कटान से कई गांवों के अस्तित्व पर संकट

Kushinagar Updated Wed, 05 Sep 2012 12:00 PM IST
तमकुहीरोड । गंडक नदी में कम जलस्तर के बावजूद बैक रोलिंग के चलते हो रही कटान से पिपराघाट के आधा दर्जन से अधिक गांवों पर अस्तित्व का खतरा मंडराने लगा है। चिंतित ग्रामीणों को अपनी सुरक्षा को लेकर बेचैनी बढ़ गई है। ग्रामीण ऐसी स्थिति के लिए बाढ़ खंड को दोषी मान रहे हैं।
उल्लेखनीय है कि प्रदेश सरकार हर वर्ष बंधों के रखरखाव पर पानी की तरह धन खर्च करती है। फिर भी हर साल बरसात शुरू होतेे ही बंधों पर खतरा मंडराने लगता है। ग्रामीण पुजारी सिंह का कहना है कि 15 जून से बरसात की शुरुआत मानी जाती है। इसके पहले बंधों के रखरखाव का कार्य पूर्ण हो जाना चाहिए। इसके लिए जिम्मेदार लोगों की लापरवाही के चलते रखरखाव का कार्य लगभग 15 जून के आसपास शुरू होता है। जब बंधों पर दबाव बढ़ता है तो अधिकारी से लेकर राजनेता तक हायतौबा मचाने लगते हैं। नरवाजोत बंधे के किलोमीटर 1.0 पर बने स्पर का तीन चौथाई हिस्सा नदी की धारा में विलीन हो जाने के बाद नदी मुख्य बंधे से महज 20 से 25 मीटर की दूरी पर बह रही है। जिस हिसाब से नदी का कटान जारी है उस हिसाब से मुख्य बंधे तक नदी की मुख्य धारा के पहुंचने में ज्यादा समय नहीं लगेगा। यदि ऐसा हुआ तो नरवाजोत बंधे के किनारे बसे गांव शिव टोला, जोगनी टोला, बुटन टोला, मोतीराय टोला, इमिलियां टोला और भंगी टोला नदी की मुख्य धारा में समाहित हो जाएंगे। इस संबंध में नरवाजोत बंधे की सुरक्षा में लगे अवर अभियंता का कहना है कि खतरे जैसी कोई बात नहीं है। स्थिति नियंत्रण में है।

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