अब जेई से मासूमों को भगवान ही बचाएंगे

Kushinagar Updated Sat, 29 Sep 2012 12:00 PM IST
पडरौना। मस्तिष्क ज्वर से पीड़ित मासूमों की जान अब भगवान के ही हाथ में है। वजह यह कि शासन ने जिन नौ बाल रोग विशेषज्ञों की जनपद में तैनाती की थी, उनमें से छह अब तक आए ही नहीं। बाल रोग विशेषज्ञों की कमी से जिले के पीएचसी, सीएचसी पर बच्चों को प्राथमिक इलाज तक नहीं मिल रहा है। मरीजों के बढ़ते दबाव के चलते संयुक्त जिला अस्पताल भी केवल रेफरल हास्पिटल हो गया है। इस साल केवल सरकारी अस्पतालों में ही अब तक एईएस के 441 रोगी आ चुके हैं, जिनमें से 47 की मौत हो चुकी है।
कुशीनगर जनपद मस्तिष्क ज्वर के मामले में बेहद संवेदनशील है। हर साल यह बीमारी जुलाई से नवंबर के बीच सैकड़ों घरों का आंगन सूना कर देती है। जो बच जाते हैं, उनमें से बड़ी संख्या में विकलांग हो जाते हैं। वर्ष 2005 में जब तत्कालीन प्रदेश सरकार ने जेई प्रभावितों को मुआवजा देने की घोषणा की, उसी के साथ स्वास्थ्य महकमे ने तकनीकी खेल खेलते हुए जेई के इन मरीजों को एईएस (एक्यूट इंसेफेलाइटिस सिंड्रोम) नाम दे दिया। बढ़ते दबाव को देखते हुए एईएस/जेई पीड़ितों के इलाज के लिए अलग से व्यवस्थाएं शुरू हुईं। निरोधात्मक उपायों के अलावा जिला अस्पताल के जनरल वार्ड में अलग से वार्ड बनाया गया। सरकार ने बड़े दावे के साथ घोषणा की कि जेई/एईएस के इन मरीजों को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्रों पर ही तत्काल इलाज की सुविधा उपलब्ध कराई जाएगी, परंतु इस सारी कवायद का सच यही है कि जिले के सरकारी अस्पतालों में बाल रोग विशेषज्ञ ही नहीं हैं। डाक्टरों की कमी से पीएचसी/सीएचसी पर ऐसे मरीजों के इलाज का इंतजाम नहीं हो पा रहा है। नतीजतन अधिकतर मरीज पहले प्राइवेट डाक्टरों के पास जाते हैं और स्थिति बिगड़ जाने पर जिला अस्पताल पहुंचते हैं। जिला अस्पताल में भीड़ के चलते मरीजों को इलाज की वह सुविधा नहीं मिल पाती, जितनी की जरूरत होती है। जिला अस्पतालों में मरीजों के दबाव का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि यहां के एईएस/जेई वार्ड में इस साल 270 रोगी भर्ती हो चुके हैं, जिनमें से 90 सितंबर में ही भर्ती हुए हैं। डाक्टरों की कमी दूर करने के लिए पिछले दिनाें शासन ने औरैया से डा. रियाज अहमद और डा. विवेक निगम, अलीगढ़ से डा. प्रदीप कुमार शर्मा, डा. मनोज कुमार शर्मा, जेपीनगर से डा. अवनीश कुमार, सीतापुर से डा. राजेश कुमार पासवान, मथुरा से डा. एके आनंद और डा. राजीव रोहतगी तथा भीमनगर से डा. एके सिंह को कुशीनगर जनपद में स्थानांतरित किया, लेकिन इनमें से केवल डा. रियाज अहमद, डा. विवेक निगम और डा. प्रदीप कुमार शर्मा ने ही ज्वाइन किया। इन तीनाें को कप्तानगंज, फाजिलनगर और हाटा सीएचसी पर भेज दिया गया, लेकिन दुदही, रामकोला, खड्डा, कुबेरनाथ, सेवरही और तमकुही में बाल रोग विशेषज्ञ नहीं पहुंचे।

इंसेफेलाइटिस से फिर एक मौत
बरवापट्टी। विकास खंड दुदही के ग्राम दशहवां टोला नंदपुर के एक पांच वर्षीय बच्चे की मौत इंसेफेलाइटिस से हो गई है। बच्चे का मेडिकल कालेज में इलाज चल रहा था।
मिली जानकारी के अनुसार ग्राम दशहवां टोला नंदपुर निवासी फौदार का पांच वर्षीय पुत्र सगीर पिछले 15 दिनों से बुखार से पीड़ित था। उसे तेज झटके भी आते थे। पहले उसे जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया, जहां से डाक्टरों ने उसे मेडिकल कालेज रेफर कर दिया था। बताया जाता है कि इलाज के दौरान ही बृहस्पतिवार की देर शाम उसकी मौत हो गई। ग्राम निवासी मनोज पटेल का कहना है कि गांव में साफ-सफाई की दशा बहुत खराब है। इंसेफेलाइटिस से एक बच्चे की मौत होने के बाद भी कोई अधिकारी-कर्मचारी गांव में नहीं पहुंचा।

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