मिल के पेराई सत्र पर ऊहापोह शुरू

Kushinagar Updated Fri, 14 Dec 2012 05:30 AM IST
पडरौना। पिछले 15 साल से पडरौना चीनी मिल केवल चालू होने और बंद होने की कहानी बनकर रह गई है। इस साल फिर मिल चलने की उम्मीदें धूमिल पड़ गई हैं। हालांकि मिल प्रबंधन ने बृहस्पतिवार को पेराई सत्र शुरू कराने के लिए पूजा करवा दी और मिल प्रबंधन दावा कर रहा है कि 15 दिसंबर से पेराई सत्र शुरू हो जाएगा।
कपड़ा मंत्रालय केंद्र सरकार के अधीन आने वाले कानपुर शुगर वर्क्स लिमिटेड की दो चीनी मिलें पडरौना और कठकुइयां वर्ष 1996-97 तक सर्वाधिक फायदा देने वाली मिलों में शुमार थीं परंतु गन्ना मूल्य बकाया ने इनकी हालत खराब कर दी। दोनों मिलें वर्ष 1998 में बंद हो गईं। बीएफआईआर से इस मिल को चलवाने का अनुबंध गंगोत्री इंटरप्राइजेज को मिला। मिल चलवाने की मांग को लेकर वर्ष 2001 में नगर के छुछिया गेट पर 16 दिन तक किसानों और मजदूरों ने आंदोलन किया। भूलन नामक युवक पुलिस की गोली का शिकार हो गया। इसके बाद पडरौना में प्रदेश से राष्ट्रीय स्तर के नेता आए। कांग्रेस की राष्ट्रीय अध्यक्ष सोनिया गांधी भी भूलन के घर पहुंचीं। वर्ष 2005 में मिल चलवाने का अनुबंध जेएचवी ग्रुप को मिला। लगा कि हालत सुधर जाएगी परंतु अगले सत्र में मिल की स्थिति खराब हो गई। पेराई सत्र देर से शुरू होने और गन्ना मूल्य भुगतान न कर पाने के चलते मिल एक महीने से भी कम चली। नो केन के चलते मिल बंद हो गई। अगले साल मिल चली लेकिन स्थिति जस की तस रही। अगले साल मिल समय से चलने की उम्मीद थी लेकिन पुरानी ही कहानी दोहराई गई। वर्ष 2009-10 में मिलों का पेराई सत्र देर से शुरू होने और गन्ना संकट पैदा होने के बाद सभी मिलों की तरह पडरौना चीनी मिल ने भी किसानों को गेट पेमेंट दिया। इस साल किसानों ने मिल को गन्ना दिया, लेकिन अगले साल फिर हालत खराब हो गई। मिल की सबसे बुरी गति वर्तमान पेराई सत्र की है। अन्य चीनी मिलों के लिए जब गन्ना सुरक्षण प्रस्ताव आया तो पडरौना चीनी मिल के होम जोन को छोड़कर बाकी गन्ना पहले ही दूसरी मिलों को एलाट कर दिया गया। उधर, मिल की परिसंपत्तियों को बंधक रखकर पंजाब बैंक ने जो कर्ज दिया था, उसकी वसूली के लिए मिल नीलाम करने का नोटिस जारी कर दिया। रही सही कसर इस हफ्ते गन्ना विभाग ने पूरी कर दी। अब इस मिल के होम जोन को 14 केंद्र बनाकर 10 सेंटर ढाढ़ा चीनी मिल को, तीन सेंटर कप्तानगंज चीनी मिल को एक सेंटर रामकोला के पंजाब चीनी मिल को देने का प्रस्ताव कर दिया।
मिल प्रबंधन की भी रुचि नहीं
पडरौना केन यूनियन के चेयरमैन मृत्युंजय मिश्र का कहना है कि खुद मिल प्रबंधन भी इस मिल को चालू करने को लेकर उत्साहित नहीं है। मजबूरन यहां का गन्ना दूसरी मिलों को आवंटित हो रहा है।
मामला शासन स्तर पर लंबित
जिला गन्ना अधिकारी का कहना है कि गन्ना आवंटन का प्रस्ताव शासन स्तर पर लंबित है। सरकार का प्रयास है कि मिल चलवाई जाए लेकिन अगर बात नहीं बनी तो दूसरे विकल्पों पर विचार होगा। वैसे जब तक बकाया भुगतान नहीं होता, तब तक मिल के चलने या न चलने को लेकर कुछ भी कहा नहीं जा सकता।
प्रशासन सहयोग नहीं कर रहा है
जेएचवी शुगर मिल पडरौना के महाप्रबंधक राकेश शर्मा का कहना है कि मिल प्रबंधन किसानों का तीन करोड़ रुपये 15 दिसंबर तक भुगतान कर देगा। मिल पेराई सत्र शुरू करने के लिए तैयार है। महाप्रबंधक के मुताबिक प्रशासन ने उनके क्षेत्र का अधिकांश गन्ना दूसरी चीनी मिलों को एलाट कर दिया है। इस संदर्भ में शासन को कई बार पत्र लिखा गया है। केवल होम जोन के भरोसे मिल चलाना मुश्किल है। फिर भी 15 दिसंबर से पेराई सत्र शुरू करा दिया जाएगा।

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