नहीं दिखा एस्मा का असर, हड़ताल जारी

Kushinagar Updated Fri, 22 Nov 2013 05:41 AM IST
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पडरौना। बुधवार को नौवें दिन भी राज्य कर्मचारियों की हड़ताल जारी रही। हड़ताल पर सरकार की सख्ती का कोई असर नहीं देखा गया। कर्मचारी अपने पुराने ढर्रे पर हड़ताल जारी रखकर धरना-प्रदर्शन करते रहे। फरियादी मायूस होकर वापस जाते रहे। एस्मा का कोई असर कर्मचारियों की हड़ताल पर नहीं देखा गया।
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राज्य कर्मचारी अधिकार मंच के बैनर तले हड़ताली कर्मचारी विकास भवन के कर्मचारी संघ के अध्यक्ष बहादुर प्रसाद पाल की अध्यक्षता में विकास भवन परिसर में धरना दिए। इस धरने में विकास भवन, डीआरडीए, लोक निर्माण विभाग, सिंचाई विभाग, खाद्य और रसद, स्वास्थ्य, श्रम, वन, उद्योग, कृषि, राजस्व, समाज कल्याण, पंचायती राज सहित लगभग सभी विभागों के कर्मचारी धरने पर बैठे थे। धरने में योगेंद्र द्विवेदी ने कहा कि कर्मचारी नेता और प्रमुख सचिव कार्मिक के बीच हुई वार्ता विफल होने के बाद यह निर्णय किया गया है कि जब तक मांगों को नहीं माना जाता, तब तक हड़ताल जारी रहेगी। धरना स्थल पर पहुंचे हियुवा के जिलाध्यक्ष संजय सिंह मुन्ना ने भी धरने को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि कर्मचारियों की जायज मांगों के प्रति सरकार उदासीन बनी हुई है। यदि कर्मचारियाें की मांगों पर विचार कर उन्हें नहीं माना गया तो 28 नवंबर को गोरखपुर के सांसद योगी आदित्यनाथ की इंसेफेलाइटिस को लेकर की जाने वाली पदयात्रा के बाद धरने में शामिल होने की बात कही जाएगी। इस दौरान जनपद के कई संगठनों के पदाधिकारी और कर्मचारी उपस्थित रहे। धरने में अरविंद तिवारी, विजय प्रकाश पांडेय, भगवंत राजभर, दुर्गावती, शिवशंकर, दीनबंधू मद्धेशिया, अशोक कुमार पंाडेय, वीरेंद्र कुमार दीक्षित, राहुल कुमार, प्रमोद कुमार सहित बड़ी संख्या में कर्मचारी तथा उनके संगठनों के नेता मौजूद रहे।
कोई भटक रहा था, किसी ने भाषण सुनी
पडरौना। अधिकारी दफ्तरों में बैठे रहे लेकिन कर्मचारियों के नहीं होने के कारण फरियादियों की समस्याओं का निस्तारण नहीं हो पा रहा था। कोई फरियादी इधर-उधर घूम रहा था तो कोई कर्मचारियों के धरने के पास जाकर उनकी बातों को सुन रहा था।
बुधवार को डीएम अपने दफ्तर में बैठे थे। कर्मचारियों के न होने के कारण उनके दफ्तर के सामने भीड़ लगी थी। इसी भीड़ से बाहर निकल कर एक किनारे अपने छह माह की बच्ची के साथ फरियाद करने पहुंची विमला ने बताया कि उनके पति रामकुंवर की मौत छह माह पूर्व हो गई थी। तब से वह दौड़ लगा रहीं हैं लेकिन कोई उनका सुनने वाला नहीं हैं। विमला का कहना था कि बड़े अधिकारी से मिलना है। वहां भीड़ काफी है। वह पारिवारिक लाभ योजना का लाभ पाने के लिए दौड़ रही हैं। उन्होंने बताया कि वह समाज कल्याण विभाग दौड़ते-दौड़ते थक गई हैं। विमला बताती हैं कि फार्म भरने के लिए उनसे रुपये भी लिए गए हैं। थकी-हारी विमला का कहना था कि वह डीएम से मिलकर अपनी बात कहेंगी।
इसी तरह हड़ताली कर्मचारियों के धरने को सुन रहे फरियादी शारदा रामकोला थाने के गांव घिनहुंआ से चलकर आए थे। इन्हें अपनी पेंशन के बारे में जानकारी लेनी थी। आफिस में कोई कर्मचारी नही था, इसलिए विकास भवन में चल रहे धरने के पास बैठकर कर्मचारियों की बातों को सुन रहे थे। इनका कहना था कि समय और रुपये दोनों की बर्बादी हुई और काम के नाम पर भाषण सुनने को मिला। बनवीरपुर के सरातन विकलांग हैं। इन्हें अपने विकलांग पेंशन के संबंध में जानकारी लेनी थी। दफ्तर में ताला लटका देख वह संबंधित कर्मचारी को धरने में ढूंढ रहे थे। विकास भवन के विभिन्न तलों पर फरियादी एक-दूसरे से पूछते नजर आए कि इ धरना कहिया ले चली, हमन के काम कइसे होई। रोज-रोज किराया लागता और काम कउनों होत नइखे।
