सड़े गेहूं के मामले की जांच शुरू

Kushinagar Updated Sat, 13 Oct 2012 12:00 PM IST
रामकोला। बंद चीनी मिल के गोदाम में सड़े सैकड़ों कुंटल गेहूं सड़ने के मामले को डीएम ने गंभीरता से लिया है। शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ ने मौके पर पहुंचकर जांच की। सूत्रों के अनुसार एफसीआई गोरखपुर से भी एक टीम को जांच का जिम्मा सौंपा गया है। यह टीम जांच कर सड़े अनाज का आंकलन करेगी तथा सड़ने के कारणों का पता भी लगाएगी। शुक्रवार को चीनी मिल के स्प्रे पौंड जाने वाली नाली में भी बड़ी मात्रा में सड़ा गेहूं फेंका पाया गया। दिन के लगभग दो बजे तक गोदाम का ताला नहीं खुला था, जिसके कारण निकासी बंद रही। जबकि बाहर ट्रकों की लाइन लगी हुई थी।
रामकोला की बंद पड़ी खेतान चीनी मिल के चीनी गोदाम में 30 हजार कुंटल गेहूं रखा गया था। बृहस्पतिवार को चीनी मिल के गोदाम से राशन की निकासी हो रही थी। इसी बीच बगल में ही सैकड़ों कुंटल सड़ा गेहूं फेंका पाया गया था। इस मामले को गंभीरता से लेते हुए डीएम रिग्जियान सैंफिल ने शुक्रवार को डिप्टी आरएमओ रूपेश सिंह को जांच के लिए भेजा। गोदाम पर पहुंचने के बाद रूपेश सिंह ने कहा कि यहां नालियों में भी गेहूं फेंका गया है। कितना गेहूं सड़ा होगा, इसका सही आंकलन गोदाम खुलने के बाद ही होगा। लेकिन जिस तरह से गेहूं गहरी नाली में देखने को मिला है, उससे यह जरूर तय है कि काफी मात्रा में गेहूं सड़ा होगा। सूत्रों के अनुसार बृहस्पतिवार की रात गोदाम के बगल में सड़े गेहूं को ठिकाने लगाया गया। शुक्रवार को जब चीनी मिल की नाली में गेहूं देखा गया तो हड़कंप मच गया। बताया जाता है कि जांच के लिए एफसीआई गोरखपुर से एक टीम गठित की गई है। लेकिन समाचार लिखे जाने तक टीम अभी रामकोला गोदाम पर नहीं पहुंची थी। इस संबंध में डीएम रिग्जियान सैंफिल ने बताया कि डिप्टी आरएमओ को जांच की जिम्मेदारी दी गई है।


गेहूं सड़ने को कौन जिम्मेदार
पहले भी मिल के गोदाम में रखा जा चुका है राशन
एफसीआई के अफसर करते रहते हैं मानीटरिंग
छत से पानी टपकता तो ऊपर का गेहूं सड़ता
अमर उजाला नेटवर्क
रामकोला। चीनी मिल के गोदाम में रखे गेहूं सड़ने के लिए जिम्मेदार आखिर कौन है? राशन के सुरक्षित भंडारण के लिए भारत सरकार मोटी रकम खर्च करती है। फिर भी इनका सड़ना सीधी लापरवाही की ओर ही इशारा करता है। क्योंकि गोदामों में रखे राशन की मानीटरिंग एफसीआई के अफसर हर महीने करते हैं।
मिली जानकारी के अनुसार एफसीआई खरीद किया हुआ राशन स्टेट बेयरर हाउस के माध्यम से गोदामों में रखवाता है। इसके लिए एफसीआई इनको किराया तथा रख रखाव के लिए रकम देता है। यही नहीं, इसके रखरखाव के लिए एफसीआई दवाओं का प्रबंध भी करता है। सूत्र यहां तक बताते हैं कि इन गोदामों के अनाजों को सुरक्षित रखने के लिए बंगलौर से दवाएं भी मंगवाई जाती हैं। सुरक्षित रखरखाव के लिए विभाग में टीए (टेक्निकल एडवाइजर) भी रखे गए हैं। यही टीए गोदामों का चयन भी करते हैं। जांच टीम में भी टीए के आने की बात कही जा रही है। विभागीय सूत्रों के अनुसार टीए ही आंकलन कर बताएंगे कि कितना गेहूं सड़ा और क्यों सड़ा? बताते चलें कि इसके पूर्व भी इसी गोदाम में गेहूं रखा गया था, लेकिन उस वर्ष गोदाम में गेहूं नहीं सड़ा था। कुछ जिम्मेदार लोग इसके लिए गोदाम की छत को जर्जर होना बता रहे हैं। लेकिन जाहिर सी बात है कि यदि छत से पानी टपकता तो निश्चित रूप से ऊपरी हिस्से का गेहूं सड़ता। गोदाम के अगल-बगल जलनिकासी के लिए कोई नाली नहीं है। गोदाम भी चीनी मिल के बीच में है, जहां उफनाई नालियों का पानी पहुंचता ही नहीं।

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