तबादले से लड़खड़ा गई प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था

Kushinagar Updated Mon, 03 Sep 2012 12:00 PM IST
पडरौना। परिषदीय स्कूलों से महिला शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के बाद जिले की प्राथमिक शिक्षा व्यवस्था लड़खड़ा गई है। सोमवार को जनपद के दो सौ से ज्यादा स्कूल खुलेंगे, लेकिन न तो वहां कोई छात्रों की उपस्थिति दर्ज करने वाला होगा, न ही मिड डे मील (एमडीएम) की व्यवस्था करने वाला।
कुशीनगर जनपद में बेसिक शिक्षा परिषद की ओर से संचालित 1777 प्राथमिक स्कूलों में 290000 व 800 जूनियर हाईस्कूलों में 51000 छात्र नामांकित हैं। इन स्कूलों में लगभग 3600 शिक्षक कार्यरत थे। इनमें सर्वाधिक पिछले तीन साल के दौरान विशिष्ट बीटीसी के जरिए भर्ती हुए अध्यापकों की थी। सरकार ने 14 अगस्त को कुशीनगर जनपद से विशिष्ट बीटीसी के अध्यापकों में से 545 महिलाओं को उनके गृह जनपद अथवा नजदीक के जिलों में स्थानांतरित कर दिया। पहले से ही इस जिले में अध्यापकों की कमी थी। प्राथमिक व जूनियर हाईस्कूलों को भी कहीं एक तो कहीं दो शिक्षकों के भरोसे खोला जा रहा था। अध्यापकों के स्थानांतरण के चलते यह व्यवस्था भी ध्वस्त हो गई। महिला शिक्षकों के अंतर्जनपदीय स्थानांतरण का असर वैसे तो पूरे जिले पर पड़ेगा, लेकिन सर्वाधिक नुकसान फारवर्ड ब्लाक माने गए पडरौना, कसया, हाटा, सुकरौली, फाजिलनगर, तमकुहीराज के अलावा पिछड़े ब्लाक में शुमार कप्तानगंज और मोतीचक को उठाना पड़ेगा। वजह यह कि फारवर्ड ब्लाक के स्कूलों पर केवल महिलाओं की ही नियुक्ति हुई थी और अधिकतर विद्यालय एकल अध्यापकों के सहारे थे। इस संबंध में बीएसए पीके पांडेय का कहना है कि उपलब्ध शिक्षकों को ही समायोजित कर विद्यालय संचालित कराने की व्यवस्था कराई जाएगी। पूरा प्रयास किया जाएगा कि कोई विद्यालय बंद न होने पाए।
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बाकी भी मांग रहे स्थानांतरण
पडरौना। अंतर्जनपदीय तबादले से वंचित रह गईं बाकी अध्यापिकाएं भी स्थानांतरण की मांग कर रही हैं। इतना ही नहीं, दूसरे जनपदों के मूल निवासी पुरुष भी महिलाआें की ही भांति गृह जनपद अथवा पड़ोसी जिले में ट्रांसफर की मांग कर रहे हैं। अध्यापकों का तर्क है कि एक समान नियुक्ति प्रक्रिया, पद और सेवा शर्तों तथा अंतर्जनपदीय स्थानांतरण के लिए किए गए आनलाइन आवेदन के बावजूद शासन ने जब महिलाओं को स्थानांतरित कर दिया तो उन्हें क्यों नहीं यह मौका मिला।
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तो बंद करने पड़ेंगे अधिकतर स्कूल
पडरौना। शिक्षकों को अगर बाद में इसी तरह से जिले से बाहर भेजा जाता रहा तो यहां दो तिहाई से ज्यादा स्कूलों में ताले लटकाने पड़ेंगे। वजह यह कि जब से विशिष्ट बीटीसी के तहत अध्यापकों की भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई है, तब से कुशीनगर जनपद में अधिकतर पद बाहरी जिले के आवेदकों से ही भर जा रहे हैं। विभागीय सूत्रों की मानें तो जिले में कार्यरत कुल अध्यापकों में से नए और पुराने अध्यापकों को मिलाकर भी यह संख्या एक हजार के आसपास ही पहुंचती है।

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