कई बार ढालों पर लगता है जाम

Kushinagar Updated Tue, 21 Jan 2014 05:46 AM IST
पडरौना। सोमवार की दोपहर 12:05 बजे नगर के सुभाष चौक से कोतवाली जाने वाले मार्ग पर रेलवे ढाला बंद रहने से जाम लगा था। 10 मिनट बाद पैसेंजर ट्रेन गुजरने के बाद ढाला खुल गया। उसके बाद लोगों के बीच जल्दी आगे निकलने की ऐसी होड़ लगी कि जाम और बढ़ गया। वाहनों के शोर और धुआं से जाम में फंसे लोगों का बुरा हाल था। 20 मिनट की अफरा-तफरी के बाद स्थिति सामान्य हुई। नगर में रेलवे ढालों पर ऐसा आएदिन हो रहा है। अभी तो सिर्फ एक पैसेंजर ट्रेन के चलने पर यह हाल है। 24 जनवरी से जब इस रेल लाइन पर कई एक्सप्रेस ट्रेनें चलेंगी, तब लोगों को जाम से कितना जूझना होगा, इसका अनुमान ही नगर वासियों की चिंता बढ़ा रहा है। लोगों का कहना है कि नगर के बीचोबीच से गुजरने वाली रेल लाइन पर जब दिन में कई बार ट्रेनें दौड़ेंगी और एक बार ट्रेन गुजरने पर घंटे तक जाम लगा रहेगा तो यहां की आबादी हिस्सों में बंट सी जाएगी।
कप्तानगंज-थावे रेलमार्ग नगर के बीच से होकर गुजरता है। मुख्य रेलवे ढाला के अलावा तीन और ढाले भी हैं, जहां ट्रेनों के आने और जाने के समय जाम लग जाता है। ट्रेनों के गुजरने के काफी देर तक लोग जाम में फंसे रहते हैं। चारों ढालों में एक पर भी उपरिगामी पुल नहीं है। कई जरूरी बैंक और दफ्तर रेलवे लाइन की एक तरफ तो कोतवाली, फायर स्टेशन, महिला थाना, नगर का महिला अस्पताल सहित प्रमुख शैक्षणिक संस्थान दूसरी ओर हैं। आम दिनों में जाम के कारण इन जगहों पर जाने-आने वालों को दिक्कत होती है।
अभी सुबह से शाम तक चार बार ही ट्रेनें गुजरती हैं। रेलवे लाइन से नगर की आबादी दो हिस्सों में बंटी हुई है। नगर में चार रेलवे क्रासिंग हैं। ट्रेन तो कुछ मिनट में एक रेलवे क्रासिंग से गुजर जाती है लेकिन जाम घंटे भर तक लगा रहता है। मालूम हो कि पूर्वोत्तर रेलवे की ओर से नूनखार-भटनी-भाटपार रानी खंड पर दोहरीकरण और नान इंटरलाकिंग के चलते लंबी दूरी की 10 एक्सप्रेस ट्रेनों को आगामी 24 जनवरी से 31 जनवरी तक कप्तानगंज-थावे मार्ग से चलाया जाएगा। इन एक्सप्रेस ट्रेनों में गोरखपुर से कोलकाता जाने वाली पूर्वांचल एक्सप्रेस, भागलपुर से जम्मूतवी जाने वाली अमरनाथ एक्सप्रेस, कटिहार से अमृतसर तक चलने वाली आम्रपाली एक्सप्रेस, गुवाहटी से जम्मूतवी चलने वाली लोहित एक्सप्रेस, गोरखपुर से हटिया चलने वाली मौर्य एक्सप्रेस, नई दिल्ली से बरौनी तक चलने वाली वैशाली एक्सप्रेस, सहरसा से अमृतसर चलने वाली जनसेवा एक्सप्रेस, गुवाहटी से लालगढ़ चलने वाली अवध आसाम एक्सप्रेस, न्यू जलपाईगुड़ी से नई दिल्ली सहित गोरखपुर से आसनसोल तक चलने वाली एक्सप्रेस ट्रेन शामिल हैं। रेलवे सूत्रों के मुताबिक इन एक्सप्रेस ट्रेनों का ठहराव इस जिले के किसी स्टेशन पर नहीं होगा।
नगर में जाम से हर कोई बेहाल
