शहर में सड़क ही बन गए हैं पार्किंग स्थल

Kushinagar Updated Thu, 11 Oct 2012 12:00 PM IST
पडरौना। शायद ही पडरौना का कोई ऐसा शहरवासी होगा जो पिछले कुछ वर्षों से 24 घंटे में कम से कम एक बार जाम का शिकार न बना हो। पडरौना शहर में आने-जाने तथा रहने वालों के लिए जाम स्थायी समस्या बन गई है। समस्या से शहर का कोई हिस्सा अछूता नहीं रह गया है। हालांकि, शासन प्रशासन कई बार शहर को जाम से निजात दिलाने के लिए प्रयास कर चुका है, लेकिन हर बार चार दिन की चांदनी फिर अंधेरी रात वाली कहावत चरितार्थ होती दिखती है। अमर उजाला ने बुधवार को शहर का जायजा लिया। पेश है शहर की इस समस्या पर प्रकाश डालने वाली रिपोर्ट की दूसरी कड़ी...।
त्राहि-त्राहि कर रहे हैं शहर के लोग
पडरौना। यूं ही शहर के लोग दिनभर जाम में फंसे नहीं रह रहे हैं। यातायात व्यवस्थापकों की उदारता से नगर के प्रमुख सड़क पार्किंग स्थल के रूप में तब्दील हो गए हैं।
भगवान बुद्ध, बाबा सिद्धनाथ, शाह बूढ़न पीर व बाबा कुबेरनाथ जैसे सिद्धपीठों से चारों तरफ से घिरे पडरौना शहर के लोग त्राहि-त्राहि कर रहे हैं। कारण यह कि यातायात व्यवस्थापकों की उदासीनता के कारण सड़कों पर चलना दूभर होता जा रहा है। जाम से जूझ रहे शहर में टैक्सी चालक और समस्या उत्पन्न कर रहे हैं। शहर की अधिकांश सड़कों को टैक्सी एवं टेंपो चालकों ने पार्किंग स्थल बना लिया है। सबसे बुरा हाल तो शहर से गुरजने वाले राष्ट्रीय राजमार्ग 28 बी का है। कोई अजनबी अगर इस मार्ग पर आ जाए तो उसे सहज ही विश्वास नहीं होगा कि यह राष्ट्रीय राजमार्ग है या किसी शहर की संकरी गली। एनएच 28 बी की पटरियों पर अतिक्रमण तो हुआ ही है, साथ ही सड़क पर दोनों तरफ खड़े टेंपो व टैक्सी राजमार्ग को संकरी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ रहे हैं। सुभाष चौक के आसपास क्षेत्रों को तो स्थायी पार्किंग स्थल ही बना दिया गया है। जबकि शहरी यातायात एवं कानून व्यवस्था को चुस्त दुरुस्त रखने के लिए यातायात पुलिस सुभाष चौक पर तैनात है ही, सिविल पुलिस बूथ भी सुभाष चौक पर ही बना है। मुख्य पश्चिमी गंडक नहर पुल पार करते ही राष्ट्रीय राजमार्ग का और बुरा हश्र देखने को मिलता है। यहां दोनों तरफ टेेंपो एवं टैक्सियां कम दिखेंगी, लेकिन दोनों तरफ सड़क पर ट्रक खड़े दिख जाएंगे।
टैक्सी चालकों को कौन सिखाए
पडरौना। शहर की कोई भी प्रमुख सड़क ऐसी नहीं मिलेगी, जहां सवारी भरती टैक्सियां न दिख जाएं। सड़क के बीचोबीच अचानक रुककर सवारी भरती गाड़ियों की वजह से शहर में सुगम यात्रा का ख्वाब चकनाचूर होने के साथ किसी को कभी भी अस्पताल पहुंचा सकता है।
अधिक से अधिक फेरे लगाने तथा सवारियों के चक्कर में टैक्सी चालक कभी भी कहीं से सवारी भरना शुरू कर देते हैं। चालकों की इस मनमानी के कारण जाम की समस्या तो रहती ही है, कई बार दुर्घटना होते होते बचती है। कोतवाली के पास से सुभाष चौक तक तथा आेंकार वाटिका कालोनी से लेकर बावली चौक तक रुक-रुककर सवारी भरते बेपरवाह टैक्सीवाले मिल जाएंगे।

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