11 लोगों की शहादत को सलाम

Kushinagar Updated Sun, 26 Jan 2014 05:44 AM IST
तमकुहीरोड। 1942 में अंग्रेजों भारत छोड़ो आंदोलन के दौरान स्थानीय रेलवे सिग्नल पर तिरंगा फहराने से अंग्रेजों के बंदूकों की गोलियां भी नहीं रोक पाई थीं। ग्यारह लोगों के शहादत के बाद आजादी के दिवानों ने सिग्नल पर तिरंगा लहराकर ही दम लिया था। अमर शहीदों की गाथा बयां कर रहे नगर के शहीद स्मारक पर आज भी लोग सम्मान से सर झुकाते हैं।
स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान तमकुहीरोड क्षेत्र की भागीदारी भी कम नहीं रही। इस क्षेत्र के लोगों के खून से तमकुहीरोड की मिट्टी लाल हो गई थी। 1942 में जब महात्मा गांधी ने जब अंग्रेजों भारत छोड़ो का नारा दिया, उस समय 12 और 13 अगस्त को तमकुही क्षेत्र के लोगों ने स्थानीय रेलवे स्टेशन के पास बिछाई गई रेल लाइन को उखाड़ दिया था। पूरे क्षेत्र से कांग्रेस मंडल के लोग एकत्र हुए और निर्णय लिया था कि तमकुहीरोड रेलवे सिगनल, पोस्ट आफिस और चीनी मिल पर तिरंगा फहराया जाएगा। देश भक्तों के इस फैसले की जानकारी अंग्रेजों को हो गई थी। पहले से ही इन स्थलों पर पुलिस का पहरा लगा दिया गया था। फिर भी आजादी के दिवानों की टोलियों ने अपना लक्ष्य पाने को कूच कर दिया। बताते हैं कि रेलवे स्टेशन के माल गोदाम के पास अंग्रेज पुलिस के फायरिंग मेें क्षेत्र के जतन, जानकी चौबे, मथुरा सिंह, धरीक्षण राय, रघुवीर, रामानंद, लुटावन सिंह, भोला, फेंकू भगत, भुइलोट और मंगल राय शहीद हो गए। फिर भी आजादी के दिवानों के कदम रुके नहीं और उन्होंने इन सभी जगहों पर तिरंगा फहराकर दम लिया। शहीद हुए इन ग्यारह लोगों की याद में नगर में शहीद स्मारक बना हुआ है। इस स्मारक के बगल से गुजरने वाले लोग आज भी श्रद्धा से अपना सिर झुकाते हैं। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर इस शहीद स्थल पर कई लोग माल्यार्पण कर इन अमर शहीदों को नमन करते हैं।

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