धन उपलब्ध फिर भी कार्य में विलंब, सचिव नाराज

Kushinagar Updated Mon, 25 Nov 2013 05:40 AM IST
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पडरौना। शासन की प्राथमिकताओं वाले बिंदुओं और विकास कार्यों की समीक्षा करने आए श्रम विभाग के सचिव एवं नोडल अधिकारी राकेश कुमार ओझा ने शुक्रवार को अधिकारियों के साथ बैठक की। विकास भवन के सभागार में हुई इस बैठक में जिन विभागों की उपलब्धियां ठीक रहीं, उनसे तो जवाब तलब नहीं हुआ लेकिन जिनका कार्य पूर्ण नहीं था, उन्हें कई सवालों का सामना करना पड़ा। खासकर स्वास्थ्य, जलनिगम, नलकूप आदि विभाग से ज्यादा पूछताछ हुई। सचिव ने कहा कि जब तक धन व्यय नहीं होगा, आगे धन नहीं मिलेगा। उन्हाेंने पडरौना कोतवाली में निर्माणाधीन बैरेक और सदर तहसील में फाइलों का मुआयना किया।
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शुक्रवार को सचिव दिन के दस बजे विकास भवन पहुंचे। सभागार में उन्हाेंने जिले के अधिकारियों के साथ बैठक की। संयुक्त जिला चिकित्सालय में 56 लाख रुपये की लागत से बन रही बर्न यूनिट को अब तक हस्तांतरित न किए जाने का उन्होंने कारण पूछा। डीएलओ सुदर्शन सोनकर ने बताया कि कार्यदायी संस्था लैकफेड ने कार्य पूर्ण नहीं कराया है। छत समेत कई कार्य अभी अधूरे हैं। सचिव ने कार्य शीघ्र पूर्ण कराने का निर्देश दिया। नेबुआ नौरंगिया सीएचसी में बनने वाले मैटर्निटी विंग में अब तक कोई प्रगति न होने पर भी उन्होंने नाराजगी जताई। 25 लाख रुपये से अधिक की लागत से प्रस्तावित रामकोला-पडरौना-बांसी के निर्माण कार्य की समीक्षा में पाया कि धन रहते हुए कार्य अधूरे हैं। उन्होेंने पीडब्ल्यूडी के अधिशासी अभियंता को कार्य पूर्ण कराने का निर्देश दिया। ग्रामीण अभियंत्रण सेवा से कप्तानगंज थाने में 80, पडरौना कोतवाली और विशुनपुरा में 60-60 पुलिसकर्मियों के रहने के लिए बन रहे बैरेक की समीक्षा में भी कार्य की प्रगति मिली। उन्होंने निर्माण इकाई को तेजी लाने को कहा। बेसिक शिक्षा विभाग के भवन निर्माण, अतिरिक्त कक्ष और जिला विद्यालय निरीक्षक के यहां से बनने वाले मॉडर्न स्कूलों के निर्माण में धीमी गति पर भी उन्हाेंने संबंधित विभाग के अधिकारियों से पूछताछ की।
वाणिज्य कर विभाग की ओर से बताया गया कि वित्तीय वर्ष 2013-14 में लक्ष्य के सापेक्ष 52.5 प्रतिशत की वसूली हुई है। प्रदेश सरकार की प्राथमिकता वाले राममनोहर लोहिया समग्र ग्राम योजना के बारे में विभाग की ओर से बताया गया कि पिछले महीने ही 12 गांवों के लिए धन आया है लेकिन यह कुल धनराशि का 15 प्रतिशत ही है। सड़क और विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण नहीं है। इस पर सचिव ने कहा कि पहले काम शुरू करा दें। धन व्यय होने के बाद ही प्राप्त होगा।
अब बारी आई जलनिगम विभाग की। स्वच्छ पेयजल आपूर्ति के बारे में सचिव ने टीटीएसपी स्कीम के तहत ओवरहेड टैंकों को दिए गए कनेक्शन के बारे में पूछा। जलनिगम के अधिशासी अभियंता मनोज कुमार ने बताया कि कसया विकासखंड के कुड़वा उर्फ दिलीप नगर और जवही मलही गांव में विद्युतीकरण का कार्य पूर्ण हो गया है। पानी की सप्लाई के लिए गांवों को जोड़ने का काम नहीं हुआ है। सचिव ने वैकल्पिक ऊर्जा, शौचालय निर्माण, लोहिया आवास, मनरेगा, निशुल्क बोरिंग योजना, बेरोजगारी भत्ता वितरण, कौशल विकास, पशुओं के टीकाकरण, कृषि वितरण कार्य में खाद एवं बीज की उपलब्धता, कन्या विद्या धन, वृद्धा पेंशन, लोहिया ग्रामीण आवास, जनेश्वर मिश्र ग्राम योजना आदि के बारे में भी जानकारी ली। कन्या विद्या धन योजना में करीब 52 प्रतिशत लाभार्थी ही लाभांवित हुए हैं। उन्होंने जेई/एईएस से पीड़ित