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बिना बजट गति कैसे पकड़े पायका

Kushinagar Updated Fri, 28 Dec 2012 05:30 AM IST
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पडरौना। भारत सरकार की तरफ से संचालित पंचायत युवा क्रीड़ा कार्यक्रम (पायका) धन के अभाव में ठंडी पड़ा हुआ है। विभाग को दो सत्रों से बजट न मिलने के कारण जिले में कहीं भी खेल सामग्रियां नहीं खरीदी जा सकी हैं। विभाग का कहना है कि जब तक शासन स्तर से धन अवमुक्त नहीं होता तब तक जिले में इस योजना को गति देना मुमकिन नहीं हैं।
पायका के तहत कुशीनगर जिले के 956 गांवों में क्रीड़ाश्री का चयन किया जाना है। इस कार्यक्रम के अंतर्गत ब्लाक स्तर और ग्राम स्तर पर एक-एक क्रीड़ाश्री का चयन होता है। इसमें ब्लाक स्तर के क्रीड़ाश्री को एक हजार रुपये और ग्राम स्तर के क्रीड़ाश्री को 500 रुपये विभाग की तरफ से दिया जाता है। इसके लिए 19 वर्ष से कम उम्र के बालक/बालिका ही अर्ह होते हैं। योजना में भारत सरकार 75 प्रतिशत और राज्य सरकार 25 प्रतिशत धन देती है।
विभाग के मुताबिक पायका कार्यक्रम संचालित करने के लिए एक केंद्र के अंतर्गत 4600 की आबादी होनी चाहिए। जिन गांवों की जनसंख्या कम है, वहां दो-तीन गांवों को जोड़कर केंद्र बनाया जाएगा। वित्तीय वर्ष 2009-10 में कुल 96 गांव चयनित हुए थे। इनके लिए 96 क्रीड़ाश्री का चयन किया गया था। वित्तीय वर्ष 2010-11 और 2011-12 में भी क्रीड़ाश्री का चयन होना है। इस मद में इन दोनों वित्तीय वर्ष का अब तक बजट ही विभाग को नहीं मिल सका है। इस वजह से पंचायत युवा क्रीड़ा कार्यक्रम के तहत जिले में कहीं भी खेल सामग्रियों की खरीददारी नहीं की जा सकी है।
पायका के लिए क्लस्टर बन गया है। बड़ी ग्राम सभाओं में एकल केंद्र बनाए जाएंगे। जिन गांवों की जनसंख्या 4600 से कम है, वहां दो-तीन गांवों को जोड़ा जा रहा है। केवल चयन का काम हुआ है। धन न मिलने से खेल सामग्रियां उपलब्ध नहीं हो पाई हैं। शासन से धन आने पर ही इस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया जा सकेगा।
राधेश्याम पासवान
जिला युवा कल्याण अधिकारी, कुशीनगर

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