पडरौना। महीने के 30 दिन नगर जाम के नाम रहता है। चाहे रोजमर्रा की जरूरत से खरीदारी करने वाले हों, कोर्ट-कचहरी और दफ्तरों में जाने वाले फरियादी हों, नौकरी करने वाले या फिर विद्यार्थी, हर कोई जाम से बेहाल होता है। हद तो यह है कि मरीजों को लेकर चलने वाले तीमारदारों की बात कौन कहे, एंबुलेंस भी जाम में अक्सर फंसी दिखती है। जिला मुख्यालय से इन नगर में आने-जाने वाले लोगों को छावनी मुहल्ले से ही जाम का सामना करना पड़ता है। कठकुइयां मोड़ से लेकर सुभाष चौक तक तो रुक-रुक कर दिन में कई बार जाम लगता है। कोतवाली के बाद से राहगीरों के लिए जाम सबसे बड़ी चुनौती होता है। धर्मशाला रोड, तिलक चौक, दरबार रोड, जटहा चौक आदि जगहों पर जाना राहगीरों के लिए काफी मुश्किल साबित होता है। नगर की प्रमुख सड़कों की पटरियों पर सजने वाली दुकानें, ठेला, खोमचे और वाहनों के अवैध पड़ाव और गड्ढों से बच बचाकर चलने की कोशिश में यात्रियों को काफी सांसत होती है। जाम में कई बार लोगों की आपसी तकरार भी होती है। नगर में पांच मिनट का काम निपटाने के लिए लोगों को घंटा भर समय गंवाना पड़ता है। कहने को तो पुलिस प्रशासन के पास यातायात नियंत्रण के लिए स्टाफ भी है लेकिन कुछ अधिकारियों और वीआईपी के गुजरते वक्त ही इनकी सक्रियता दिखती है। ओवरलोड वाहनों और अकुशल वाहन चालकों के हाथ स्टीयरिंग आने से भी यह समस्या विकराल हो जाती है। नगर की संकरी सड़कों पर अक्सर बड़ी गाड़ियों का प्रवेश जाम का कारण बन जाता है। अपरिपक्व चालक भी भीड़भाड़ में वाहनों को बेतरतीब तरीके से चलाते या खड़े कर देते हैं। इससे आवागमन प्रभावित होता है।
लोग बोले, प्रशासन को सक्रिय होना पड़ेगा
पडरौना। लोगों का मानना है कि ट्रेनों का संचालन बढ़ते ही जाम की समस्या बढ़ेगी। इस समस्या के लिए लोग अतिक्रमण के साथ ही यातायात नियमों की अनदेखी को भी मुख्य वजह मानते हैं। लोगों का कहना है कि यदि यातायात नियमों का ठीक से पालन हो तो कुछ हद तक इस समस्या से राहत मिल सकती है।
जब-जब ढालेे बंद होंगे लगेगा जाम
नगर के व्यापारी सुधीर जायसवाल कहते हैं कि अभी एक से दो ट्रेनें ही चल रही हैं तो हर दिन ढालों पर जाम लगता है। जाहिर है ट्रेनों का संचालन बढ़ने से जाम की समस्या भी बढ़ेगी। जब-जब ढाले बंद होंगे, तब-तब जाम लगेगा। लोगों की दुश्वारियां बढ़ेंगी। इसके लिए प्रशासन को विशेष इंतजाम करना होगा।
नगर में ओवरब्रिज न होना समस्या
सामाजिक कार्यकर्ता रामकृपाल कन्नौजिया कहते हैं कि जिला मुख्यालय से नगर में आना दिक्कतों भरा काम होता है। जाम से सबसे ज्यादा दिक्कत मरीजों और विद्यार्थियों को होती है। पूरे नगर में कहीं ओवरब्रिज नहीं है। रेलवे स्टेशन के पूरब वाले ढाले की ओर ओवरब्रिज बन जाए तो समाधान हो सकता है।
व्यापार पर जाम का पड़ता है बुरा असर
व्यापारी ईश्वरचंद्र रूंगटा कहते हैं कि जाम के चलते लोग नगर के एक छोर से दूसरे छोर जाने से कतराते हैं। इसका असर व्यापार पर भी पड़ता है। आने वाले दिनों में जब कई बार ढाला बंद होगा तो स्थिति और खराब होगी। इस समस्या से निजात दिलाने के लिए कोई विकल्प भी नहीं है। लोगों की परेशानी बढ़ेगी।
प्रशासन को पहले से तैयार होना होगा
शिक्षक अरुण सिंह का कहना है कि नगर में जाम से विद्यार्थियों और नौकरी करने वालों को वैसे ही काफी दिक्कत होती है। ट्रेनों का संचालन बढ़ने से पहले प्रशासन को सक्रिय होना चाहिए। प्रमुख सड़कों की बेरिकेडिंग की व्यवस्था के साथ ट्रैफिक के अतिरिक्त जवानों की व्यवस्था करनी प्रशासन को करनी पड़ेगी

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