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एपी बांध के ठोकर का 30 मीटर हिस्सा धंसा

Gorakhpur Bureau गोरखपुर ब्यूरो
Updated Fri, 30 Jul 2021 11:42 PM IST
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बाघाचौर के नोनियापट्टी में ठोकर को गंडक नदी के कटान से बचाने में जुटा बाढ़ खंड विभाग।
बाघाचौर के नोनियापट्टी में ठोकर को गंडक नदी के कटान से बचाने में जुटा बाढ़ खंड विभाग। - फोटो : KUSHINAGAR
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एपी बांध के ठोकर का 30 मीटर हिस्सा धंसा
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तमकुहीरोड (कुशीनगर)। क्षेत्र बाघाचौर गांव के नोनियापट्टी टोला के निकट एपी बांध के किलोमीटर 12.860 के ठोकर पर शुक्रवार की सुबह अचानक कटान तेज हो गई। इससे ठोकर के डाउन स्ट्रीम का 30 मीटर हिस्सा नदी में समा गया। लिहाजा गांव के लोगों की बेचैनी बढ़ गई है। इसकी सूचना मिलते ही बाढ़ खंड के अभियंता मौके पर पहुंचकर ठोकर के संवेदनशील हिस्से को बचाने में जुट गए हैं।
वाल्मीकिनगर बैराज से गंडक नदी में हर घंटे लगातार डेढ़ लाख से पौने दो लाख क्यूसेक पानी छोड़े जाने से एपी बांध व नरवाजोत बांध के कई स्थानों पर गंडक नदी के पानी का भारी दबाव और कटान का खतरा बना हुआ है। इससे बांध के किनारे बसे लोग सहमे हुए हैं। यही कारण है कि नोनियापट्टी गांव के सामने एपी बांध के किलोमीटर 12.860 पर बांध की सुरक्षा को लेकर बनाया गया ठोकर तीसरी बार गंडक नदी के निशाने पर आ चुका है। बृहस्पतिवार की दोपहर ही इसके डाउन स्ट्रीम के क्षेत्र में नदी की बैकरोलिंग शुरू हो गई थी और ठोकर का लगभग 15 मीटर हिस्सा नदी में समा गया था। हालांकि उसे देर शाम तक दुरुस्त कर लिया गया था, लेकिन दूसरे दिन शुक्रवार को सुबह नदी में कटान इतनी तेज हो गई कि देखते ही देखते डाउन स्ट्रीम के क्षेत्र में शुरू हुई बैकरोलिंग के चलते पूर्व में कराए गए बचाव कार्य के साथ ठोकर का 30 मीटर हिस्सा नदी में समा गया। इससे लोगों में बेचैनी बढ़ गई।

लोगों का कहना था कि बांध की सुरक्षा के लिए बना यह ठोकर काफी महत्वपूर्ण है और ठोकर की सुरक्षा पर ही एपी बांध के साथ बाघाचौर, बाकखास, बेदूपार, नोनियापट्टी, फागूछापर, खैरटिया, सिसवानाहर, बिरवट कोंहवलिया सहित अन्य गांवों की सुरक्षा निर्भर करती है। नदी इसके पहले 12 व 29 जून को भी इसे अपना निशाना बना चुकी है, लेकिन किसी तरह इस ठोकर को कटने से बचा लिया गया था। शुक्रवार को ठोकर पर कटान तेज होने की सूचना मिलते ही जेई चंद्रप्रकाश, राकेश कुमार, राजेश कुमार सिंह, संजय कुमार मौर्य, सुनील कुमार यादव, रमेशधर दुबे सहित कई अभियंता मौके पर पहुंच गए और स्थिति की गंभीरता को देखते हुए कटान नियंत्रित किए जाने को लेकर बचाव कार्य शुरू करा दिया गया है। बांध के किनारे बसे ग्रामीण दीनानाथ सिंह, संजय सिंह, मुकेश कुमार, कृष्णा निषाद, राकेश कुमार, नागेंद्र सिंह का कहना है कि बांध की सुरक्षा के लिए बनाए गए ठोकरों की स्थिति ठीक नहीं है। यदि समय रहते ठोकरों को सुरक्षित नहीं बनाया गया तो वह कभी भी एपी बांध सटे गांवों की सुरक्षा के लिए खतरा साबित हो सकते हैं।
बाढ़ खंड तृतीय के एसडीओ एसके प्रियदर्शी का कहना है कि मौके पर अभियंताओं की टीम लगी हुई है। कटान को नियंत्रित करने की कोशिश तेज कर दी गई है।
ठोकर को 12 और 29 जून को भी गंडक ने पहुंचाया था नुकसान
तमकुहीरोड। एपी बांध के किलोमीटर 12.860 पर बना यह वही ठोकर है, जिसे गंडक नदी ने 12 जून और 29 जून को भी निशाना बनाया था। इसमें ठोकर का आधा से अधिक हिस्सा नदी की धारा में बह गया था। उसे दुरुस्त करने में अभियंताओं को कई दिन लग गए थे। पांच जुलाई को एपी बांध पर परियोजना के कार्यों का निरीक्षण करने आए भारत सरकार के जलशक्ति मंत्री गजेंद्र सिंह शेखावत व प्रदेश सरकार के जलशक्ति मंत्री डॉ. महेंद्र सिंह ने प्रदेश सरकार के अपर सचिव टी. वेंकटेश, डीएम एस. राजलिंगम, प्रमुख अभियंता अशोक कुमार सिंह, मुख्य अभियंता आलोक कुमार जैन, अधीक्षण अभियंता केके राय, अधिशासी अभियंता महेश कुमार सिंह, सहायक अभियंता एसके प्रियदर्शी के साथ इस ठोकर का भी जायजा लिया था।
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