दर्ज हुआ मुकदमा लेेकिन अब कई सवाल बाकी

Kushinagar Updated Tue, 22 Oct 2013 05:39 AM IST
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हाटा। गन्ना पेराई सत्र 2011-12 के दौरान सप्लाई टिकटों के लिए किसानों को जो परेशानी हुई थी, उसे शायद ही वे भूल सकते हैं। लंबे समय के बाद आखिरकार प्रशासन यह मानने को तैयार हुआ कि मिल प्रबंधन ने धांधली की थी। जांच के बाद मिल के जीएम के खिलाफ मुकदमा तो दर्ज हो गया है, लेकिन अभी भी कई सवालों के जवाब बाकी हैं।
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शुरुआती जांच में गन्ने की कालाबाजारी कराने में बिचौलियों और मिल प्रबंधन की सांठगांठ तो सामने आ गई हैं, लेकिन केवल मिल के जीएम के खिलाफ मुकदमा भर लिख जाने से न तोे यह जांच पूरी होती है और न ही कर्रवाई। जागरूक किसानों का कहना है कि अब पुलिस पर तफतीश में ऐसे लोगों के चेहरे से नकाब हटाने की जिम्मेदारी आ गई है, जो इस धंधे के मास्टरमाइंड रहे हैं। फर्जी गांव अवरही बी का अपने रिकॉर्ड में नाम दर्ज करने वाले इन लोगों के पास दर्जनों ऐसे बैंक खाते हैं, जिसमें इस कालाबाजारी के खरीदे गए गन्ने के लाखों रुपये भेजे गए। उनकी जांच भी जरूरी है।
बगैर खेत वालों से भी हुई थी खरीद
मिल ने किसानों का गन्ना औने-पौने दामों पर खरीदने के लिए ऐसे लोगों के नाम से भी सप्लाई पर्चियां जारी दी थीं, जिनके नाम से खेत भी नहीं था। इतना ही नहीं, ऐसे लोगों से मिल ने हजारों क्विंटल गन्ने की खरीद कर ली थी। पुलिस को इस सवाल का भी जवाब अपनी तफतीश में ढूंढनी होगी कि आखिर बगैर खेत के इन लोगों ने गन्ने उगाए कहां थे। बड़ी बात तो यह है कि वह इस बात से मुकर भी सकते क्योंकि इन गन्नों के दाम तो उनके बैंक खातों में ही गया है। जाहिर है कि ये गन्ना उन किसानों का रहा होगा, जो मिल के बिचौलियों माध्यम से उनके पास गन्ना सप्लाई पर्ची नहीं रहने की दशा में औने पौने-दामों पर खरीदा गया था। इस पूरे काम को अंजाम देने में मिल का गन्ना विभाग अहम रोल अदा कर रहा था। बिचौलियों का एक पूरा रैकेट मिल प्रबंधन के इशारे पर इस पूरे काम को अंजाम दिया था।
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