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आंगनबाड़ी केंद्रों की जांच में 1,10,432 बच्चे कुपोषित

Lakhimpur Updated Wed, 05 Nov 2014 05:30 AM IST
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लखीमपुर खीरी। जीरो से छह वर्ष तक के बच्चों में कुपोषण के खिलाफ चलाए जा रहे अभियान बेअसर साबित हुए हैं। जनपद के 15 ब्लाकों में 2,71,919 बच्चों की जांच की गई, जिसमें 1,10,432 बच्चे कुपोषित मिले, जबकि 336 बच्चे अति कुपोषित मिले। इसके अलावा 59 बच्चे असमय मौैत के शिकार हो गए। समेकित बाल विकास परियोजना की रिपोर्ट के बावजूद स्वास्थ्य विभाग मौन साधे हुए है। ऐसे बच्चों के लिए जिला अस्पताल में खोला गया पोषण पुनर्वास केंद्र्र सूना पड़ा है।
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समेकित बाल विकास परियोजना (आईसीडीएस) की ओर से प्रतिमाह आंगनबाड़ी केंद्रों के माध्यम से बच्चों में कुपोषण की स्थिति की जांच की जाती है और बच्चों को पोषाहार दिया जाता है। इसके बावजूद बच्चों में कुपोषण कम नहीं हो रहा है। सितंबर 2014 में हुई जांच के नतीजों पर गौर करें, तो स्थिति काफी खतरनाक हो गई है। 15 ब्लाक और नगर क्षेत्र में जीरो से छह वर्ष तक के 6,19,358 बच्चे हैं, जिसमें 2,71,919 बच्चों की विश्व स्वास्थ्य संगठन के मानक के अनुसार जांच कराई गई। इसमें 1,61,151 बच्चे सामान्य मिले। जबकि 1,10,432 बच्चे कुपोषित (खतरनाक) और 336 बच्चे अति कुपोषित (बहुत खतरनाक) मिले। डब्ल्यूएचओ के मानक के मुताबिक इन्हें शीघ्र ही इलाज और उचित पोषण की जरूरत है।
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बाल मृत्युदर भी बढ़ा रही चिंता
आईसीडीएस के आंकड़ों पर गौर करें, तो सितंबर 2014 में विभिन्न कारणों के चलते 59 बच्चों की मौत हुई है। इसमें जीरो से एक वर्ष तक के 36 और एक से पांच वर्र्ष तक के 23 बच्चे शामिल हैं। सबसे ज्यादा नकहा ब्लाक में 22, कुंभी/गोला में 13 और्र ईसानगर ब्लाक में नौ बच्चों की मौत हुई है।
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दहाई में भी नहीं पहुंचा आंकड़ा
कुपोषित बच्चों के लिए जिला अस्पताल में खोले गए पोषण पुनर्वास केंद्र्र पर नवंबर में सिर्फ दो बच्चे भर्ती हुए, जबकि अक्तूबर में संख्या चार तक सिमट गई। सितंबर में 10 बच्चों का उपचार किया गया। जबकि यहां बच्चे की भर्ती कराने पर आशा/आंगनबाड़ी को 100 रुपये बतौर प्रोत्साहन राशि देय है। बच्चे को खाना फ्री है, उसकी मां को 100 रुपये प्रतिदिन और आने जाने के लिए 300 रुपये धनराशि देने का प्रावधान है। इस दौरान मां को बच्चे के स्वास्थ्य के लिहाज से जानकारी भी दी जाती है।
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सात माह से तीन वर्ष तक के बच्चों का प्रतिमाह वजन किया जाता हैै। तीन से छह वर्ष तक के बच्चों का तिमाही वजन लेकर जांच की जाती है। अति कुपोषित बच्चों का 15 दिन में वजन लिया जाता है। कुपोषित बच्चों के बारे में सूचना स्थानीय एएनएम और सीएचसी/पीएचसी को दी जाती है। ताकि उचित इलाज और पोषण मिल सके।
-श्यामकुमारी, जिला कार्यक्रम अधिकारी
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जानकारी के अभाव में लोगों को समुचित लाभ नहीं मिल पा रहा है। कुपोषित बच्चों के इलाज के लिए पुर्नवास केंद्र में 10 बेड की क्षमता है। इसके अलावा प्रोत्साहन राशि भी दी जाती है।
-डॉ आरके वर्मा, सीएमएस
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