प्रशासन का कार्य भी कर रही न्यायपालिका

Kushinagar Updated Mon, 25 Nov 2013 05:41 AM IST
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पडरौना (कुशीनगर)। उच्च न्यायालय इलाहाबाद के प्रशासनिक न्यायमूर्ति प्रदीप कुमार सिंह बघेल ने शनिवार को कहा कि देश भर में तीन करोड़ से ज्यादा मुकदमे पेंडिंग हैं। इसकी वजह न्याय प्रक्रिया का बाधित होना है। आज न्यायपालिका का कार्य बढ़ गया है। लंबित मुकदमों को निपटाने के साथ-साथ बाहरी मामलों को सुलझाने की जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। मसलन राज्य कर्मचारियों की 11 दिनों से चल रही हड़ताल को बंद कराने के लिए हाईकोर्ट को हस्तक्षेप करना पड़ा। इस तरह के मामलों में न्यायपालिका का अधिकतर समय खर्च हो जा रहा है। न्यायपालिका को प्रशासन का काम करना पड़ रहा है।
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प्रशासनिक न्यायमूर्ति शनिवार को जिला एवं सत्र न्यायालय पडरौना में आयोजित राष्ट्रीय वृहद लोक अदालत में बतौर मुख्य अतिथि बोल रहे थे। उन्होंने लॉ कमीशन की रिपोर्ट का हवाला देते हुए कहा कि देश में न्यायाधीशों की संख्या काफी कम है। अपने देश में दस लाख आबादी पर 10 न्यायाधीश हैं जबकि पड़ोसी देश बंग्लादेश में ही 10 लाख की आबादी पर 14 जज हैं। अन्य विभागों पर सरकारें जितनी धनराशि खर्च करतीं है, उनके मुकाबले न्यायालयों पर काफी कम धन खर्च होता है। आर्मी पर दस, शिक्षा पर चार, दवा पर पांच प्रतिशत धन खर्च होता है, जबकि न्याय पर महज 0.001 प्रतिशत धन खर्च होता है। इसलिए मुकदमों के निस्तारण में विलंब होता है। ऐसी दशा में इस तरह की लोक अदालतें मुकदमों के निस्तारण में काफी सहायक होती हैं। सुलह-समझौते के आधार पर मुकदमे आसानी से सुलझाए जा सकते हैं। अमेरिका में मिडिएशन काफी सफल है। इसलिए यहां भी मिडिएशन सेंटर की स्थापना कर दी गई है। आज के दिन पूरे देश में एक साथ मेगा लोक अदालत चल रही है। न्यायमूर्ति पीके सिंह बघेल ने कहा कि फरवरी-मार्च तक उन सभी न्यायालयों में जज मिल जाएंगे, जहां पद खाली होने की वजह से वादकारियों को कठिनाई हो रही है।
प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने सिस्टम पर भी उठाए सवाल
पडरौना। राष्ट्रीय वृहद लोक अदालत में प्रशासनिक न्यायमूर्ति ने वर्तमान व्यवस्था पर भी सवाल उठाए। उन्हाेंने कहा कि सिस्टम फेल्योर हो रहा है। वादकारियों का हित बाद में, पहले अपना हित देखा जा रहा है। अब सिस्टम में बदलाव की जरूरत है।
बतौर विशिष्ट अतिथि श्रम विभाग के सचिव एवं नोडल अधिकारी राकेश कुमार ओझा ने कहा कि पूरे देश में एक विचारधारा है कि त्वरित न्याय मिले। इसके मद्देनजर लोक अदालत का आयोजन किया गया है। लंबे समय से लंबित मामलों का निस्तारण इस लोक अदालत के माध्यम से हो रहा है। इससे आमजन को अधिक राहत मिल रही है। जिला जज एके उपाध्याय ने कहा कि लंबे समय से दबी आवाज को न्याय में गति मिलती है। यह मेगा लोक अदालत वादों के निस्तारण में मील का पत्थर साबित होगा। डीएम रिग्जियान सैंफिल और एसपी ललित कुमार सिंह ने कहा कि जापानी बुखार से हो रही मासूमों की मौत की ओर ध्यान आकृष्ट कराया। इन्होंने कहा कि इस क्षेत्र में जागरुकता पैदा करने के साथ बाल अधिनियम पर हुई कार्रवाई से पिछड़े क्षेत्र में चेतना पैदा हुई है। कार्यक्रम को सीजेएम सुरेंद्रनाथ, बार एसोसिएशन के अध्यक्ष महंथ गोपाल दास आदि ने संबोधित किया। इस लोक अदालत में जगह-जगह विभिन्न न्यायालयों, वाणिज्यिक संस्थानों और विभागों के काउंटर लगे थे। जहां वादकारियों के वादों का निस्तारण किया जा रहा था। मुख्य अतिथि ने न्यायालय परिसर में पौधरोपण भी किया। कार्यक्रम के अंत में मुख्य अतिथि और विशिष्ट अतिथि को अशोक चिह्न और महात्मा बुद्ध की मूर्ति प्रतीक चिह्न के रूप में भेंट किया गया। इस अवसर पर सीडीओ जनार्दन बर्नवाल, एएसपी श्रीप्रकाश द्विवेदी, अपर जिला जज एके गणेश के साथ न्यायिक मजिस्ट्रेट, ज्वाइंट मजिस्ट्रेट, उद्यान अधिकारी, डीडीओ समेत सभी विभागों के अधिकारी, अधिवक्ता, जज एवं वादकारी मौजूद थे।
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