बाघों का पता लगाने को दिया गया प्रशिक्षण

Kushinagar Updated Sun, 23 Dec 2012 05:30 AM IST
खड्डा। उत्तर प्रदेश की सीमा से सटे बिहार प्रांत के वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना में बाघों की सही संख्या का पता लगाने के लिए मदनपुर रेंज के वन कर्मचारियों को कैमरा ट्रैकिंग विधि का प्रशिक्षण दिया गया। इसके बाद इस अभ्यारण्य में बाघों की वास्तविक संख्या का सही-सही पता लगाया जा सकेगा।
उल्लेखनीय है कि वाल्मीकि व्याघ्र परियोजना का जंगल 840 वर्ग किलोमीटर फैला हुआ है। जंगल का एक सिरा नेपाल के चितवन वन उद्यान से जुड़ा है। इस रिजर्व टाइगर प्रोजेक्ट के क्षेत्र को दो हिस्सों में बांटा गया है। प्रमंडल वन में मदनपुर, वाल्मीकिनगर, हरनाटांड, गोनौली और चिउटहां के पांच रेंज आते हैं। प्रमंडल दो में रधिया, गोबरधना और मंगुरहा रेंज है। इस जंगल में बाघों की कुल कितनी संख्या है। इसके आकलन की कोई निश्चित विधि नहीं थी। शनिवार को वन विभाग की तरफ से मदनपुर वन क्षेत्र के अतिथि गृह में प्रमंडल वन के पांच क्षेत्रों के वन कर्मचारियों को कैमरा ट्रैकिंग विधि का प्रशिक्षण दिया गया। सहायक वन संरक्षक लल्लन झा और प्रोजेक्ट अफसर कमलेश मौर्या ने प्रशिक्षण दिया। इस संबंध में प्रोजेक्ट के सह निदेशक/सीएफ संतोष तिवारी ने बताया कि एक आकलन के मुताबिक इस जंगल में बाघों की संख्या 15 से 18 के बीच है। फिर भी नई विधि से इसका सही-सही आकलन हो जाएगा।

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