आर-पार की लड़ाई की कर रहे तैयारी

Kushinagar Updated Fri, 03 Aug 2012 12:00 PM IST
कसया। मैत्रेय परियोजना के लिए ली जाने वाली अपनी जमीन बचाने की कोशिश में जुटे भूमि बचाओ संघर्ष समिति के सदस्य किसानों ने एक बार फिर व्यापक आंदोलन के लिए कमर कस ली है। बुधवार की रात प्रभावित गांवों में जनजागरण के जरिए किसानों को एकजुट करने की शुरुआत हुई। इस महीने की 23 तारीख को किसान आंदोलन से जुड़े देश भर के दिग्गजों का जमावड़ा भी सिसवा महंथ में होगा।
मैत्रेय परियोजना के लिए अपनी जमीन देने को यहां के किसान तैयार नहीं हैं। वर्ष 2001 से ही इस मामले को लेकर कभी तेज तो कभी सामान्य गति से विरोध होता आ रहा है। 16 जून 2007 से भूमि बचाओ संघर्ष समिति के बैनर तले सिसवां महंथ चौराहे पर अनवरत धरना चल रहा है। लंबे समय तक चले आंदोलन के बाद पिछले साल से ऐसा लगने लगा था कि मैत्रेय परियोजना को अब कहीं और स्थानांतरित किया जाएगा परंतु डीएम रिग्जियान सैंफिल की रुचि से एक बार फिर यह मुद्दा गरमा गया है। अपनी जमीन बचाने के लिए जान तक देने की बात करने वाले किसान फिर से संगठित होकर उग्र आंदोलन की तैयारी में जुट गए हैं। विश्वस्त सूत्रों की मानें तो किसानों की अगुवाई कर रहे लोगों ने बुधवार की रात बिंदवलिया गांव में चौपाल लगाई। इसमें लोगों से मैत्रेय परियोजना के संबंध में चरचा की गई। किसान नेताओं का दावा है कि इस गांव के सभी लोगाें ने एक स्वर से कहा कि वे किसी भी कीमत पर अपनी जमीन मैत्रेय परियोजना के लिए नहीं देंगे। विंदवलिया में किसानों से मिली समर्थन के बाद उत्साहित किसान नेताओं ने एक-एक दिन के अंतराल पर सिसवां समेत अन्य प्रभावित होने वाले गांवों के किसानों के बीच भी इसी तरह चौपाल लगाकर समर्थन जुटाने का निर्णय लिया है। भूमि बचाओ संघर्ष समिति के अध्यक्ष गोवर्द्धन प्रसाद गौंड़ की मानें तो सामाजिक कार्यकर्ता संदीप पांडेय इस महीने की नौ तारीख को सिसवां महंथ आ रहे हैं। यहां उनके साथ आंदोलन के महत्वपूर्ण बिंदुओं पर चरचा होगी। इसके अलावा 23 अगस्त को राष्ट्रीय जन आंदोलनों से जुड़े तमाम बड़े नेता तथा भारतीय किसान यूनियन और राष्ट्रीय लोकदल के पदाधिकारी पहुंचेंगे। स्थानीय किसानों के साथ बातचीत होगी और फिर वहीं निर्णायक जंग की घोषणा हो जाएगी।

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