टर हैं या फिर राइस मिलर।
गिरफ्तार लोगों में शामिल ज्ञान स्वरू शुक्ला की गिनती जिले के नामी ट्रांसपोर्टरों में होती है। इन पर आरोप है कि उन्होंने करीब तीन करोड़ रुपये की कीमत का गरीबों के लिए आए खाद्यान्न को बांगलादेश भेज दिया। इसके अलवा इस घोटाले से जुड़ लोगों को फाइनेंस करने का भी इन पर आरोप है।
इसी तरह शिव नरेश सिंह उर्फ राजू तथा संजय गुप्ता उर्फ चन्नू
को सीबीआई ने बिचौलिया होने के आरोप में गिरफ्तार किया है। इन पर आरोप है कि बेहजम विकास खंड क्षेत्र में हुए खाद्यान घोटाले में इन दोनों ने ही बिचौलिए की भूमिका निभाई। जबकि राजेश कुमार गुप्ता उर्फ राजन पूड़ वाला भी ट्रांसपोर्टर हैं तथा इन पर भी रमिया बेहड़ ब्लाक में तथा सत्तार खां को धौरहरा ब्लाक में घोटाले के आरोपियों को फाइनेंस करने तखा खाद्यान्न को ट्रांसपोर्ट करने का आरोप है।
सीबीआई द्वारा गिरफ्तार किए गए सत्य प्रकाश अग्रवाल की गिनती भी जिले के प्रमुख राइस मिलरों में की जाती है। श्री अग्रवाल गोला स्थित आरएन फ्लोर मिल के मालिक हैं। मंगलवार को गिरफ्तार किए गए तत्कालीन गोदाम प्रभारी कैलाश नाथ शर्मा सेवा निवृत हो चुके हैं। जबकि गोदाम प्रभारी कृष्णपाल शर्मा वर्तमान में बदायूं में गोदाम प्रभारी के पद पर तैनात थे। गोदाम प्रभारी जगदीश प्रसाद इस समय सीतापुर में इसी पद पर तैनात बताए जा रहे हैं।
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आज पेश होंगे सभी गिरफ्तार लोग
लखीमपुर खीरी। सीबीआई द्वारा मंगलवार को गिरफ्तार किए गए सभी नौ आरोपियों को बुधवार को सीबीआई की लखनऊ स्थिति अदालत में पेश किया जाएगा।
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सफेदपोश से लेकर अधिकारी तक निशाने पर
लखीमपुर खीरी। जिले के बहुचर्चित खाद्यान्न घोटाला मामले की जांच कर रही सीबीआई द्वारा इस मामले के आरोपी नौ लोगों की मंगलवार को हुई गिरफ्तारी के बाद से जिले के खाद्यान्न माफियाओं से लेकर कोटेदारों तक में हड़कंप है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही इस मामले में कुछ और खाद्यान्न माफियाओं के साथ-साथ इस मामले में फंसे कुछ अधिकारी भी सीबीआई के शिकंजे में होंगे।
ज्ञातव्य है कि वर्ष 2004 में जिले में करीब एक अरब रुपये से अधिक का खाद्यान्न घोटाला उजागर हुआ था। जिसके बाद तत्कालीन मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने तत्कालीन जिलाधिकारी एसपीएस सोलंकी सहित पांच पीसीएस अधिकारियों, दो डीएसओ, सभी गोदाम प्रभारियों के साथ पूरा जिला पूर्ति कार्यालय स्टाफ को निलंबित कर दिया था। आरोप था कि गरीबों के लिए आए खाद्यान्न को गोदाम प्रभारी, ट्रांसपोर्टर आदि कोटेदारों की मिली भगत से अथवा जबरिया खुले मार्केट में बेंच देते थे। उच्च न्यायालय के आदेश पर जांच कर रही सीबीआई इस मामले से जुड़ कुछ गोदाम प्रभारी व ट्रांस्पोर्टरों सहित करीब नौ लोगों को पहले ही जेल की हवा खिला चुकी है।
इस कार्रवाई के बाद से सीबीआई जिले के अन्य खाद्यान्न माफियाओं के साथ-साथ उस दौरान उनका साथ दे रहे कुछ सफेद पोशों, कोटेदारों तथा अधिकारियों के गिरेबान तक अपना हाथ ले जाने की तैयारी कर रही है। सूत्रों की मानें तो जल्द ही जिले के कुछ अन्य ट्रांसपोर्टर, फाइनेंसर, तथा कोटेदारों के साथ-साथ सफेदपोश तथा इस मामले में फंसे अधिकारी भी सीबीआई की गिरफ्त में होंगे।

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