लोकायुक्त जांच शुरू होने से जिले में हलचल

Kushinagar Updated Thu, 08 Nov 2012 12:00 PM IST
पडरौना (कुशीनगर)। उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम क्षेत्र की बिकी चीनी मिलों के मामले में लोकायुक्त की जांच शुरू होने से कुशीनगर जनपद में भी हलचल है। बिकने के बाद भी बंद पड़ी रामकोला खेतान, लक्ष्मीगंज और छितौनी चीनी मिल के भी जांच की उम्मीद से गन्ना किसानों के साथ-साथ किसान और मजदूर नेता भी उत्साहित हैं। सभी को उम्मीद है कि इस जांच से न केवल एक बड़े घपले का खुलासा हो सकेगा, बल्कि चीनी मिलों के दुबारा चलने की उम्मीद भी बलवती होगी।
आजादी से पूर्व देवरिया जनपद में 14 चीनी मिलें लगी थीं। वर्ष 1994 में देवरिया से अलग होकर जब कुशीनगर जनपद अस्तित्व में आया तो इस जिले के हिस्से में कुल नौ चीनी मिलें आयीं। इनमें से खड्डा, छितौनी, रामकोला खेतान और लक्ष्मीगंज चीनी उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के अधीन थीं, जबकि पडरौना और कठकुइयां की चीनी मिल कपड़ा मंत्रालय भारत सरकार के नियंत्रण में थीं। इसके अलावा कप्तानगंज, रामकोला पंजाब और सेवरही चीनी मिल प्राइवेट सेक्टर की थीं। जिला बनने के महज दो साल बाद ही इन चीनी मिलों पर संकट के बादल गहराने लगे और एक-एक कर छितौनी, पडरौना, कठकुइयां, लक्ष्मीगंज और रामकोला खेतान चीनी मिल बंद हो गई। पिछली बसपा सरकार ने उत्तर प्रदेश राज्य चीनी निगम के अधीन आने वाली छितौनी, खड्डा, रामकोला खेतान और लक्ष्मीगंज चीनी मिल बेच दिया था। इनमें से केवल खड्डा चीनी मिल ही 22 करोड़ 05 लाख रुपये में इंडियन पोटाश लिमिटेड को बेची गई थी। बाकी तीन मिलें 05 करोड़ रुपये से भी कम कीमत पर ऐसे हाथों में बेच दी गई, जिन्होंने मिल दुबारा चालू करने में कोई रुचि ही नहीं दिखाई। अब जबकि प्रदेश सरकार ने इन चीनी मिलों की बिक्री पर लोकायुक्त की जांच बैठाई है, तब फिर से गन्ना किसानों और इन मिलों की बिक्री का विरोध कर रहे लोगों में उम्मीद की किरण जगी है। छितौनी चीनी मिल संघर्ष समिति के अध्यक्ष डा. जवाहर लाल चौरसिया के मुताबिक मिल बिकने के वक्त भी उन लोगों ने इस पर विरोध दर्ज कराया था। सरकार ने लोकायुक्त की जांच बैठाकर किसानों और कर्मचारियों की शंकाओं व समस्याओं को गंभीरता से समझा है। इनके मुताबिक जांच में बड़े घपले का खुलासा होगा। इसी तरह लक्ष्मीगंज चीनी मिल को चलवाने के लिए संघर्ष करने वाले किसान नेता राधेश्याम पासवान को भी उम्मीद है कि लोकायुक्त की जांच से इन चीनी मिलों की बिक्री में हुए घपले का खुलासा होगा। राधेश्याम तो दिवाली बाद इस चीनी मिल को चालू कराने के लिए आंदोलन की तैयारी में भी लगे हैं। इनका कहना है कि प्रदेश सरकार ने सत्ता में आने पर बंद चीनी मिलों को चलाने का आश्वासन दिया था। आंदोलन में उस आश्वासन को पूरा कराने की मांग होगी। गन्ना किसान अरुण प्रताप सिंह भी इस जांच से उत्साहित हैं। इनके मुताबिक इस तरह मिलें बेच दिए जाने से गन्ना किसान हतोत्साहित हो गए थे। मिल बंद होने से इस क्षेत्र के गन्ना किसानों को गड़ौरा व ढाढ़ा जाना पड़ता है।

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