नहीं बन रहे खराब ट्रांसफार्मर

Kushinagar Updated Thu, 04 Oct 2012 12:00 PM IST
पडरौना। कुशीनगर जिले के सभी गांवों को नियमित बिजली मिलनी टेढ़ी खीर लग रही है। विद्युत कटौती से लोग परेशान हैं ही, बार-बार ट्रांसफार्मरों के जल जाने और इनकी समय पर मरम्मत न होने के चलते गांवों का अंधेरा दूर नहीं हो पा रहा है। ऊपर से ट्रासफार्मर की मरम्मत करने वाले गोरखपुर के फर्मों की हड़ताल ‘दाद में खाज’ का काम कर रही है।
उल्लेखनीय है कि विद्युत आपूर्ति के लिए विद्युत विभाग ने 630, 400, 250, 160, 100, 63, 25 और 10 केवीए क्षमता वाले ट्रांसफार्मर लगा रखे हैं। जहां से होकर बिजली उपभोक्ताओं के घराें तक जाती है। जितने केवीए के ट्रांसफार्मर होते हैं, उतने ही एक-एक किलोवाट के कनेक्शन देने होते हैं। किंतु हकीकत इससे काफी जुदा है। इन ट्रांसफार्मरों की संख्या से अधिक विद्युत कनेक्शन दे दिए जाने के कारण लोड बढ़ जाता है। इस वजह से ट्रांसफार्मर जल जाते हैं। जाड़े में ट्रांसफार्मरों के जलने की संख्या कम होती है लेकिन ज्यों-ज्यों गर्मी की धमक बढ़ती है, इनकी संख्या में इजाफा होने लगता है।
ट्रांसफार्मर की मरम्मत के लिए पडरौना विद्युत उपखंड पर स्टोर बना है। जहां जिले भर के खराब ट्रांसफार्मर लाए जाते हैं। इनकी मरम्मत करने वाले गोरखपुर के विभिन्न फर्मों के पास इन्हें भेजा जाता है, जहां से इनको बनकर आने में लगभग एक महीने तक का वक्त लग जाता है। समय से इनकी मरम्मत न हो पाने के कारण गांव के गांव अंधेरे में डूबे रहते हैं।
इधर, 16 सितंबर से बकाया पेमेंट के भुगतान की खातिर ट्रांसफार्मर की मरम्मत करने वाले फर्म हड़ताल पर हैं। इसका भी खामियाजा उपभोक्ताओं को ही भुगतना पड़ रहा है। विभागीय सूत्रों की मानें तो तकरीबन डेढ़ सौ गांवाें के ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए इन फर्मों को भेेजे गए थे, वे हड़ताल के चलते बनकर आए नहीं और अब लगभग सौ ट्रांसफार्मर मरम्मत के लिए जिले के स्टोर पर पहुंचा दिए गए हैं।

ढीली करनी पड़ती है जेब
ट्रांसफार्मरों के जलने की सबसे बड़ी वजह ओवरलोडिंग है। क्षमता से अधिक भार ट्रांसफार्मर झेल नहीं पाते और जल जाते हैं। इनकी मरम्मत के लिए ट्रैक्टर-ट्राली से स्टोर तक पहुंचाने के साथ-साथ उसे उतारने और चढ़ाने का खर्च उपभोक्ताआें को ही वहन करना पड़ता है। विद्युत विभाग के मुताबिक इसके लिए ठेके पर मजदूर रखे गए हैं, जिन्हें काफी कम पैसे मिलते हैं। उनके खर्च के लिए मजदूरी उपभोक्ताआें को ही देनी पड़ती है। कई बार तो एक ही ट्रांसफार्मर बार-बार जल जाने के चलते खर्चा काफी बढ़ जाता है।
कोट
ट्रांसफार्मर के गोरखपुर से बनकर आने में तकरीबन एक महीने का वक्त लग जाता है। जाड़े में ट्रांसफार्मर कम खराब होते हैं, जबकि गर्मी के मौसम में इनकी संख्या बढ़ जाती है। इन दिनाें ट्रांसफार्मर बनाने वाले फर्मों की हड़ताल चल रही है।
योगेंद्र कुमार गुप्ता, भंडार अधीक्षक
विद्युत वितरण खंड पडरौना, कुशीनगर

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