बच्चों के विकलांग प्रमाण पत्र की स्थिति के बारे में भी पूछताछ की और इस तरह के प्रमाण पत्रों की सूची उपलब्ध कराने का डीएलओ को निर्देश दिया। डीएम रिग्जियान सैंफिल ने सभी अधिकारियों को निर्देश दिया कि जिन्हें धन नहीं मिल रहा है वे पत्र भेजकर बताएं। उन्हें धन उपलब्ध कराया जाएगा। जिन विभागों के पास योजनाआें के लिए धन उपलब्ध है, पारदर्शितापूर्ण तरीके से कार्य को समय सीमा के अंदर पूर्ण कराएं। सीडीओ जनार्दन बर्नवाल ने कहा कि जिस विभाग से पूछा गया है, वे टिप्पणी बनाकर डीएसटीओ के यहां उपलब्ध करा दें। अंत में सचिव ने कहा कि अगली बैठक में आने से पहले नक्शा सावधानी से बनाकर लाएं। रिपोर्ट ऐसी तैयार करें कि कोई अंतर न आए। शासन भी उन्हीं योजनाओं पर धन देता है, जिन पर कार्य होता है और रकम खर्च की जाती है। व्यय दिखाएं तभी धन मिलेगा। बैठक में पीडी चंद्रशेखर मिश्र, डीडीओ आरपी उपाध्याय, अधिशासी अभियंता जलनिगम, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, विद्युत विभाग, जिला विद्यालय निरीक्षक, जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी, जिला समाज कल्याण अधिकारी, जिला उद्यान अधिकारी, डीपीआरओ, डीएसटीओ, जिला सेवायोजन अधिकारी, जिला आबकारी अधिकारी सहित सभी विभागों के अधिकारी मौजूद थे।
और ताकने लगे एक-दूसरे का मुंह
पडरौना। नेबुआ नौरंगिया सीएचसी के निर्माण में कोई प्रगति न देखकर सचिव की भौहें तन गईं। वे पूछ बैठे कि इसका निर्माण कौन सी कार्यदायी संस्था करा रही है? इस सवाल का जवाब बैठक में मौजूद किसी अधिकारी के पास नहीं था। वे एक-दूसरे का मुंह ताकने लगे। नेबुआ नौरंगिया में सीएचसी का निर्माण होना है। समीक्षा कर रहे सचिव राकेश कुमार ओझा ने स्वास्थ्य विभाग के डीएलओ एस सोनकर और विभागीय लिपिक से पूछा कि इस कार्य में इतना विलंब क्यों है? लेकिन इसका जवाब किसी के पास नहीं था। बैठक में यह तो बताया गया कि इसके लिए ड्राइंग हुई थी, प्राक्कलन हुआ था। दिसंबर तक कार्य पूर्ण भी कराना है। धनराशि पूरी मिल गई है लेकिन कौन सी एजेंसी इसे करा रही है? यह जवाब भी कोई नहीं दे पा रहा था। इस पर सचिव ने असंतोष व्यक्त किया। उन्होंने कहा कि इतना भी होश नहीं है कि क्या काम करना है। निर्माण एजेंसी का कार्य बहुत निचले स्तर का है। क्या चाहते हैं, इस बारे में शासन को लिख दिया जाए?
पिछली बार की समस्या इस बार भी
पडरौना। सचिव ने नलकूप विभाग के अधिकारी से वहां की प्रगति के बारे में पूछा। इस पर उन्होंने बताया कि जिले में उपलब्ध कुल नलकूपों में 267 खराब हैं। सुकरौली विकासखंड के सुगौली में स्थित नलकूप में यांत्रिक गड़बड़ी है। इस पर सचिव ने कहा कि यह खराबी तो पिछली बार भी थी। अब कितने दिन में ठीक करा देंगे? इस संबंधित विभाग के अधिकारी ने एक हफ्ते की मोहलत मांगी।
बैरेक की जांच कर रिपोर्ट देने का निर्देश
पडरौना। समीक्षा बैठक के बाद सचिव पडरौना कोतवाली में पहुंचे, जहां पुलिसकर्मियों के लिए बन रहे बैरेक का निरीक्षण किया। दूसरी मंजिल पर बन रही लाबी के पूर्ण होने की समयावधि के बारे में पूछा। पडरौना कोतवाली में 60 पुलिसकर्मियों के रहने के लिए 77.82 लाख रुपये की लागत से तीन मंजिला बैरेक बन रहा है। यूपी प्रोजेक्ट कार्पोरेशन इसका निर्माण करा रहा है। सचिव के पूछने पर सहायक परियोजना निदेशक डीएस थॉमस ने बताया कि अंतिम किस्त जून में मिली है। बैरेक दिसंबर तक बनकर पूर्ण हो जाएगा। सचिव ने डीआरडीए के एई को निर्देश दिया कि आरईएस से मिलकर इसके डिजाइन, प्लास्टर और गुणवत्ता की जांच कराकर रिपोर्ट दें। इस दौरान डीएम और सीडीओ भी मौजूद थे।
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