कानून व्यवस्था के लिए चुनौती बने हादसे

Kushinagar Updated Wed, 12 Dec 2012 05:30 AM IST
पडरौना। राष्ट्रीय राजमार्ग 28 के फोरलेन में परिवर्तित होने के बाद हादसों की संख्या में वृद्धि हो गई है। स्थिति यह है कि जनपद में 60 किलोमीटर लंबे इस फोरलेन पर हर साल 100 हादसे हो रहे हैं। इनमें मरने वालों की संख्या भी 70 से 80 के बीच है। इसके अलावा हर साल 40 से ज्यादा लोग गंभीर रूप से घायल होते हैं। लगातार हो रहे ये हादसे अब कानून व्यवस्था के लिए गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं।
यातायात विभाग के पास उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक फोरलेन पर कुशीनगर जनपद की सीमा के भीतर वर्ष 2009 में हादसों के कुल 95 मामले दर्ज हुए, जिनमें 68 की मौत हो गई जबकि 40 लोग घायल हुए। वर्ष 2010 हादसों की संख्या 108 हो गई, जिनमें 76 लोगों की मौत हुई तथा 45 लोग घायल हुए। वर्ष 2011 में कुल 100 हादसे दर्ज हुए, जिनमें 68 लोगों की जान गई और 46 लोग घायल हो गए। वर्ष 2012 में 31 जुलाई तक ही हादसों की संख्या 95 तक पहुंच गई। इनमें 52 लोगों की मौत हुई और 42 लोग घायल हुए। स्थिति यह हो गई है कि अब कोई ऐसा हफ्ता नहीं गुजर रहा है, जिसमें तमकुहीराज से सुकरौली तक लगभग 60 किलोमीटर की दूरी के बीच कोई बड़ी दुर्घटना न हो। कहीं चालक की लापरवाही तो कहीं यात्रियों की गलती से हो रहे ये हादसे अब तो कानून-व्यवस्था के लिए भी गंभीर चुनौती बनते जा रहे हैं। दो महीने पहले कुशीनगर तिराहे पर हुए ऐसे ही एक हादसे के बाद नाराज लोगों ने तीन घंटे तक हाईवे जाम कर बवाल किया था। स्थिति संभालने के लिए आधा दर्जन थानों की फोर्स के अलावा पीएसी तक लगानी पड़ी थी। दो दिन पहले हाटा कोतवाली अंतर्गत ढाढ़ा चौराहे पर एक अंडा विक्रेता की हादसे में हुई मौत के बाद भी बवाल हो गया था, जिसमें एक सिपाही का सिर फूट गया और कोतवाल की गाड़ी का शीशा टूट गया। तीन साल पहले हेतिमपुर में हुए हादसे के बाद लोगों ने तोड़फोड़ और आगजनी कर दी थी। मौके पर स्थिति संभालने के लिए कुशीनगर के अलावा पड़ोसी जनपद देवरिया से भी फोर्स मंगानी पड़ी थी।
हाईवे पर नहीं है कोई सुविधा
पडरौना। फोरलेन पर होने वाले हादसों के बाद हर बार एक ही समस्या सामने आती है कि घायलों को तत्काल अस्पताल पहुंचाने का कोई बंदोबस्त नहीं है। इसके अलावा हाईवे पेट्रोल का भी इंतजाम नहीं है। इसके चलते जब भी फोरलेन पर कोई हादसा होता है तो न तो समय से एंबुलेंस मिलती है न ही पुलिस पहुंच पाती है। इससे लोगों का गुस्सा भड़कता है और बवाल के चलते कानून-व्यवस्था के लिए गंभीर संकट पैदा हो जाता है।

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