गन्ना क्रशरों पर बेचने को किसान मजबूर

Kushinagar Updated Mon, 03 Dec 2012 05:30 AM IST
रामकोला। किसान गलत सट्टा नीति और चीनी मिलाें का पेराई सत्र देर से शुरू होने के चलते अपना गन्ना क्रशरों पर बेचने को मजबूर हैं। बेसिक कोटा निर्धारण में होने वाली गलती के चलते या तो किसान पेराई सत्र के अंतिम दिनों तक सप्लाई फ्री होने का इंतजार करें या औने-पौने दाम पर अपना गन्ना क्रशरों पर ही बेचें।
कुशीनगर जनपद में गन्ना किसानों की लाइफ लाइन है। हाड़ कंपाती ठंड और चिलचिलाती धूप सहन करके किसान इस उम्मीद के साथ गन्ना पैदा करते हैं कि इसके एकमुश्त रकम से वह बेटे-बेटी की शादी आर अन्य जरूरी काम कर सकेंगे। परंतु मिलों का पेराई सत्र शुरू होने में देरी और गलत सट्टा नीति ने किसानों की इस उम्मीद पर पानी फेर दिया है। बता दें कि जनपद में एक तिहाई किसान अपना गन्ना नवंबर के पहले से दूसरे सप्ताह तक बेचकर उसी खेत में गेहूं बोते हैं। मिलों के देर से चलने के चलते मजबूर किसान जल्दी-जल्दी क्रशरों पर ही गन्ना बेचकर खेत खाली करते हैं। कार्तिक में किसानों को खेती करने के लिए पैसों का प्रबंध नहीं दिखता है तो भी वे अपना गन्ना क्रशर वालों के हाथ बेचने को मजबूर हो जाते हैं, क्याेंकि गन्ना आवंटन के बाद भी चीनी मिलें किसानों को एडवांस नहीं देती हैं। खाली हाथ किसान खेती कैसे करेंगे। इसके अलावा तीसरी बड़ी समस्या गन्ना सट्टा नीति के चलते आती है। सट्टा गन्ना आयुक्त के निर्देशानुसार बनता है, इसलिए जिस किसान का गन्ना सट्टे से अधिक होता है वे किसान भी अपना गन्ना क्रशरों पर बेच देते हैं।

औसत पर बनता बेसिक कोटा
रामकोला। हर साल शासन की तरफ से सट्टा नीति बनती है, जिनके अनुरूप ही किसानों को चीनी मिलों की तरफ से सप्लाई टिकट मिलती है। इस साल जो नीति बनी है, उसके हिसाब से पिछले तीन वर्षों में जिस किसान ने जितना गन्ना मिल को सप्लाई किया है, उस टोटल का औसत निकालकर उनका बेसिक कोटा बनेगा। जैसे अगर किसी किसान ने पिछले तीन साल तक लगातार सौ-सौ कुंतल गन्ना मिल को सप्लाई किया है तो तीन साल का कुल मिलाकर तीन सौ कुंतल का औसत सौ कुंतल हुआ, जो उस किसान का बेसिक कोटा होगा। अब इस बेसिक कोटे के आधार पर सप्लाई टिकट का निर्धारण होगा। इसमें भी पेंच यह है कि कि मिल तक गन्ना ले जानी वाली गाड़ियों के लिए अलग-अलग वजन निर्धारित है। किसान का सट्टा जिस तरह के वाहन का होगा, सप्लाई टिकट भी उसी हिसाब से मिलेगी। मिल प्रबंधन के अनुसार इस साल बुग्गी (बैलगाड़ी) व ट्रेलर पर 30 कुंतल, टीटू (दो चक्का वाली ट्राली) पर 60 कुंतल और ट्राली पर 75 कुंतल गन्ना तौल होगा। मठिया धीर निवासी सुन्नर बताते हैं कि इनके पास 12 टायर (बुग्गी) गन्ना है लेकिन खाता महज दो टायर का बना है। विशुनपुरा खुर्द के पुर्नवासी के पास भी 18 टायर गन्ना है लेकिन खाता महज छह टायर का है। मोरवन के सुरेश और पिड़ारी भोदसी के बबलू यादव बताते हैं कि गलत सट्टा नीति के चलते उन्हें जरूरत भर का सप्लाई टिकट ही नहीं मिलता, जिसके चलते मिलों के चलने के दौरान भी गन्ना क्रशरों पर बेचना पड़ता है।



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