इंसेफेलाइटिस से दो और बच्चों की मौत

Kushinagar Updated Sat, 26 Oct 2013 05:39 AM IST
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दुदही/हाटा। इंसेफेलाइटिस से शुक्रवार को दो और बच्चों की मौत हो गई। जंगल विशुनपुरा टोला गोसाईपट्टी की दलित बस्ती की एक और बच्ची की शुक्रवार को गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में मौत हो गई। इस तरह इस गांव में इंसेफेलाइटिस से मरने वाले बच्चों की संख्या पांच हो गई है। वहीं, मोतीचक के मुड़िला हरपुर के टोला भुड़वा में भी एक बच्ची की इसी बीमारी से मौत हो गई। इसी परिवार के तीन अन्य लोेग बीमार है। मौत की खबर के बाद गांव में एएनएम और एक स्वास्थ्य कर्मचारी पहुंचे और नाम पता नोट कर लौट गए।
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इंसेफेलाइटिस से तिल-तिलकर बच्चों के मरने का सिलसिला अब भी बना हुआ है। 20 अक्टूबर से ही यह बीमारी मासूमों पर कहर बनकर टूट रही है। गोसाईंपट्टी की दलित बस्ती के अनुज, सुनील, रंजना और आरती की मौत के बाद इससे जूझ रही एक और बच्ची ने शुक्रवार को सुबह दम तोड़ दिया। सोनम नाम की इस बच्ची का इलाज गोरखपुर मेडिकल कॉलेज में चल रहा था।
बीमारी का भय लोगाें के जेहन में इस कदर बैठ गया है कि वे इसे दैवीय प्रकोप मानने लगे हैं। इस गांव की पासपति, रीता, सुभावती, संगती आदि शुक्रवार सुबह गांव के काली स्थान पर पूजा-अर्चना करके बच्चों को बचाने की प्रार्थना कीं। गांव के प्राथमिक विद्यालय में 55 बच्चों का नामांकन है। शुक्रवार को विद्यालय के शिक्षक अशोक सिंह, राजकुमार राय और अभय सिंह दिन के दो बजे तक बच्चों के आने का इंतजार करते रहे लेकिन कोई नहीं पहुंचा।
दूसरी घटना में मोतीचक ब्लॉक के एक गांव में इसकी चपेट में आने से एक बच्ची की मौत हो गई। इसी परिवार के तीन अन्य लोेग बीमार है। मौत की खबर के बाद गांव में पहुंचे एएनएम और एक स्वास्थ्य कर्मचारी नाम पता नोट कर गांव से लौट गए।
मोतीचक के गांव मुड़िला हरपुर के टोला भुड़वा निवासी अवधेश राजभर की आठ वर्षीय पुत्री खुशबू करीब एक सप्ताह पूर्व जेई की चपेट में आ गई। घरवाले उसे 22 अक्टूबर की सुबह करीब नौ बजे इसे लेकर मथौली के सीएचसी पर पहुंचे। परिजनों का कहना है कि वह पर न तो कोई डॉक्टर मिला और न ही कोई स्वास्थ्य कर्मचारी। इसके बाद परिजन बच्ची को लेकर हाटा स्वास्थ्य केंद्र पर पहुंचे, वहां डॉक्टर ने उपचार किया और जेई का लक्षण बताते हुए गोरखपुर मेडिकल कॉलेज रेफर कर दिया। मेडिकल कॉलेज में शुक्रवार को उसकी मौत हो गई। खबर मिलने पर सुबह गांव की एएनएम और एक अन्य स्वास्थ्य कर्मचारी गांव पहुंचे और बच्ची का नाम पता नोट कर लौट गए। जबकि इसी घर के तीन अन्य सदस्य प्रदीप, संदीप और एक अन्य महिला भी बीमार हैं। इनका इलाज मथौली बाजार के एक झोलाछाप डॉक्टर के यहां हो रहा है। गांव के लोगों ने बताया कि इस गांव में ज्यादातर इंडिया मार्क टू हैंडपंप खराब हैं। लोग साधारण हैंडपंप का पानी ही पीते हैं।
स्वास्थ्य केंद्र पर नहीं हुई किसी की तैनाती
दुदही। जंगल विशुनपुरा गांव के गोसाईपट्टी में न्यू प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र का निर्माण कराया गया है। दो वर्ष पहले बनकर तैयार इस भवन की खिड़कियां और दरवाजे टूटने लगे हैं लेकिन न तो यहां किसी चिकित्सक को तैनात किया गया है और न ही किसी एएनएम अथवा अन्य कर्मचारी को। करीब 10 किलोमीटर की परिधि में फैला जंगल विशुनपुरा गांव 11 टोलों में है। इस गांव के पांच प्राथमिक विद्यालय, दो पंचायत भवन और 17 नालियां बनी हैं। फिर भी यहां सफाई के लिए केवल एक ही कर्मचारी नियुक्त है।
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