विज्ञापन

जंगल के आसपास बढ़ी सेही की आबादी,आलू की फसल हो रही चौपट

Bareily Bureauबरेली ब्यूरो Updated Sun, 09 Dec 2018 12:36 AM IST
ख़बर सुनें
फोटो- 08एलकेएच501,502
विज्ञापन
विज्ञापन
जंगल के आसपास बढ़ा सेही का कुनबा, आलू की फसल चौपट
क्रासर
अंधविश्वास के चलते सेही का होता है बड़े पैमाने पर शिकार

अमर उजाला ब्यूरो
बांकेगंज। फसलों को नुकसान पहुंचाने वाले चूहों और हानिकारक कीडे़ मकोड़ों को खाकर फसलों को बचाने वाली सेही किसानों की मित्र मानी जाती है। बावजूद इसके इन दिनों जंगल के आसपास विशेषकर आलू, शकरकंद और जमीन के अंदर होने वाले कंद प्रजाति की खेती करने वाले किसानों की फसलें सेही तबाह कर रही है।
पिछले कुछ वर्षों में दुधवा टाइगर रिजर्व बफरजोन के मैलानी रेंज जंगल और आसपास के इलाके में सेही की आबादी में तेजी से बढ़ोत्तरी हुई है। अपने शरीर पर लंबे और नुकीले कांटों को धारण करने वाली सेही जिन खेतों में रहती है वहां चूहों और अन्य हानिकारक कीड़ों मकोड़ों को खाकर यह नष्ट कर देती है। इससे किसान सेही को अपना मित्र मानते हैं। सेही का पंसदीदा भोजन कीड़ों मकोड़ो के अलावा आलू, शकरकंद, समेत कंद प्रजाति की सब्जियां होती हैं। बांकेगंज क्षेत्र में आलू, शकरकंद आदि की बड़े पैमाने पर खेती होती है। सेही किसानों की इन फसलों को भारी नुकसान पहुंचा रही है। इससे क्षेत्र के किसान परेशान हैं।

इंसेट
वन्यजीवों के लिए भी घातक है सेही
सेही के शरीर पर मिलने वाले नुकीले कांटों के कारण यह वन्यजीवों के लिए भी घातक साबित होती है। हाल ही में चलतुआ जंगल में ग्रामीणों के हमले में मारी गई बाघिन के पैर और गले के अंदर सेही का कांटा पाया गया था। बाघिन का पोस्टमार्टम करने वाले डॉक्टरों ने अनुुमान लगाया कि बाघिन ने अनजाने में सेही का शिकार कर लिया जो उसके गले की फांस बनकर बनकर रह गई।
इंसेट
अंधविश्वास के चलते लोग सेही का करते हैं शिकार
वन्यजीव विशेषज्ञ डॉ. वीपी सिंह बताते हैं कि इको सिस्टम में सभी जीवों और वनस्पतियों का अपना अलग-अलग महत्व होता है। सेही एक ओर जहां चूहों और हानिकारक कीड़ों मकोड़ो को खाकर किसानों की फसलों की सुरक्षा करती है, वहीं जमीन के अंदर उगने वाली कंद प्रजाति की सब्जियों को खाकर उसका नुकसान करती है। अंधविश्वास के चलते लोग सेही के कांटों के लिए उसका शिकार करते हैं।
वर्जन......
सेही जंगल की जैव विविधता का महत्वपूर्ण अंग है। पारिस्थितिक संतुलन में भी इनकी अपनी भूमिका है। कोई जीव जब प्रकृति को कुछ देता है तो उसका उपयोग भी करता है। सेही एक तरफ जहां फसलों की सुरक्षा करती है, तो दूसरी तरफ अपने पसंद का भोजन कर पेट पालती है। यह प्रकृति का नियम है।
डॉ अनिल कुमार पटेल, उपनिदेशक, दुधवा टाइगर रिजर्व, बफरजोन

Recommended

विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की खबरों को फेसबुक पर पाने के लिए लाइक करें

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News App, iOS Hindi News App और Amarujala Hindi News APP अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन

Spotlight

विज्ञापन

Most Read

Bareilly

लखीमपुर खीरी: बाग में लटकती मिली प्रेमी युगल की लाश, एक ही दुपट्टे से झूलते मिले दोनों

रविवार को  घर से लापता हुए प्रेमी युगल की लाशें मंगलवार की सुबह गांव के बाहर आम की बाग में पेड़ से लटकती हुई मिली। दोनों की लाशें एक ही डाल पर एक ही दुपट्टे से लटकी हुई थी। आशंका जताई जा रही है कि दोनों ने एक साथ आत्महत्या कर ली है।

18 दिसंबर 2018

विज्ञापन

आगरा के भव्य राधास्वामी मंदिर की इन विशेष बातों को नहीं जानते होंगे आप

आगरा यूं तो ताजमहल के लिए विश्व प्रसिद्ध है पर अब इसकी एक और पहचान विश्व पटल पर उभर रही है और वो है राधास्वामी मंदिर। दयालबाग में बने इस भव्य राधास्वामी मंदिर के इतिहास और विशेषताओं के बारे में आपको इस रिपोर्ट में बताते हैं।

19 दिसंबर 2018

आज का मुद्दा
View more polls

Disclaimer

अपनी वेबसाइट पर हम डाटा संग्रह टूल्स, जैसे की कुकीज के माध्यम से आपकी जानकारी एकत्र करते हैं ताकि आपको बेहतर अनुभव प्रदान कर सकें, वेबसाइट के ट्रैफिक का विश्लेषण कर सकें, कॉन्टेंट व्यक्तिगत तरीके से पेश कर सकें और हमारे पार्टनर्स, जैसे की Google, और सोशल मीडिया साइट्स, जैसे की Facebook, के साथ लक्षित विज्ञापन पेश करने के लिए उपयोग कर सकें। साथ ही, अगर आप साइन-अप करते हैं, तो हम आपका ईमेल पता, फोन नंबर और अन्य विवरण पूरी तरह सुरक्षित तरीके से स्टोर करते हैं। आप कुकीज नीति पृष्ठ से अपनी कुकीज हटा सकते है और रजिस्टर्ड यूजर अपने प्रोफाइल पेज से अपना व्यक्तिगत डाटा हटा या एक्सपोर्ट कर सकते हैं। हमारी Cookies Policy, Privacy Policy और Terms & Conditions के बारे में पढ़ें और अपनी सहमति देने के लिए Agree पर क्लिक करें।

Agree