उपेक्षित है तुर्कपट्टी का सूर्य मंदिर

Kushinagar Updated Tue, 24 Jul 2012 12:00 PM IST
तुर्कपट्टी। पर्यटन की दृष्टि से महत्वपूर्ण तुर्कपट्टी का सूर्य मंदिर प्रशासनिक उपेक्षा का दंश झेल रहा है। गुप्तकालीन नीलमणि पत्थर की मूर्ति वाला यह सूर्य मंदिर उत्तर भारत में इकलौता है। बावजूद इसके मंदिर तक जाने के लिए ढंग का रास्ता भी नहीं है।
कसया से 15 किलोमीटर पूरब स्थित तुर्कपट्टी बाजार का सूर्य मंदिर तुर्कपट्टी-फाजिलनगर मार्ग पर है। मान्यता है कि तुर्कपट्टी महुअवा खास गांव के रहने वाले सुदामा शर्मा को रात में स्वप्न दिखा कि वह जिस जगह पर सोया है उसके नीचे भगवान सूर्य की मूर्ति है। सुदामा ने इस स्वप्न पर ध्यान नहीं दिया। कुछ दिन बाद उसके परिवार के एक सदस्य की अकाल मृत्यु हो गई। इसके बाद सुदामा ने यह बात कुछ लोगों को बताई। 31 जुलाई 1981 को सूर्य ग्रहण लगा था। उसी दिन पूर्व ग्राम प्रधान मथुरा शाही के नेतृत्व में ग्रामीणों ने सुदामा शर्मा के बताए गए स्थान पर खुदाई की थी। खुदाई में यहां दो प्रतिमाएं मिलीं। इनमें से एक बलुई मिट्टी की थी और दूसरी नीलमणि पत्थर की। इतिहासकारों ने इसे गुप्तकालीन बताया था।
अद्भुत है यह मूर्ति
तुर्कपट्टी में मिली भगवान सूर्य की मूर्ति अद्भुत है। पुराणों में सूर्य के जो लक्षण वर्णित हैं वे इस मूर्ति में दिखते हैं। रथ में जुते सात घोड़े, सूर्य की रानियां और सारथी अरुण की छवि साफ दिखती है। प्रतिमा में राहु और केतु भी दिखते हैं। भगवान सूर्य के दोनों हाथों में कमल है। साथ ही किन्नर और गंधर्व सूर्य का गुणगान करते दिखते हैं।
सुरक्षा का नहीं है इंतजाम
24 अप्रैल वर्ष 1998 की रात्रि में यहां से नीलमणि पत्थरवाली भगवान सूर्य की मूर्ति चोरी हो गई थी। काफी प्रयास के बाद मूर्ति तो मिली लेकिन उसके बाद भी सुरक्षा का कोई बंदोबस्त नहीं किया गया। कुछ दिन तक दो सिपाही तैनात रहते थे। अब एक होमगार्ड की भी ड्यूटी नहीं लगती।
सूर्य महोत्सव हुआ बंद
यहां पहली बार 1985 में सूर्य महोत्सव का आयोजन हुआ था। प्रदेश के संस्कृति विभाग और स्थानीय लोगों के सहयोग से शुरू हुए इस महोत्सव से इस जगह को काफी प्रसिद्धि मिली। देशी-विदेशी पर्यटक भी आने लगे। 1992 में सूर्य महोत्सव बंद हुआ तो पर्यटकों ने भी यहां से नाता तोड़ लिया।
सुविधाओं की कमी है
पर्यटन की दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण इस सूर्य मंदिर के विकास पर सरकार ने शुरू में ध्यान दिया। तब 25 लाख रुपये भी यहां विकास के लिए दिए गए थे। बाद में किसी ने इसकी सुधि नहीं ली। विधायक निधि से मंदिर परिसर में बना फव्वारा कई साल से बंद पड़ा है। विश्राम गृह भी देखभाल के अभाव में जर्जर हो गया है। आवागमन का कोई सरकारी साधन न होने के चलते पर्यटकों को तमाम परेशानियों का सामना करना पड़ता था। इससे उनका यहां से मोहभंग हो गया। तुर्कपट्टी बाजार से सूर्य मंदिर होते हुए फाजिलनगर तक जाने वाली सड़क गड्ढों में तब्दील हो चुकी है। हल्की बारिश में ही यह सड़क जलमग्न हो जाती है। पूरा परिसर गंदगी से पटा रहता है।

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