आसमान छू रहे जमीन के दाम

Kushinagar Updated Sat, 24 Nov 2012 12:00 PM IST
कसया। मैत्रेय प्रोजेक्ट की घोषणा से लेकर अब तक कुशीनगर व कसया समेत आसपास के गांवों में जमीन की कीमतों में दस गुना की बढ़ोत्तरी हो चुकी है। इस दौरान निबंधन विभाग ने भी जमीन के सर्किल रेट में करीब 300 प्रतिशत की बढ़ोत्तरी कर भारी राजस्व अर्जित किया।
मैत्रेय परियोजना के लिये वर्ष 2004 में जब अधिसूचना जारी की गई तो कसया में जमीन का सर्किल रेट 600 से लेकर 1700 रुपये प्रति वर्ग मीटर था, जो वर्तमान में बढ़ते-बढ़ते 1800 से 5100 प्रति वर्गमीटर हो चुका है। निबंधन विभाग ने कसया से सटे गांवों अनिरुद्धवां, गोपालगढ़, झुगवां, विशुनपुर विंदवलिया, भरौली, भलुही, मथौली, सबयां को अर्ध शहरी क्षेत्र मानकर यहां भी शहरी क्षेत्र के समान सर्किल रेट तय कर दिया। इन गांवाें की जमीन की स्थिति के अनुसार 3000 से लेकर 4800 रुपये प्रति वर्गमीटर तक का सर्किल रेट लिया जा रहा है। वर्ष 2003 में इन गांवों की जमीन का सर्किल रेट 700 से लेकर 1200 रुपये प्रति वर्गमीटर तक था। सर्किल रेट चाहे जो हो, वर्तमान में जमीन बाजार मूल्य के हिसाब से 5000 से लेेकर 6200 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से बिक रही हैं। यही जमीन मैत्रेय व इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना की लांचिंग के पूर्व 500 से लेकर 700 रुपये प्रति वर्गमीटर के हिसाब से बिकती थीं। प्रापर्टी डीलराें की मानें तो लखनऊ के नवविकसित क्षेत्रों में 4000 से लेकर 5000 रुपये प्रति वर्गमीटर की दर से जमीन बिक रही है। मैत्रेय परियोजना की लांचिंग के बाद तो आवासीय जमीन 2500 रुपये प्रति वर्गमीटर तक लोगों का मिल जाया करती थीं, लेकिन वर्ष 2010 में इंटरनेशनल एयरपोर्ट परियोजना की लांचिंग के बाद जमीन के दाम मुंहमांगे हो गये। विशेषकर कुशीनगर में पर्यटन आधारित सुविधाओं जैसे होटल, मेडिटेशन सेंटर आदि के लिये जमीन की मांग दरोें में वृद्धि करने में सहायक सिद्ध हुई है।

दरअसल दोनों ही परियोजनाओं के आने के बाद बाहरी क्षेत्र के लोगों खासकर बिहार, अगल-बगल के जनपदों व खाड़ी देशों में रोजगार से पैसा कमाने वाले लोग कुशीनगर की ओर आकर्षित हुए हैं। यही कारण है कि जमीन के दाम लगातार बढ़ रहे हैं।
मणिशंकर दूबे-अधिवक्ता राजस्व

वर्ष 2003 से लेकर अब तक जमीन का बाजार मूल्य 10 गुना दाम बढ़ने की बात सही है। परियोजनाओं के चलते लोग कुशीनगर में बसने व व्यापार करने की इच्छा से जमीनें खरीदना चाहते हैं। जमीनें कम हैं और खरीददार ज्यादा। इससे जमीन के बाजार मूल्य बढ़ रहे हैं।
रामानंद सिंह, सहायक महानिरीक्षक निबंधन

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