मुआवजे की रकम का सदुपयोग करेंगे

Kushinagar Updated Sat, 01 Dec 2012 12:00 PM IST
कसया। मैत्रेय परियोजना में जमीनों के अधिग्रहण में मिल रहे मुआवजे की रकम के सदुपयोग के लिए किसान चिंतित हैं। किसानों का कहना है कि जमीन तो हाथ से निकल गई, किंतु का रकम इस तरह हो, ताकि भविष्य में जमीन की कमी न खले। कई किसान जमीन के बदले जमीन खरीदने की योजना बना रहे हैं, जबकि कुछ बच्चों को पढ़ाने व बेटियों के हाथ पीले करने की इच्छा रखते हैं। किसानों से उनकी योजनाओं को लेकर अमर उजाला ने रायशुमारी की।
किसान अश्वनी मणि त्रिपाठी को एक बीघा जमीन के एवज मेें 28 लाख रुपये मिल रहे हैं। इनका कहना है कि जमीन खरीदेंगे और बेटी की शादी में खर्च करेंगे, ताकि जमीन जाने का अफसोस न रहे। किसान रामजीत सिंह का कहना है कि मुआवजे की रकम मिलते ही परिवार के लोगों के साथ मिल-जुल कर तय करेंगे कि क्या करना है? इनकी तीन बीघा जमीन परियोजना में जा रही है। फल व्यवसायी राजेश कुमार मद्धेशिया की 14 डिस्मिल जमीन परियोजना में अधिग्रहित हुई है। मुआवजे की रकम के बारे में इनका कहना रहा कि व्यापार में व बच्चों के बेहतर भविष्य के लिए खर्च करेंगे। किसान पप्पू सोनकर की भी 60 डिस्मिल जमीन परियोजना में जा रही है। इन्होंने कहीं जमीन खरीदने की बात कही है। इन्हाेंने जमीन देख भी ली है और बयाना भी दे दिया है।

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