अब खसरा के खात्मे की तैयारी

Kushinagar Updated Sat, 26 Oct 2013 05:39 AM IST
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पडरौना। पोलियो की तरह खसरे को मिटाने के लिए व्यापक अभियान चलाने की तैयारी शुरू कर दी गई है। इसे मेजर्स सर्विलेंस नाम दिया गया है। क्योंकि इस बीमारी के जटिल हो जाने पर बच्चे का जान जाने खतरा रहता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन और स्वास्थ्य महकमा इसके लिए संयुक्त रूप से कार्य करेंगे। गांव से जिलास्तर तक ऐसी चेन बनाई जानी है जिससे पीड़ित हर बच्चे की रिपोर्ट समय पर मिलती रहे। इस कार्य में गांव की एएनएम और आशा की भूमिका काफी महत्वपूर्ण होगी। किसी गांव में पांच से अधिक संख्या में बच्चों के खसरा से पीड़ित मिलने पर इसकी सूचना जिले पर दी जाएगी। जिले पर गठित स्वास्थ्य टीम गांव में जाकर रक्त के नमूने लेगी और मरीज का उपचार शुरू हो जाएगा।
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चेचक सरीखी दिखने वाली इस बीमारी से हर साल बहुत से बच्चे प्रभावित होते हैं। बीमारी जटिल हो जाने पर बच्चों की जान जाने का खतरा रहता है। यह बीमारी ज्यादातर नौ माह से लेकर तीन साल के बच्चों को होती है। मासूमों को इससे महफूज रखने के लिए अब राष्ट्रीय स्तर पर अभियान चलाने की तैयारी की जा रही है। इस अभियान के तहत बच्चों को खसरे के दो टीके लगाए जाएंगे। पहला टीका नौ से 12 महीने के बीच और दूसरा 16 से 24 महीने के मध्य। इसके पीछे उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा बच्चों का टीकाकरण हो सके।
एएनएम और आशा के माध्यम से खसरा पीड़ित बच्चों की पड़ताल की जाएगी। ऐसे केस मिलने पर अपने क्षेत्र के पीएचसी या सीएचसी के चिकित्साधिकारी को बताएंगी। जिस गांव में पांच से अधिक केस पाए जाएंगे, वहां की सूचना चिकित्साधिकारी जिले पर देंगे। इसके लिए गठित चिकित्सकीय टीम गांव में जाकर मरीजों के रक्त के नमूने लेगी और उपचार शुरू किया जाएगा। ऐसे मरीजों के बारे में साप्ताहिक रिपोर्ट तैयार करने के साथ ही नियमित टीकाकरण भी किया जाएगा।
कितनी खतरनाक है यह बीमारी
बाल रोग सलाहकार डॉ. सतीश रंजन बताते हैं कि यह विषाणुजनित और छुआछूत की बीमारी है। तेज बुखार, सूखी खांसी, नाक से पानी आना, छींक आना और आंख से पानी गिरना इसका लक्षण है। बुखार के पांचवें दिन बच्चे के शरीर पर लाल दाने निकलने शुरू हो जाते हैं। इन्फेक्शन के आठ से 12वें घंटे में लक्षण प्रदर्शित होता है। बीमारी जटिल होने पर निमोनिया, दस्त, इंसेफेलाइटिस का अटैक हो सकता है, जो अक्सर जानलेवा साबित होता है। साधारण केस में बच्चों को पौष्टिक भोजन देने के साथ साफ-सुथरे कपड़े पहनाने चाहिए। इसकी रोकथाम के लिए नौवें महीने में टीका लगता है।
खसरा को जड़ से मिटाने के लिए व्यापक अभियान शुरू होने वाला है। इसके लिए विशेष टीकाकरण सप्ताह चलाया जाएगा। तीन साल तक के बच्चों और गर्भवती महिलाओं को सभी टीकों से आच्छादित किया जाएगा। इसके लिए रेलवे स्टेशन, जुग्गी-झोपड़ी, घुमंतू परिवारों और निर्माण वाले स्थानों पर खास नजर रखी जाएगी।
डॉ. लालता प्रसाद
जिला प्रतिरक्षण अधिकारी, कुशीनगर
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