चीनी मिलों में नहीं शुरू हुई पेराई

Kushinagar Updated Sun, 04 Nov 2012 12:00 PM IST
पडरौना। कुशीनगर जनपद के गन्ना किसानों की दुश्वारियों का अंत इस साल भी होता नहीं दिख रहा है। स्थिति यह है कि नवंबर माह का तीन दिन बीत जाने के बाद भी जिले की एक भी चीनी मिल का पेराई सत्र शुरू नहीं हुआ। गन्ना विभाग के लोगों के अनुसार 15 नवंबर के बाद ही पेराई शुरू होगी। उधर, सरकार ने अभी तक गन्ने का मूल्य भी घोषित नहीं किया है। किसान गन्ना क्रशर पर बेचने को मजबूर हैं। क्रशर मालिक भी गन्ने का वाजिब मूल्य नहीं दे रहे हैं।
कुशीनगर जनपद के किसानों के लिए गन्ना एकमात्र नगदी फसल है। गन्ना बेचकर किसान रबी की बुवाई से लेकर बेटे-बेटियों की शादी तक करते हैं। बच्चों की पढ़ाई-लिखाई और घर के अन्य कई महत्वपूर्ण कार्य भी इसी के भरोसे होते हैं। उपज को देखते हुए ही आजादी के पहले ही इस क्षेत्र में चीनी मिलें स्थापित हो गई थीं। जिला बनने के वक्त कप्तानगंज, लक्ष्मीगंज, रामकोला, खड्डा, छितौनी, पडरौना, कठकुईयां और सेवरही में सरकारी-प्राइवेट मिलाकर कुल 09 चीनी मिलें यहां चालू हालत में थीं। वर्ष 2004 में हाटा में एक और नई चीनी मिल लगी। लेकिन वर्तमान में इन दस में से केवल प्राइवेट सेक्टर की छह चीनी मिलें हाटा, कप्तानगंज, रामकोला पंजाब, खड्डा, पडरौना और सेवरही ही चालू हालत में है। इनमें भी पडरौना की स्थिति पिछले कई साल से डांवाडोल ही चल रही है।
इस साल भी जिले में करीब 92000 हेक्टेयर क्षेत्रफल में गन्ने की खेती की गई है। इनमें से एक तिहाई किसान ऐसे हैं, जिन्हें गन्ना काटकर अपने खेतों में गेहूं बोना है। परंतु इन छह में से एक भी चीनी मिल का पेराई सत्र अब तक शुरू ही नहीं हो पाया है। गन्ना विभाग से जुड़े लोगों की मानें तो सभी चीनी मिलें 15 नवंबर के बाद शुरू होंगीं। चीनी मिलें चालू न होने से परेशान किसानों के लिए अब क्रशर ही एकमात्र विकल्प बचे हैं। यहां यह बता दें कि जब चीनी मिलों का पेराई सत्र शुरू होता है तो क्रशर मालिक भी अधिक से अधिक गन्ना खरीदने की कोशिश करते हैं। किसानों को लुभाने के लिए क्रशर मालिक सरकार के घोषित रेट के बराबर दाम देते हैं। पिछले तीन सालों से तो मिल प्रबंधन और क्रशर मालिकों के बीच अधिक से अधिक गन्ना खरीदने को लेकर होड़ लग रही है, जिसके चलते पिछले साल गन्ने का रेट तीन सौ रुपये प्रति कुंटल तक पहुंच गया था जबकि सरकारी रेट 220 रुपये प्रति कुंटल ही था। परंतु यह तभी संभव है, जबकि मिलें चालू हों। देर से पेराई सत्र शुरू होने पर एक तो मिलों को पर्याप्त मात्रा में गन्ना नहीं मिलता, जिसके चलते उन्हें घाटा उठाना पड़ता है और पेराई सत्र भी समय से पहले समाप्त हो जाता है, दूसरे गन्ना किसानों को भी रेट का नुकसान उठाना पड़ता है। मिठहा माफी गांव निवासी रूदल यादव, ढोरही निवासी मुन्नी कुशवाहा, रोंआरी निवासी मंकेश्वर शुक्ल और परगनछपरा निवासी त्रियुगी यादव आदि का कहना है कि चीनी मिलें चालू न होने के चलते क्रशर मालिक 190 से 200 रुपये प्रति कुंटल के भाव ही गन्ना खरीद रहे हैं।

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