इंसेफेलाइटिस रोगियों के साथ भी लापरवाही

Kushinagar Updated Fri, 25 Oct 2013 05:39 AM IST
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पडरौना। इंसेफेलाइटिस से मासूमों की हो रही मौताें से जिला प्रशासन के कान खड़े हो गए हैं लेकिन संयुक्त जिला चिकित्सालय में अब भी घोर लापरवाही बरती जा रही है। बृहस्पतिवार को नाहरछपरा गांव से अपनी सात साल की बेटी को कंधे पर लिए पिता भटकता रहा। उसे बुखार होने के साथ-साथ झटके आ रहे थे लेकिन अस्पताल का चिकित्सकीय स्टॉफ उन्हें कभी इमरजेंसी, कभी पैथालॉजी तो कभी ओपीडी का चक्कर कटवा रहा था। चार घंटे के बाद बच्ची को जेई/एईएस वार्ड में भर्ती किया गया।
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संयुक्त जिला चिकित्सालय के जेई/एईएस वार्ड के पास दोपहर एक बजे मिले नाहरछपरा गांव के सुखल यादव टोला निवासी ओमप्रकाश कंधे पर अपनी बेटी शोभा को लादे हुए थे। हाथ में ड्रिप पकड़ी थी। उन्हाेंने बताया कि उनकी बेटी को दो दिन से तेज बुखार है। आज सुबह से जब झटके आने शुरू हो गए तो उसे लेकर जिला अस्पताल आया। सुबह नौ बजे पर्ची कटाकर जब ओपीडी में गया तो वहां से इमरजेंसी कक्ष में भेज दिया गया। इमरजेंसी में तैनात चिकित्सक ने खून और पेशाब जांच कराने के लिए कहा। जांच कराने के बाद फिर चिकित्सक के पास ले गया। उनके सामने जब बच्ची को झटका आने लगा तो उन्हाेंने उसे भर्ती करने के लिए भेजा। उन्होंने बताया कि इमरजेंसी से ही बच्ची को कंधे पर लादकर एक हाथ में चढ़ती ड्रिप लिए यहां आया हूं। इस वार्ड में भर्ती अपनी बच्ची के साथ बैठीं कुछ अन्य महिलाओं ने भी बताया कि समय पर मरीजों को देखा नहीं जाता है। कई बार बुलाने पर चिकित्सकीय स्टॉफ मरीज को देखने आते हैं।
क्या करते हैं चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी
संयुक्त जिला चिकित्सालय में आने वाले गंभीर रोगियों को वाहन से उतारने और स्ट्रेचर आदि पर लादकर उन्हें चिकित्सक तक पहुंचाने और वहां से वार्ड तक ले जाने के लिए वार्ड ब्वॉय और अन्य चतुर्थ श्रेणी कर्मचारियों को रखा गया है। जिला अस्पताल में अक्सर तीमारदार ही अपने साथ मरीजों को गोद या कंधे पर लादकर अथवा टांगकर उन्हें वार्ड तक ले जाते दिखाई देते हैं। यह चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी रजिस्टर लेकर मरीजों को वार्ड में शिफ्ट करा देते हैं। इसमें भी कुछ ऐसे होते हैं जो दुर्दिन में आए इन मरीज को वार्ड में शिफ्ट कराने के बदले शुकराना भी मांगते हैं।
जिला अस्पताल में भर्ती मरीज
जिला अस्पताल में बना 12 बेड का जेई/एईएस वार्ड बृहस्पतिवार को भरा पड़ा था। यहां सेवरही क्षेत्र के बड़हरा मोड़ का रहने वाला विक्की, तरयासुजान के चखनी का अर्जुन, कसया के मंगलपुर गांव का शिवबालक, विशुनपुरा के बतरौली धुरखड़वा का अमित, कसया के धर्मपुर बुजुर्ग का मोदस्सिर, जटहां के परोरही की रानी, हनुमानगंज क्षेत्र के बैराजपुर का लवकुश, नेबुआ नौरंगिया क्षेत्र के सरपतही गांव का कृष्णा, पडरौना के वाल्मीकिनगर का करन, विशुनपुरा के दुदही की सोनम, जटहां क्षेत्र के पड़री पिपरपाती का मेराज और बिहार के धनहा क्षेत्र के संतपट्टी के सोनू का इलाज चल रहा था।
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