कुशीनगर को रेलमार्ग से जोड़ने की आस बढ़ी

Kushinagar Updated Sat, 08 Dec 2012 05:30 AM IST
कसया। बौद्ध तीर्थस्थली कुशीनगर को रेल मार्ग से जोड़ने के प्रयास तो वर्ष 1974 से हो रहे हैं, लेकिन बात नहीं बन पाई। परंतु अब मैत्रेय परियोजना व इंटरनेशनल एयरपोर्ट के निर्माण का रास्ता साफ होने के बाद कुशीनगर के रेल मार्ग से जुड़ने की लोगों संभावना प्रबल हो गई है।
बुद्ध की महापरिनिर्वाण स्थली को रेलमार्ग से जोड़ने की मांग आजादी के बाद से ही लोग करते आ रहे हैं। ब्रिटिश काल में गोरखपुर से सरदारनगर होते हुए हेतिमपुर तक एक रेल लाइन बिछी थी, जिसका उपयोग सरदारनगर चीनी मिल के लिए गन्ना ढुुलाई में होता था। लोग इसी लाइन को कुशीनगर तक बढ़ाने की मांग भी करते रहे हैं। कुशीनगर इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना की मदर कंपनी आईएलएफएस इंफास्ट्रक्चर की सर्वे रिपोर्ट में हेतिमपुर को कुशीनगर का सबसे नजदीकी रेलवे स्टेशन बताया गया है, जो कुशीनगर से 6 किलोमीटर दक्षिणी पश्चिम दिशा में स्थित है। कुशीनगर के अंतर्राष्ट्रीय महत्व को देखते हुए वर्ष 1974 में तत्कालीन केंद्रीय रेल मंत्री पं. कमलापति त्रिपाठी ने रेल बजट में सर्वे का बजटीय प्राविधान कराया था। उस समय छितौनी-कुशीनगर-देवरिया रेल लाइन के निर्माण की लागत 33 करोड़ रुपये आंकी गई थी। किंतु यह सर्वे फाइलों में रह गया। वर्ष 2004 में कुशीनगर की यात्रा पर आये तत्कालीन उप प्रधानमंत्री लालकृष्ण आडवाणी ने कुशीनगर को रेल पथ से जोड़ने में दिलचस्पी दिखाई किंतु तत्काल बाद हुए लोकसभा चुनाव में उनकी सरकार चली गई। तीसरी बार वर्ष 2006 में धनहां (बिहार) के विधायक राजेश सिंह के प्रयासों से तत्कालीन रेल मंत्री लालू प्रसाद यादव ने सर्वे कराया तो पडरौना-कुशीनगर की 25 किलोमीटर लंबी रेल लाइन के लिए 110 करोड़ रुपये की लागत आंकी गई। वर्ष 2009 में कुशीनगर से सांसद चुने गए कुंवर आरपीएन सिंह के केंद्र सरकार में राज्यमंत्री होते ही जनता की उम्मीदें बढ़ गईं। राज्य मंत्री ने प्रयास भी किया और मामले को पिछले रेल बजट में सर्वे तक ले आए किंतु ठोस परिणाम नहीं निकला। परंतु इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना के रफ्तार पकड़ने और मैत्रेय परियोजना में भूमि अधिग्रहण का रास्ता साफ होने के बाद यह रेल रूट फिर चर्चा में है। लोगों को उम्मीद है कि अबकी जरूर सरकार कुशीनगर को रेल लाइन से जोड़ने की दिशा में कारगर कदम उठाएगी। अभी तक कुशीनगर आने वाले पर्यटक वाराणसी व गोरखपुर तक रेल मार्ग से आते हैं और उसके बाद सड़क मार्ग से कुशीनगर व बौद्ध सर्किट के श्रावस्ती, लुंबिनी व कपिलवस्तु की यात्रा पूरी करते हैं। कुशीनगर के नाम पर रेल मंत्रालय गोरखपुर व मुंबई के बीच कुशीनगर एक्सप्रेस व महापरिनिर्वाण स्पेशल रेल चला रहा है किंतु धरातल पर कुशीनगर में रेल लाइन का नामोनिशान तक नहीं है। इस संबंध में हार्डवेयर व्यवसायी अशोक कुमार विश्वकर्मा, रेडीमेड कपड़ा कारोबारी विशाल गुप्ता, भिक्षु बोध्यांग गौतम, रामप्यारे प्रसाद एडवोकेट, सभासद राजेश मद्धेशिया का कहना है कि मैत्रेय परियोजना और इंटरनेशनल एयरपोर्ट के मामले में प्रगति देखते हुए कुशीनगर के रेलमार्ग से जुड़ने की उम्मीद बढ़ गई है।

नहीं हो रहा रेल लाइन का उपयोग
कुशीनगर से 5 किलोमीटर दूर हेतिमपुर से सरदारनगर तक नैरो गेज रेललाइन बिछी हुई है। सरदारनगर गोरखपुर-देवरिया रेलवे स्टेशनों के बीच स्थित है। किंतु कई सालों से इस नैरो गेज रेल लाइन का उपयोग बंद पड़ा है। सरकार चाहे तो इस लाइन का अधिग्रहण कर कुशीनगर को आसानी से रेल लाइन से जोड़ सकती है।
अनिरुद्ध सिंह नगर अध्यक्ष, उत्तर प्रदेश उद्योग व्यापार मंडल कसया।

कुशीनगर के रेललाइन से जुड़ने से केवल पर्यटक विकास ही नहीं, बल्कि औद्योगिक व व्यापारिक विकास भी होगा। कुशीनगर को रेल लाइन से जोड़ना समय की मांग भी है और अपरिहार्य भी।
डा. अनिल कुमार सिन्हा, सामाजिक कार्यकर्ता,कसया



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