मानवरहित समपार फाटकों पर सुरक्षा की चुनौती

Kushinagar Updated Fri, 24 Jan 2014 05:45 AM IST
पडरौना। शुक्रवार से कप्तानगंज-थावें रेलमार्ग पर सुरक्षित ढंग से ट्रेनों का संचालन रेलवे और प्रशासन के लिए चुनौती होगी। क्योंकि बृहस्पतिवार तक जहां इस रूट पर केवल एक जोड़ी पैसेंजर ट्रेन और कभी-कभार एक्सप्रेस गाड़ियां ही चलती थीं, पर शुक्रवार से कई एक्सप्रेस ट्रेनें दौड़ेंगी। इस रेलखंड के मानवरहित 69 समपार फाटक रेलवे और प्रशासन के लिए सिरदर्द बने रहेंगे। इन समपार फाटकों से दिनभर लोगों की आमदरफ्त होती रहती है। कोहरे में तो हादसे भी होते रहते हैं। बहुत से लोगों को पता भी नहीं है कि शुक्रवार से इस रेल लाइन पर एक्सप्रेस ट्रेनों की संख्या में इजाफा हो जाएगा।
रेलवे ने नूनखार-भटनी-भाटपाररानी रेलखंड पर दोहरीकरण और नानइंटरलाकिंग कराने के लिए इस रूट की ट्रेनों को कप्तानगंज-थावें रेलखंड पर चलाने का निर्णय लिया है। शुक्रवार से इस रेलमार्ग पर उन ट्रेनों का संचलन शुरू हो जाएगा। पहले जहां एक जोड़ी पैसेंजर ट्रेनों का आवागमन ही इस रेलमार्ग पर था, उस पर अब इन ट्रेनों के अलावा 10 एक्सप्रेस ट्रेनों का संचालन भी होगा। 24 से 31 जनवरी तक चलने वाली इन एक्सप्रेस ट्रेनों में गोरखपुर से कोलकाता जाने वाली पूर्वांचल एक्सप्रेस, भागलपुर से जम्मूतवी जाने वाली अमरनाथ एक्सप्रेस, कटिहार से अमृतसर तक चलने वाली आम्रपाली एक्सप्रेस, गुवाहाटी से जम्मूतवी चलने वाली लोहित एक्सप्रेस, गोरखपुर से हटिया जाने वाली मौर्य एक्सप्रेस, नई दिल्ली से बरौनी तक चलने वाली वैशाली एक्सप्रेस, सहरसा से अमृतसर चलने वाली जनसेवा एक्सप्रेस, गुवाहाटी से लालगढ़ चलने वाली अवध आसाम एक्सप्रेस, न्यू जलपाईगुड़ी से नई दिल्ली सहित गोरखपुर से आसनसोल तक चलने वाली ट्रेनें हैं। हालांकि इन ट्रेनों का ठहराव इस रूट पर कहीं नहीं है।
ऐसे में चिंता की बात यह है कि कप्तानगंज-थावें रेलखंड के 109 समपार फाटकों में से 69 मानवरहित हैं। केवल 40 ही ऐसे फाटक हैं, जहां गेटमैन तैनात हैं। अब तक होता यह था कि दिन भर में दो से तीन बार ट्रेनों के आने-जाने और उनका समय मालूम होने के कारण मवेशियों को चराने और चारा लाने-ले जाने वालों के अलावा गन्ना लदे वाहन चलाने वाले लोग बेधड़क रेल लाइन पार कर जाते थे। अब एकाएक ट्रेनों की संख्या बढ़ने और उनके आने-जाने का समय मालूम न होने से दुर्घटनाआें की आशंका बढ़ जाएगी। पहले से ही गेटमैनों की कमी से जूझ रहे रेलवे के पास भी इतना मैनपावर नहीं है कि वहां तैनात कर सके।
फोटो

...जानलेवा हो सकती है ऐसी लापरवाही
थोड़ी सी जल्दी के लिए मोल ले रहे खतरा
अमर उजाला ब्यूरो
पडरौना। शुरुआती दिनों में स्कूलों में भी यह शिक्षा दी जाती है कि रेलवे लाइन पार करते समय दाएं-बाएं देखने के बाद ही आगे बढ़ें। बड़े बुुजुर्ग भी बच्चों को घर से बाहर निकलते वक्त इतना जरू समझा देते हैं। बावजूद इसके लोग जानबूझकर जोखिम मोल ले रहे हैं।
पडरौना रेलवे स्टेशन पर सीमेंट का रैक लेकर पहुंची मालगाड़ी बृहस्पतिवार को तीसरे नंबर के प्लेटफार्म पर खड़ी थी। स्कूली छात्र हों या मुसाफिर, केवल दो बोगियों की दूरी तय करने की बजाय जोखिम उठाकर ट्रेन के नीचे से गुजर जा रहे थे। जान बूझकर जोखिम मोल ले रहे यह लोग दस कदम चलने में भी कठिनाई महसूस रहे थे। उन्हें इस बात की भी फिक्र नहीं थी कि यदि चालक गाड़ी को आगे या पीछे बढ़ा दे तो क्या होगा? ट्रेन की बोगियां इतनी दूरी तक थीं कि यदि इंजन जुड़ जाए और वह हार्न दे, तब भी ठीक से सुनाई न दे। एक व्यक्ति ने ट्रेन के नीचे से गुजरते समय यह बोल भी पड़ा कि कहीं ट्रेनवा चली त नाही देई होे...। ऐसी ही लापरवाही पडरौना शहर के मुख्य रेलवे ढाले सहित सभी फाटकों पर देखने को मिली। दोपहर में ट्रेन के आते समय क्रासिंग बंद होने के बावजूद लोग सामान और दोपहिया वाहन लिए रेललाइन पार कर जा रहे थे।

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