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हड़ताल से मरीजों की सांसत
पडरौना। विशुनपुरा ब्लॉक के चैती मुसहरी गांव की 12 साल की प्रभावती को उसकी मां जिला अस्पताल लेकर आई थी। प्रभावती को तेज बुखार था और कई बार उल्टियां भी हो चुकी थीं। डॉक्टर ने उसे देखने के बाद खून की जांच के लिए ऊपरी मंजिल पर पैथालॉजी में भेज दिया। लड़खड़ाती बेटी को सहारा देकर पैथालॉजी में पहुंची मां को पता चला कि वहां के कर्मचारी हड़ताल पर हैं। उन्होंने कई लोगों से गुजारिश की कि उनकी बेटी के खून की जांच हो जाए पर कोई असर नहीं हुआ। थोड़ी देर में प्रभावती वहीं गश खाकर गिर पड़ी। कुछ लोगों ने प्रभावती की मां को राय दी कि वह बेटी को लेकर किसी नर्सिंगहोम में चली जाए। तब वह महिला अपना माथा पकड़ यह कहते हुए सुबकने लगी कि अगर पैसे होते तो यहां क्यों आई होती।
बुधवार को जिला अस्पताल में ऐसे कई मरीज दिखे, जो दूर-दराज से चलकर जांच और इलाज कराने के लिए आए थे पर अस्पताल के लैब टेकभनीशियन और आंखों की जांच करने वाले कर्मचारियों की हड़ताल के कारण न सिर्फ उन्हें निराश होना पड़ा बल्कि कुछ की पीड़ा बढ़ गई। जिला अस्पताल में पैथालॉजी खुला तो था पर कुर्सियां खाली पड़ी थीं। पैथालॉजी में सिर्फ एक कर्मचारी टहलता नजर आया। वह भी किसी की जांच करने के लिए नहीं बल्कि यह बताने के लिए मौजूद थे कि हड़ताल के कारण वहां कोई जांच नहीं होगी। चैती मुसहरी की प्रभावती की मां ने बताया कि उनकी बेटी की तबीयत दो दिनों से काफी खराब है। घर में रोटी का इंतजाम हो, इसलिए पति मजदूरी करने चले गए और उनको बेटी के साथ अस्पताल में भेजा। महिला ने बताया कि डॉक्टर बोले हैं कि जांच के बाद बीमारी का पता चलेगा और तभी इलाज शुरू हो पाएगा। अब समझ में नहीं आ रहा कि वह क्या करें। और भी कई मरीज और उनके तीमारदार पैथालॉजी में जांच नहीं होने से मायूस होकर लौट गए।
जिला अस्पताल में नेत्र परीक्षण केंद्र बंद था जबकि उसके बाहर ऐसे कई नेत्र रोगी उसके खुलने की आस में बैठे थे। जटहां बाजार से आए ध्रुप कुशवाहा ने बताया कि गन्ने की पत्ती से उनकी आंख में चोट लग गई है। जब दर्द नहीं सहा गया तो यहां आंख दिखाने आया। दो घंटे से नेत्र परीक्षण केंद्र के खुलने का इंतजार कर रहा हूं। रामकोला इलाके मुसहरी से आए विश्वनाथ ने बताया कि आंख में काफी दर्द है। उसकी जांच कराने आया था। घंटों बाद मालूम हुआ कि जांच करने वाले हड़ताल पर हैं। आने और जाने का किराया और समय दोनों बर्बाद हुआ। तमकुहीरोड के गौरी इब्राहिम से आई कौशिल्या देवी ने बताया कि उन्हें आंख से कम दिखाई देने लगा है। उन्होंने बताया कि उनके इलाके में न तो कोई आंख का अस्पताल है न ही डॉक्टर। इस कारण 40 किलोमीटर की दूरी तय करके यहां आंख की जांच कराने आई थी। इनके पति मदन शर्मा ने बताया कि कई मरीज नेत्र परीक्षण केंद्र के खुलने का इंतजार करके लौट गए। यहां कोई यह बताने वाला नहीं है कि यह केंद्र क्यों नहीं खुला है।
इंसेट
नर्स सिर्फ एक शिफ्ट में ड्यूटी करेंगी
पडरौना। कर्मचारियों की हड़ताल का और व्यापक असर जिला अस्पताल में पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश राजकीय नर्सेस संघ के आह्वान पर जिला अस्पताल की नर्सों ने 21 नवंबर से सिर्फ एक शिफ्ट की ड्यूटी करने का निर्णय लिया है। यह जानकारी नर्सेस संघ की अध्यक्ष नयनतारा और महामंत्री सरिता राव ने संयुक्त रूप से दी। उन्होंने बताया कि प्रदेश संगठन की ओर से पत्र मिलने के बाद यह निर्णय किया गया है।
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